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COMPUTER Full Form in Hindi | What is the Full Form of COMPUTER Hindi

by Manish Sharma
Computer Full Form in Hindi

COMPUTER Full Form in Hindi | What is the Full Form of COMPUTER Hindi

दोस्तों आप लोगों में से कई लोगों के मन में कंप्यूटर का फुल फॉर्म (Computer Full Form in Hindi) क्या होता है,यह कार्य कैसे करता है, कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं, कंप्यूटर का आविष्कार किसने किया, कंप्यूटर का इतिहास क्या है, कंप्यूटर का उपयोग कहां कहां होता है, कंप्यूटर के पार्ट्स क्या क्या होते हैं, कंप्यूटर के फायदे क्या है, कंप्यूटर के नुकसान क्या है, डेस्कटॉप कंप्यूटर खरीदे या लैपटॉप जैसे सवाल उत्पन्न होते हैं और अगर आप भी कंप्यूटर से जुड़े इन सवालों के जवाब ढूंढ रहे हैं तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें।

कंप्यूटर का फूल फ़ॉर्म (Computer Full Form in Hindi):

C – Commonly 

O – Operated   

M – Machine   

P – Particularly   

U – Used

T – Technical     

E – Educational   

R – Research

Commonly Operated Machine Particularly Used in Technical and Educational Research

कंप्यूटर क्या है What is Computer in Hindi? कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो सूचनाओं को संग्रहीत करने और उसे क्रियान्वित करने के लिए उपयोग किया जाता है। Computer शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी शब्द  “COMPUTE” से हुई है। जिसका अर्थ “गणना करना” होता है। कंप्‍यूटर गणना करता है, इसलिये इसे हिंदी में ‘संगणक’ कहते है। इसका    अविष्‍कार  Calculation  करने   के लिये   हुआ    था, पुराने समय में Computer     का  इस्तेमाल   केवल Calculation करने के लिये किया जाता था। Computer शब्द अंग्रेजी के आठ अक्षरों से बना हैं। जो इसके अर्थ को और व्यापक बनाते हैं।

शुरुआत में, कंप्यूटर का उपयोग सीमित था, लेकिन जैसे जैसे इसमें सुधार होता गया वैसे वैसे कंप्यूटर के विस्तार में वृद्धि हुई। और आज कंप्यूटर हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। कंप्यूटर की सहायता से हम विभिन्न कार्य कर सकते हैं। कंप्यूटर का उपयोग कई कार्यों के लिए किया जाता है । जैसे Document बनाने,  E-mail भेजने, Music सुनने, Video देखने, Database Preparation के साथ-साथ    और कई   कामों में किया जा रहा है, जैसे बैकों में, शैक्षणिक संस्‍थानों में, कार्यालयों में,  घरों में, दुकानों में, Computer का उपयोग बहुतायत  रूप से किया जा रहा है।

Computer केवल वह    काम करता   है  जो  हम उसे करने को कहते हैं यानी केवल वह उन Command को फॉलो करता   है जो    पहले  से  computer  के अन्‍दर  डाले  गये होते  हैं,   उसके अन्‍दर सोचने समझने की क्षमता नहीं होती है, computer को जो  व्‍यक्ति    चलाता  है  उसे   यूजर  कहते  हैं,  और  जो व्‍यक्ति Computer  के    लिये      Program   बनाता  है  उसे Programmer कहा जाता है। Computer मूलत: दो भागों में बॅटा होता है- 1)सॉफ्टवेयर  (2)हार्डवेयर

सॉफ्टवेयर क्‍या होता है ? What is Software?

सॉफ्टवेयर  Computer   का वह Part होता है  जिसको  हम   केवल देख  सकते  हैं   और   उस   पर  कार्य    कर  सकते   हैं, Software  का      निर्माण Computer   पर कार्य  करने     को Simple  बनाने  के लिये      किया   जाता है, आजकल   काम    के हिसाब  से  Software    का निर्माण किया  जाता है,  जैसा  काम वैसा Software। Software को बड़ी-बड़ी कंपनियों में यूजर की जरूरत को ध्‍यान में रखकर Software Programmers द्वारा तैयार  किया जाता है ,इसमें से  कुछ  फ्री में उपलब्‍ध  होते  है तथा   कुछ  के   लिये चार्ज  देना  पड़ता है।  जैसे आपको फोटो से सम्‍बन्धित कार्य करना   हो   तो  उसके लिये   फोटोशॉप  या  कोई वीडियो देखना  हो  तो उसके  लिये मीडिया प्‍लेयर का यूज करते हैं।

हार्डवेयर क्या होता है ? What is Hardware?

