Brihadeshwar Temple in Hindi|बृहदेश्वर मंदिर के बारे में सम्पूर्ण जानकारी| Mandir without Neev.

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Brihadeshwar Temple in Hindi (बृहदेश्वर मंदिर)

भारत की भूमि धार्मिक स्थलों की धरोहर है। एक से बढ़कर एक धार्मिक स्थल अपने आप में अनूठा इतिहास व रहस्य छुपाए हैं। इनकी वास्तुकला बहुत ही विशेष है।

इन्हीं धार्मिक स्थलों में से एक धार्मिक स्थल है, “बृहदेश्वर मंदिर” जो अपने आप में ही कई रहस्य समेटे हुए हैं, जिनका जवाब कोई नहीं दे पाया।

तमिलनाडु में स्थित “Brihadeshwar Mandir” अपनी अद्भभुत वास्तुकला और स्थापत्य शैली के लिए मशहूर है।

Brihadeshwar Temple in Hindi के इस आर्टिकल में बृहदेश्वर मंदिर की पूरी जानकारी दी जायेगी।मंदिर का इतिहास, वास्तुकला, मंदिर का रहस्य और इस मंदिर के बारे में सभी सवालों का जवाब दिया जाएगा।बिना नींव के टिका (Mandir without Neev).

 Brihadeshwar Temple की mystery जानने के लिए इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़े।आइए शुरू करते हैं,ये Interesting Article “Brihadeshwar Temple in Hindi.

Where is the Brihadeshwara Temple in hindi(बृहदेश्वर मंदिर कहा स्थित है।)

बृहदेश्वर मंदिर तमिलनाडु के तंजावुर (तंजोर) में स्थित है। इस मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति स्थापित की गई है।

दिलचस्प बात ये है कि भगवान शिव की मूर्ति, नृत्य की मुद्रा में दर्शाई गई है, जिसे नटराज के नाम से जाना जाता है।

Brihadeshwar Mandir का निर्माण किसने करवाया?

1000 साल पुराना बृहदेश्वर मंदिर भारत का एक ऐसा रहस्यमयी मन्दिर है, जिसके निर्माण में भी कई रोचक बातें सामने आई।

इस मंदिर का निर्माण 1009 ईस्वी में चोल राजवंश के राजा राजराज द्वारा करवाया गया था।इसलिए इस मंदिर को राजेश्वर, राज राजेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। पेरिया कोविल के नाम से भी यह मंदिर मशहूर हुआ।

History Of Brihadeshwar Temple  in Hindi(इतिहास)

Brihadeshwar Temple  in Hindi

Brihadeshwar Mandir का परिचय पढ़ने के बाद आप जान ही गए होंगे कि दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु के तंजोर में स्थित है, यह मंदिर।

दक्षिण भारत की संस्कृति को संजोए यह मंदिर तमिलनाडु का ऐतिहासिक मंदिर है, जिसका निर्माण 1000 साल पहले चोल वंश के राजा राजराज ने करवाया था।इसलिए यह मंदिर राजेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

1004 में इस मंदिर का निर्माण शुरू हुआ और 1009 में यह मंदिर बनकर तैयार हुआ। लगभग 5 साल लगे इस मंदिर को बनाने में।

चोल वंश का राजा राजराज शिवभक्त था। शिवजी की पूजा व आराधना के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया।ऐतिहासिक वास्तुकला, कलाकृति और विशालकाय मंदिर का संगमरमर का प्रांगण मंदिर को और आकर्षक व रहस्यमयी भी बनाता है।

इस मंदिर का इतिहास कई रोचक बातों को छुपाए हुए है, जो कोई भी हल नहीं कर पाया।बिना नींव का मंदिर( mandir without neev) सुना है आपने कभी?