हार्डवेयर, जिसे एचडब्ल्यू के रूप में संक्षिप्त किया गया है, कंप्यूटर सिस्टम के सभी भौतिक घटकों को संदर्भित करता है, जिसमें इससे जुड़े उपकरण भी शामिल हैं। आप हार्डवेयर का उपयोग किए बिना कंप्यूटर नहीं बना सकते या सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं कर सकते। जिस स्क्रीन पर आप यह जानकारी पढ़ रहे हैं वह भी एक हार्डवेयर है।

हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच संबंध (Relation Between Hardware and Software):

पारस्परिक रूप से उनमें से कंप्यूटर एक उपयोगी उत्पादन का उत्पादन करने के लिए एक साथ काम करना चाहिए। सॉफ्टवेयर हार्डवेयर समर्थन के बिना उपयोग नहीं किया जा सकता।पर संचालित करने के लिए कार्यक्रमों के सेट के बिना हार्डवेयर का उपयोग किया और बेकार है नहीं किया जा सकता। कंप्यूटर पर किया एक खास नौकरी के लिए, प्रासंगिक सॉफ्टवेयर हार्डवेयर में लोड किया जाना चाहिए हार्डवेयर एक एक समय खर्च है।

सॉफ्टवेयर का विकास बहुत महंगा है और एक सतत खर्च है। विभिन्न सॉफ्टवेयर विभिन्न नौकरियों को चलाने के लिए एक हार्डवेयर पर लोड किया जा सकता है। एक सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता और हार्डवेयर के बीच एक अंतरफलक के रूप में कार्य करता है। हार्डवेयर एक कंप्यूटर प्रणाली का ‘दिल’ है, तो सॉफ्टवेयर ‘आत्मा’ है। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।

कंप्यूटर की कार्य प्रणाली (Function of Computer):

कंप्‍यूटर  को  ठीक प्रकार से कार्य करने के  लिये सॉफ्टवेयर  और हार्डवेयर दोनों की  ता होती है। अगर सीधी  भाषा में कहा जाये    तो यह दोनों  एक  दूसरे के  पूरक  हैं। बिना   हार्डवेयर सॉफ्टवेयर  बेकार है    और बिना सॉफ्टवेयर हार्डवेयर बेकार  है। मतलब  कंप्‍यूटर सॉफ्टवेयर   से हार्डवेयर को कमांड दीया जाता      है।

किसी  हार्डवेयर   को   कैसे     कार्य   करना है      उसकी   जानकारी सॉफ्टवेयर के अन्दर पहले से ही डाली गयी होती है। कंप्यूटर के सीपीयू से कई प्रकार के  हार्डवेयर जुडे रहते हैं, इन  सब के बीच तालमेल    बनाकर  कंप्यूटर   को  ठीक प्रकार से चलाने  का   काम करता है सिस्टम सॉफ्टवेयर यानि ऑपरेटिंग सिस्टम।

कंप्‍यूटर के कार्यप्रणाली की प्रक्रिया एक चरणबद्ध तरीके से होती है –

इनपुट      (Input)   —–        प्रोसेसिंग       (Processing)   —– आउटपुट   (Output)

कंप्यूटर क्या है

(1)।  इनपुट     के  लिये     आप की-बोर्ड,    माउस      इत्‍यादि इनपुट डिवाइस  का  प्रयोग करते हैं साथ ही  कंप्‍यूटर  को सॉफ्टवेयर के माध्‍यम से कंमाड या निर्देश देते हैं या डाटा एंटर करते हैं।

(2)। यह इस   प्रक्रिया का  दूसरा  भाग   है   इसमें आपके द्वारा  दी गयी कंमाड   या डाटा  को   प्रोसेसर  द्वारा  सॉफ्टवेयर में उपलब्‍ध जानकारी और निर्देशों के अनुसार प्रोसेस कराया जाता है।

(3)। तीसरा  और  अंतिम भाग आउटपुट  इसमें  आपके द्वारा  दी गयी  कंमाड     के    आधार     पर   प्रोसेस  की    गयी     जानकारी  का आउटपुट  कंप्‍यूटर द्वारा     आपको     दिया जाता    है   जो   आपको आउटपुट डिवाइस द्वारा प्राप्‍त हो जाता है।

कंप्यूटर का इतिहास (History of Computer):

आज आप कंप्यूटर पर इंटरनेट चलाते हैँ, गेम खेलते है, वीडियो देखते हैं, गाने  सुनते हैँ और इसके अलावा  ढेर   सारे   ऑफिस से संबंधित  काम  करते हैं आज कंप्यूटर  का उपयोग  दुनिया  के हर क्षेत्र मेँ किया जा रहा है चाहे वो शिक्षा जगत हो, फिल्म जगत हो या आपका ऑफिस हो। कोई भी जगह कंप्यूटर के  बिना अधूरी है।

  आज आप    कंप्यूटर  की    सहायता  से   इंटरनेट पर दुनिया  के किसी  भी   शहर की कोई भी   जानकारी   सेकेण्‍डों मे प्राप्त  कर सकते हैँ ये किसी दूसरे देश मेँ बैठे अपने मित्रोँ और रिश्तेदारोँ से इंटरनेट  के माध्यम लाइव   वीडियो    कॉंफ्रेंसिंग कर सकते   हैँ यह सब संभव हुआ है कंप्यूटर की     वजह से। सोचिए अगर कंप्यूटर ना होता तो आज की दुनिया कैसी दिखाई देती।

कंप्यूटर   शुरुआत कहाँ से हुई    ओर क्यूँ    हुई      ?  क्या  वाकई    मेँ कंप्यूटर  इन सभी कामों  को  करने  के लिये  बना  था या     इसका आविष्कार किसी और वजह से हुआ था आइए जानते हैँ – मानव   के   लिए  गणना करना  शुरु    से   ही कठिन रहा है    मनुष्य बिना    किसी        मशीन के एक   सीमित   स्तर तक   ही गणना     या केलकुलेशन   कर सकता है   ज्यादा  बड़ी  कैलकुलेशन  करने   के लिए मनुष्य  को मशीन पर ही निर्भर रहना पड़ता है इसी जरुरत को पूरा करने के लिए मनुष्य ने कंप्यूटर का निर्माण किया, यानी गणना करने के लिए।

Who Invented Computer?

कंप्यूटर का आविष्कार किसने किया? Who Invented Computer?

अंग्रेज वैज्ञानिक चार्ल्स बैवेज (Charles Babbage) ने स्वाचालित कैलकुलेटर अर्थात कम्प्यूटर की पहली बार परिकल्पना की । पर 40 वर्ष के अथक परिश्रम के बावजूद वे इसे बना न सके । उन्हें आधुनिक कम्प्यूटर का जन्मदाता (Father of Modern computer) कहा जाता है । कम्प्यूटर प्रोग्राम तैयार करने का श्रेय उनकी शिष्या Ada Augsta Lovelace को जाता है ।

उन्होंने अपने नाम पर कम्प्यूटर प्रोग्राम का नाम रखा -एडा (Ada)। वैसे तो बोहोत से वैज्ञानिको ने कंप्यूटर को को बनाने अपना योगदान दिया लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा योगदान चार्ल्स बैवेज (Charles Babbage) का माना जाता हैं इसलिए उन्हें आधुनिक कम्प्यूटर का जन्मदाता (Father of Modern computer) कहा जाता है।

कंप्यूटर की पीढ़ी (Generation of Computer):

पहली पीढ़ी के कंप्यूटर – First Generation computer – Timeline – 1942-1955:

इस पीढी के कंप्यूटर में    वैक्यूम  ट्यूब (Vacuum Tube)  का प्रयोग    किया  जाता   था,  जिसकी वजह से  इनका आकार बहुत बड़ा होता  था और  बिजली  खपत   भी बहुत अधिक  होती थी। यह   ट्यूब     बहुत    ज्यादा  गर्मी पैदा करते  थे।  इन   कंम्यूटरों  में ऑपरेंटिग सिस्टम नहीं होता  था, इसमें चलाने  वाले प्रोग्रामों को पंचकार्ड  में  स्टोर करके  रखा  जाता था। इसमें  डाटा  स्टोर करने की क्षमता बहुत सीमित ही होती थी। इन कंप्यूटरों में मशीनी भाषा (Machine Language) का प्रयोग किया जाता था। 

पहली पीढ़ी के कुछ लोकप्रिय कंप्यूटर के नाम:

ENIAC ( Electronic Numerical Integrator and Computer)
EDVAC ( Electronic Discrete Variable Automatic Computer)
UNIVAC ( Universal Automatic Computer)
IBM-701
IBM-650

First Generation computer

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर – Second Generation Computer Timeline – 1956-1963:

दूसरी  पीढ़ी  के कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूब की जगह ट्रांजिस्टर ने ले ली।  ट्रांजिस्टर  वैक्यूम   ट्यूब  से काफी बेहतर  था।  इसके  साथ दूसरी    पीढी  के   कंप्‍यूटरों   में    मशीनी  भाषा   (Machine language)  के   बजाय असेम्बली    भाषा (Assembly language) का उपयोग किया जाने  लगा, हालां‍कि अभी भी डाटा स्‍टोर करने के लिये पंचकार्ड का इस्‍तेमाल किया जाता था।

दूसरी पीढ़ी के कुछ लोकप्रिय कंप्यूटर के नाम:

IBM 1620
IBM 7094
CDC 1604
CDC 3600
UNIVAC 1108

Second Generation Computer

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर – Third generation computer Timeline – 1964-1975:

यहाँ   तक   आते -आते ट्रांजिस्टर   की   जगह  इंटीग्रेटेड   सर्किट (Integrated Circuit)  यानि अईसी ने ले  ली   और  इस प्रकार कंप्यूटर  का आकार बहुत छोटा हो गया, इन कंम्यूटरों की गति   माइक्रो  सेकंड से नेनो   सेकंड   तक   की  थी जो  स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट के द्वारा संभव हो सका। यह कंम्यूटर छोटे और सस्ते बनने लगे और साथ ही उपयोग में भी आसान होते थे। इस पीढी    में उच्च स्तरीय  भाषा पास्कल   और  बेसिक का   विकास हुआ। लेकिन अभी भी बदलाव हो रहा था।

तीसरी पीढ़ी के कुछ लोकप्रिय कंप्यूटर के नाम:

IBM-360 series
Honeywell-6000 series
PDP  (Personal Data Processor)
IBM-370/168
TDC-316

Third generation computer

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर – Fourth generation computers Timeline – 1967-1989:

चिप   तथा माइक्रोप्रोसेसर चौथी पीढी के कंप्यूटरों में  आने  लगे थे, इससे कंप्यूटरों   का आकार कम हो    गया  और    क्षमता  बढ गयी।   चुम्बकीय   डिस्क  की    जगह  अर्धचालक   मैमोरी (Semiconductor memory) ने ले  ली साथ ही  उच्च गति वाले नेटवर्क का विकास  हुआ जिन्हें आप लैन और वैन के  नाम से जानते हैं। ऑपरेटिंग के रूप  में यूजर्स का परिचय पहली बार MS  DOS से   हुआ,  साथ   ही    कुछ  समय  बाद माइक्रोसॉफ्ट विंडोज  भी  कंप्यूटरों  में   आने  लगी।  जिसकी   वजह  से मल्टीमीडिया का  प्रचलन प्रारम्भ हुआ। इसी समय C भाषा का विकास हुआ, जिससे प्रोग्रामिंग करना सरल हुआ।

चौथी पीढ़ी के कुछ लोकप्रिय कंप्यूटर के नाम:

DEC 10
STAR 1000
PDP 11
CRAY-1(Super Computer)
CRAY-X-MP(Super Computer)

Fourth generation computers

पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर – Fifth generation computers Timeline – 1989 से अब तक Ultra Large-Scale  Integration (ULSI) यूएलएसआई, ऑप्टीकल डिस्क जैसी चीजों का प्रयोग इस पीढी में किया जाने लगा, कम से कम जगह में  अधिक डाटा स्टोर किया जाने लगा। जिससे पोर्टेबल पीसी, डेस्कटॉप पीसी, टेबलेट आदि ने इस क्षेञ में  क्रांति ला  दी। इंटरनेट,  ईमेल, WWW   का    विकास   हुआ। आपका   परिचय  विडोंज के  नये  रूपों  से  हुआ, जिसमें  विडोंज XP  को भुलाया नहीं जा  सकता  है।   विकास अभी भी जारी  है, आर्टिफिशियल   इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence)  पर जोर  दिया     जा  रहा है।  उदाहरण के लिये  विडोंज   कोर्टाना   को आप देख ही रहे हैं।

पांचवी पीढ़ी के कुछ लोकप्रिय कंप्यूटर के नाम:

Desktop
Laptop
Notebook
UltraBook
Chrome Book

Fifth generation computers

कंप्युटर स्टोरेज(Computer Storage):

कंप्यूटर में सूचना को संग्रहीत करने के लिए बाइनरी भाषा का उपयोग किया जाता है। बाइनरी भाषा में, 0 और 1 अंकों का उपयोग किया जाता है। कंप्यूटर की जानकारी को मापने में महत्वपूर्ण इकाई किलोबाइट (KB) है।

कंप्यूटर में संग्रहीत जानकारी के लिए उपयोग की जाने वाली इकाईयां इस प्रकार है:

0 या 1          = 1 बिट (Bit)

8 Bit            = 1 बाइट (Byte)

1024 Byte   = 1 किलोबाइट (KB)

1024 KB      = 1 मेगाबाइट (MB)

1024 MB      = 1 गिगाबाईट (GB)

1024 GB      = 1 टेराबाइट (TB)

जब आप किसी कंप्यूटर पर कार्य कर रहे हों तब टाइप की गई जानकारी सेव्ह करके रखते है, ताकि आप उस जानकारी को बाद में प्राप्त कर सकें। जो आप चाहते हैं बाद में। यदि आप कंप्यूटर में जानकारी सेव्ह नहीं करते हैं, तो आप इसे बाद में नहीं प्राप्त कर सकेंगे।

आपको यह पता होना चाहिए की कंप्यूटर में यह Save की हुई जानकारी कहां और कैसे सेव्ह होती है। कंप्यूटर की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसकी स्टोरेज क्षमता अर्थात जानकारी सहेजना है। कंप्यूटर में जानकारी दो तरीकों से संग्रहीत की जाती है।    1) प्रायमरी स्टोरेज, 2) सेकंडरी स्टोरेज

प्रायमरी स्टोरेज क्या होती है? What Primary Storage?

प्रायमरी स्टोरेज अस्थायी स्वरूप का होता है। इसलिए प्रायमरी स्टोरेज में जमा की गई जानकारी थोड़ी देर के लिए ही उपलब्ध होती है।

What Primary Storage?

रैम (RAM):प्राथमिक स्टोरेज का उदाहरण रैम है। रैम चिप्स सिस्टिम युनिट के अंदर स्थापित होती हैं। रैम में संग्रहीत जानकारी अस्थायी रूप से जमा होती है। उदाहरण के लिए, जब कंप्यूटर पर काम करते समय कंप्यूटर बंद हो जाता है, तो आप कंप्यूटर को फिर से शुरू करने के बाद आपके द्वारा टाइप किया गया डेटा उपलब्ध नहीं हो पाता है। क्योंकि उस डेटा को रैम में संग्रहित किया जाता है। अगर कंप्यूटर बंद हो जाता है तो वह डेटा नष्ट हो जाता है। क्योंकि रैम अस्थायी रूप से जानकारी संग्रहीत करता है। इसलिए, आपके कंप्यूटर पर काम करते समय, आपके डेटा को समय-समय पर सहेजा जाना चाहिए।