जी हां , यही एक ऐसा मंदिर है, को बिना नींव के बनाया गया।सदियों पुराना यह मंदिर 1.3 लाख टन ग्रेनाइट के पत्थर से बनाया गया। आस पास ग्रेनाइट पत्थर मौजूद भी नहीं था।

कोई नहीं जानता इतनी भारी मात्रा में  ग्रेनाइट कहां से और कैसे लाया गया? हिंदू धर्म का प्रतीक यह मंदिर अपनी ही एक ऐतिहासिक मान्यता रखता है, जिसका कोई तोड़ नहीं।

चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं Brihadeshwar Mandir (in Hindi) के आर्टिकल में आगे क्या interesting बताया गया है?

Brihadeshwar Mandir की विशेषतायें in Hindi.

दक्षिण राज्य तमिलनाडु की संस्कृति और हिंदू धर्म की प्रतिष्ठा संभाले हुए आज यह मंदिर पूरे विश्व में Famous है।इस मंदिर की विशेषताएं ही इसे अद्धभूत और अनूठा बनाती हैं।

बृहदेश्वर मंदिर वास्तुकला (Architechtual Marvel of Brihadeshwar Temple in Hindi)

Brihadeshwar Mandir की अद्धभूत वास्तुकला की खूबसूरती देखते ही बनती है।मंदिर की दीवारों पर छोटी छोटी देवी देवताओं की मूर्तियां बनाई गई है।

 ग्रेनाइट के पत्थर को ऐसे नकाशा गया है कि सबके होश ही उड़ जाए।स्थापत्य शैली व कलाकृति की खूबसूरती का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है।

1.3 लाख टन ग्रेनाइट के पत्थर पर वास्तुकला का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय है।समझना मुश्किल है,उन कारीगरों को आखिर कहां से लाया गया होगा?

गोपुरम( प्रवेशद्वार)

Brihadeshwar Temple  in Hindi
Brihadeshwar Temple  in Hindi

Brihadeshwar Mandir की मुख्य विशेषता इसका प्रवेशद्वार है जिसे गोपुरम कहा जाता है,जो 66 मीटर ऊंचा है।

कोई भी कार्यक्रम हो या शोभायात्रा निकाली जाए तब इस प्रवेशद्वार (गोपुरम) का प्रयोग किया जाता है।यह प्रवेशद्वार इतना ऊंचा है कि दूर से ही दिखाई देता है।

Brihadeshwar Temple in Hindi(Mandir without neev) इस आर्टिकल में आगे बात करेंगे शिव प्रतिमा, नंदी बैल की । यह भी एक रोचक विषय है। इनकी प्रतिमा बनाना भी आसान न था।

Brihadeshwar शिवलिंग

Brihadeshwar Temple  in Hindi

बृहदेश्वर मंदिर अपनी अद्वितीय वास्तुकला और संगमरमर के विस्तृत प्रांगण , असीम सुंदरता के कारण विश्व भर में प्रसिद्ध हुआ।  चोलवंश के राजा राजराज शिवभक्त थे।

इस मंदिर को शिव की पूजा अर्चना वआराधना के लिए बनवाया गया।विशेष बात ये है कि इस मंदिर मे भगवान शिव की मूर्ति , नृत्य की मुद्रा धारण किए हुए है। इस मूर्ति को नटराज कहा जाता है।

इस मंदिर के मुख्य रूप से दो भाग हैं

1) गर्भगृह

2) ब्रह्मस्थान

गर्भगृह में दुनिया का सबसे बड़ा कहा जाने वाला शिवलिंग स्थापित है।बृहदेश्वर मन्दिर में 12 फीट ऊंचा शिवलिंग स्थापित है, जिनके दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं।

मंदिर में शिवजी के साथ माता पार्वती, कार्तकिय और नंदी बैल की भी पूजा होती है।

नंदी भगवान की अद्भभुत मूर्ति

Brihadeshwar Temple  in Hindi

16वीं शताब्दी में 20 टन भारी ग्रेनाइट के पत्थर को तराशकर शिवजी की सवारी “नंदी बैल” की मूर्ति बनाई गई।यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी प्रतिमा मानी जाती है।