सेकंडरी स्टोरेज:

सेकंडरी स्टोरेज स्थायी होता है। इसका मतलब है कि सेकंडरी स्टोरेज में जमा की गई जानकारी नष्ट नहीं होती है। सेकंडरी स्टोरेज के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

1। हार्ड डिस्क: हार्ड डिस्क सेकंडरी स्टोरेज का एक उदाहरण है। इसका अर्थ है कि हार्ड डिस्क में संग्रहीत जानकारी स्थायी स्वरूप की होती है। कंप्यूटर पर काम करते समय, आपके द्वारा सहेजा गया डेटा हार्ड डिस्क पर सहेजा जाता है।

Secondry Storage

2। पेन ड्राईव्ह: पेन ड्राइव भी सेकंडरी स्टोरेज का एक उदाहरण है। पेन ड्राइव को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर पर डेटा ले जाने के लिए उपयोग किया जाता है।

Pen Drive

3। ऑप्टिकल डिस्क: ऑप्टिकल डिस्क भी सेकंडरी स्टोरेज का एक उदाहरण है। सबसे अधिक इस्तेमाल किया जानेवाला ऑप्टिकल डिस्क निम्ननुसार हैं।

Optical Disc

A। सी।डी। (CD)

B। डी।व्ही।डी। (DVD)

C। ब्लू रे डिस्क (Blu Ray)

ऑप्टिकल डिस्क भी सेकंडरी स्टोरेज का एक उदाहरण है। सबसे अधिक इस्तेमाल किया जानेवाला ऑप्टिकल डिस्क निम्ननुसार हैं।ऑप्टिकल डिस्क के तीन मूल स्वरूप निम्नानुसार हैं:

1) सी। डी। रॉम CD- ROM (रिड ओन्ली मेमरी) :- इस प्रकार की सी। डी। में दी गई जानकारी केवल पढने के लिए होती है। यानि आप इसे बदल नहीं सकते। उदाहरण के लिए, आपको बाजार में फिल्में, गानो, की सीडीज् मिलती हैं। जिसमें दिया गया डेटा आप केवल चला सकते हैं। आप इसे बदल नहीं सकते। ऐसी सीडी ज् को CD-ROM (सी। डी। रिड ओन्ली मेमरी) कहते है।

2) राइट वन्स CD-R (सी। डी। रेकॉर्डेबल ) :- आपको दुकान से ब्लॅन्क यानि खाली सीडी मिलती है। जिसमें आप एक बार जानकारी रिकॉर्ड कर सकते हैं। इस प्रकार की सी।डी।ज् को  सी।डी।-आर (रेकॉर्डेबल) कहा जाता है। इस सी।डी। में जानकारी रेकॉर्ड करने के बाद, आप इसे बदल नहीं सकते।

3) सी।डी। आर डब्ल्यू CD RW (सी। डी। रिरायटेबल) :- सी। डी। रिरायटेबल  ब्लैंक सी।डी। होती हैं। लेकिन हम इसमें बार-बार जानकारी रिकॉर्ड कर सकते हैं। इसलिए, ऐसी सी।डी। को सी।डी। आरडब्ल्यू (सी। डी। रिरायटेबल) कहा जाता है।

कंप्यूटर के मुख्य भाग (Important Parts of Computer):

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU): एक सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को प्रोसेसर, सेंट्रल प्रोसेसर या माइक्रोप्रोसेसर भी कहा जाता है। यह एक कंप्यूटर के सभी महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करता है। यह हार्डवेयर और सक्रिय सॉफ्टवेयर दोनों से निर्देश प्राप्त करता है और तदनुसार उत्पादन करता है।

यह ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर जैसे सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को संग्रहीत करता है। सीपीयू इनपुट और आउटपुट डिवाइस को एक दूसरे के साथ संवाद करने में भी मदद करता है। सीपीयू की इन विशेषताओं के कारण, इसे अक्सर कंप्यूटर के मस्तिष्क के रूप में जाना जाता है।