मंदिर की कलाकृति

Brihadeshwar Temple  in Hindi

13 मंजिला बिना नींव के बना यह मंदिर (mandir without neev) 66 मीटर ऊंचा है और यह 16 फीट ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है।

वास्तुकला में अद्वितीय यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला के आधार पर निर्मित किया गया।मंदिर की छत पर ऐसा लगता है जैसे रंगों से पेंट किया गया हो परंतु वास्तव में वे रंगीन पत्थर ही हैं जिनकी सुंदरता देखते ही बनती है।


बृहदेश्वर मंदिर का रहस्य ( Mystery of Brihadeshwar Temple in Hindi)

रहस्यों से भरा पड़ा है इस मंदिर का निर्माण।आइए आपको भी इन रहस्यों के बारे में बताएं, जो आज भी सवाल के दायरे में ही खड़े हैं, जो आज भी नामुमकिन से लगते हैं।

बिना नींव के टिका हुआ बृहदेश्वर मंदिर ( Mandir without Neev)

बिना नींव के क्या आप किसी इमारत के निर्माण की कल्पना कर सकते हैं?जी हां,तमिलनाडु में स्थित Brihadeshwar Temple एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जो बिना नींव के टिका है,अर्थात बिना नींव के इस मंदिर का निर्माण किया गया।

काफ़ी Interesting लग रहा होगा ना, ऐसा सुनना(Mandir without Neev)आखिर ये मंदिर बिना नींव के टिका हुआ कैसे है?

 1000 साल पुराना ये मंदिर 6 भूकंप झेल चुका है,उसके बावजूद भी ज्यों की त्यों इसकी शोभा निराली है।Actually, ये मंदिर Interlocking (इंटरलॉकिंग) विधि से बनाया गया है। इसके निर्माण करते समय पत्थरों के बीच सीमेंट या कोई भी चिपकाने वाला पदार्थ use नहीं किया गया।

इस तरह इस मन्दिर का निर्माण बिना पृथ्वी को खोदे किया गया था, इसलिए यह मंदिर बिना नींव का मंदिर कहलाया जाता है।

ग्रेनाइट पत्थर कहां से आया?

तमिलनाडु के तंजोर मेंस्थित Brihadeshwar Mandir अपनी अद्धभूत वास्तुकला के लिए जाना जाता है।अलग अलग प्रकार की आकर्षक कला की गई थी, ग्रेनाइट पत्थर पर।

बृहदेश्वर मंदिर के निर्माण में 1.3लाख टन ग्रेनाइट पत्थर का प्रयोग किया गया।ये बात भी रोचक विषय था कि उस युग में ग्रेनाइट पत्थर कहां से प्राप्त किया गया?

इससे भी बड़ा प्रश्न उठता है, कि इतनी भरी मात्रा में ग्रेनाइट पत्थर को मंदिर के निर्माण के लिए कैसे ले जाया गया?

आपकी जिज्ञासा खत्म करते हुए बता दे कि 1.3 लाख टन ग्रेनाइट 3000 हाथियों की सहायता से लाया गया।बिना नींव के इस मंदिर का निर्माण किया गया, ग्रेनाइट पत्थर का प्रयोग करके।

गुम्बद की छाया पृथ्वी पर क्यों नहीं पड़ती?

Brihadeshwar Temple  in Hindi
Brihadeshwar Temple  in Hindi

जी हां, सच बात है, पृथ्वी पर मंदिर के गुम्बद की छाया नहीं पड़ती।पता नहीं ये कैसे Possible है।Brihadeshwar Temple के गुम्बद को बड़े तरीके से बनाया गया है।

सूरज की रोशनी चारों और से चाहे जैसे भी मंदिर पर पड़ती है तो मंदिर के निचले हिस्से की परछाई तो दिखती है पर गुम्बद की थोड़ी सी भी छाया दिखाई नहीं देती।

 ये क्या किसी अजूबे से कम है?यह घटना आज भी इस मंदिर के रहस्य से कम नहीं।मंदिर का गुम्बद 80 टन ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। इस गुम्बद पर एक स्वर्ण कलश को भी स्थापित किया गया है।

Brihadeshwar मंदिर का पजल्स system

इस मंदिर का निर्माण ग्रेनाइट के शिलाखंडों से किया गया है परंतु आश्चर्यजनक बात ये है कि इन शिलाखंडो को आपस में ना तो चिपकाया गया न ही सीमेंट या प्लास्टर प्रयोग किया गया।

बल्कि इन शिलाखंडों को आपस में पजल्स सिस्टम से fix किया गया। यह भी मंदिर का हैरान कर देने वाला रहस्य है।

Brihadeshwar Temple का महत्त्व in Hindi

 बृहदेश्वर मंदिर भारत की धार्मिक प्रथाओं व संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।

:_Centre of worship and pilgrimage (पूजा और अनुष्ठान)

चोल वंश के राजा राजराज शिव भक्त थे। अपने परिवार को शिव का आर्शीवाद प्रदान करने के लिए उन्होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया। इस मंदिर का उद्देश्य शिव की भक्ति और आराधना है।

भारतवर्ष के कोने कोने से नहीं बल्कि संसार के विभिन्न भागों से पर्यटक, शिव की भक्ति करने आते हैं और मंदिर की आलौकिक सुंदरता में खो जाते हैं।

यह मंदिर तमिलनाडु की संस्कृति, कला और वास्तुकला का प्रतीक है।इस मंदिर के प्रांगण में शिव भक्ति के आयोजन किया जाते हैं। देश विदेश से लोग सम्मलित होते हैं, इस आयोजन में।

परंपरागत तरीके से अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। बृहदेश्वर मंदिर भारत देश की अमूल्य धरोहर है।

Symbol of India’s Rich Architectual Heritage

Brihadeshwar Temple को “Symbol of India’s Rich Architectual Heritage” माना जाता है।बृहदेश्वर मंदिर भारत की आकर्षक वास्तुकला  और इसके गौरवशाली अतीत का प्रतीक है। यह देश की कलात्मक शक्तियों की विरासत है।

1000 साल पुराना ये मंदिर अपनी कलाकृति व  इंजीनियरिंग की अनूठी तकनीक की याद दिलाता है, जिसका जवाब देने में हर कोई असमर्थ है।

UNESCO World Heritage Site

जैसा कि कहा गया है आर्टिकल में, बृहदेश्वर मंदिर को भारत देश की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक माना जाता है। 

बृहदेश्वर मंदिर Unesco World Heritage Site पर मान्यता प्राप्त कर चुका है अर्थात विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त करने वाला एकमात्र हिंदू मंदिर है।

इस मंदिर को विश्व धरोहर की लिस्ट में 1987 में शामिल किया गया था। यह एक प्रमुख पर्यटक स्थल बन गया।यही कारण है विदेशी पर्यटक भी भारतीय पर्यटकों की तरह काफी उत्सुक रहते हैं, इस मंदिर के बारे में जानने के लिए।

पर्यटन स्थल के रूप में (Conectivity)

तंजोर या तंजावुर में स्थित Brihadeshwar टेंपल अपनी अद्धभुत वास्तुकला और विशालकाय प्रांगण की खूबसूरती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

दूर दूर से पर्यटक आते हैं, इस खूबसूरत मंदिर के दर्शन करने जो हर किसी को लुभाता है, अपने रहस्मयी व हैरतंगेज कर देने वाली रोचक तथ्यों से।

यह मंदिर विश्व में  मशहूर है, अपनी वास्तुकला और कलाकृति के कारण।पर्यटन केंद्र बनने के साथ ही बात करते हैं, इस मंदिर के सफ़र के बारे में।

किन साधनों से इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।उससे पहले यह जान लें कि वैसे तो किसी भी समय आप इस मंदिर के दर्शन को आ सकते हैं, परंतु सर्दियों का समय बेस्ट रहता है।

बृहदेश्वर मंदिर (Brihadeshwar Temple in Hindi )के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद आइए आपको अवगत कराते हैं, कि इस मंदिर तक कैसे पहुंचा जाए।.

How to reach Brihadeshwar Temple in hindi.

By Road:

तंजावुर में ही स्थित है बृहदेश्वर मंदिर।

*तंजावुर Old Bus Stand से 1 km दूर है ये मंदिर।

*तंजावुर New Bus Stand से 5.2km दूर है।

*त्रिचि Central Bus Stand से 60.3km दूर है।

आप किसी भी ऑटो, टैक्सी का प्रयोग कर सकते हैं, मंदिर तक पहुँचने में।

 By Train

Brihadeshwar Mandir , तंजावुर रेलवे स्टेशन से भी जा सकते हैं जो मन्दिर से 1.9km की दूरी पर है।

By Air

हवाई जहाज से भी जाया जा सकता है। तिरुचिरापल्ली तक की फ्लाइट लेनी है। तिरुचिरापल्ली हवाई अड्डा,बृहदेश्वर मंदिर से 60.8 किलोमीटर दूर है।

Brihadeshwar Temple  in Hindi.अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (F A Qs)

1)Brihadeshwar Temple Kaha Hai?

दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु में तंजावुर/ तंजोर में स्थित है।

2)Brihadeshwar Temple का निर्माण किसने करवाया?

चोल वंश के राजा राजराज प्रथम ने इस मंदिर का निर्माण करवाया।

3) Brihadeshwar Temple के निर्माण में कोनसा पत्थर प्रयोग किया गया?

ग्रेनाइट का पत्थर प्रयोग किया गया।

4) बृहदेश्वर मंदिर में किसकी पूजा की जाती है?

भगवान शिव के साथ माता पार्वती, कार्तकीय, नंदी बैल की प्रतिमा की पूजा की जाती है।

5) बृहदेश्वर मंदिर की ऊंचाई कितनी है?

13 मंजिला  यह मंदिर (mandir without neev) 66 मीटर ऊंचा है और यह 16 फीट ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है।

6)मंदिर के गुम्बद में कितना ग्रेनाइट use किया गया?

80 टन ग्रेनाइट

7) बृहदेश्वर मंदिर किस लिए famous है?

अद्भभुत वास्तुकला, स्थापत्य कलाकृति, बिना नींव का मंदिर , रहस्मयी बातें, यही main reason है जो यह मंदिर फेमस हुआ।

8)क्या ये मंदिर without neev बना है?

जी हां( Mandir without neev)

9)इस मंदिर को बनाने में कौनसी तकनीक प्रयोग की गई?

इंटरलॉकिंग (interlocking)

10)क्या Unesco World Heritage Site में इस मंदिर को शामिल किया गया है?

जी हां,

Conclusion

Brihadeshwar Temple (in Hindi)इस लेख को पढ़ने के बाद आपको बहुत कुछ इस मंदिर के बारे में ज्ञान हुआ होगा।

रहस्य से भरपूर इस मंदिर को आज भी कोई समझ नहीं पाया।बिना नींव के मंदिर या कोई भी इमारत कैसे बन सकती है?

इतना भारी मात्रा में ग्रेनाइट कहां से लाया गया?कितने आदमी लगे होंगे इस मंदिर के निर्माण में?

ऐसे बहुत से सवाल हैं जो इस लेख के पढ़ने के बाद भी जहन में घूमते हैं और भी मन होता है इस मंदिर को जानने का।

Brihdeshwar Temple को जीवन में एक बार जरूर देखना चाहिए। अगर आपको मौका मिले तो जरूर जाएं।इतनी अद्भभुत यात्रा आपको जिंदगी भर याद रहेगी।

इस मंदिर से related अगर कोई भी नई जानकारी आपको मिले तो शेयर करना ना भूलें।कैसा लगा आपको यह आर्टिकल?

Comment में जरूर बताएं।आपके suggestions का इंतजार रहेगा।

धन्यवाद।

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