CPU

रैंडम एक्सेस मेमोरी (RAM): रैम चिप्स कंप्यूटर सिस्टिम का एक महत्वपूर्ण भाग हैं। रैम चिप्स 4 जीबी या अधिक क्षमता की होनी चाहिए। इससे कंप्यूटर के एप्लिकेशन्स बिना किसी रुकावट के चलने में मदद होती है। रैम प्राथमिक स्टोरेज का एक उदाहरण है। रैम चिप्स सिस्टिम युनिट के अंदर स्थापित होती हैं। रॅम में संग्रहीत जानकारी अस्थायी रूप से संग्रहित की जाती है।
उदाहरण के लिए। जब कंप्यूटर पर काम करते समय कंप्यूटर अचानक बंद हो जाता है, तो कंप्यूटर को फिर से शुरू करने के बाद आपके द्वारा टाइप किया गया डेटा उपलब्ध नहीं हो पाता है। क्योंकि उस डेटा को रैम में संग्रहित किया जाता है। अगर कंप्यूटर बंद हो जाता है तो वह डेटा नष्ट हो जाता है। क्योंकि रॅम अस्थायी रूप से जानकारी संग्रहीत करता है। इसलिए, आपके कंप्यूटर पर काम करते समय, डेटा को समय-समय पर सहेजा जाना चाहिए।

मदरबोर्ड (Motherboard): मदरबोर्ड कंप्यूटर सिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मदरबोर्ड को सिस्टम बोर्ड या मेनबोर्ड भी कहा जाता है। कंप्यूटर के विभिन्न हिस्सों में एक दूसरे के साथ मदरबोर्ड के माध्यम से संचार होता है। मदरबोर्ड अलग-अलग हिस्सों से बना होता है। जैसे कि स्लॉट, सॉकेट्स, पोर्टस् इत्यादी। संक्षेप में, मदरबोर्ड कंप्यूटर के विभिन्न घटकों को नियंत्रित करने का काम करता है।

Mother Board

हार्ड डिस्क (Hard Disk): कंप्यूटर पर काम करते समय, आपके द्वारा सहेजा गया डेटा हार्ड डिस्क पर सहेजा जाता है। हार्ड डिस्क सेकंडरी स्टोरेज का एक उदाहरण है। इसका अर्थ है कि, हार्ड डिस्क में संग्रहीत जानकारी स्थायी स्वरूप की होती है। हार्ड डिस्क सिस्टम कैबिनेट के अंदर स्थापित होती है।

कंप्यूटर हार्ड डिस्क की क्षमता 500 जीबी या उससे ज्यादा होनी चाहिए। ताकि आप अपने कंप्यूटर पर जादा से जादा डेटा संग्रहीत कर सकें। हार्ड डिस्क को धूल इत्यादि से नुकसान हो सकता है। इसलिये उचित सावधानी बरते।

Hard Disk

एस एम पी एस (SMPS): पॉवर सप्लाय युनिट (SMPS) का उपयोग कंप्यूटर को बिजली की आपूर्ति के लिए किया जाता है। पॉवर सप्लाय युनिट द्वारा कंप्यूटर के विभिन्न भागों में बिजली की आपूर्ति की जाती है। उदाहरण के लिए। मदरबोर्ड, हार्ड डिस्क, डीवीडी रायटर, आदि। कंप्यूटर के विभिन्न हिस्सों को बिजली प्रदान करने के लिए पॉवर सप्लाय युनिट में विभिन्न पॉवर कनेक्टर होते हैं।

SMPS

इनपुट डिवाइस क्या है? What is Input Device? 

इनपुट डिवाइस उपयोगकर्ता को कंप्यूटर पर डेटा, सूचना या नियंत्रण सिग्नल भेजने में सक्षम बनाता है। कंप्यूटर की सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू) इनपुट प्राप्त करता है और आउटपुट के उत्पादन के लिए इसे प्रोसेस करता है। कुछ लोकप्रिय इनपुट डिवाइस हैं:

कीबोर्ड,माउस,स्कैनर,जॉयस्टिक,लाइट पेन,माइक्रोफोन,डिजिटल कैमरा,पैडल,स्टीयरिंग व्हील,लाइट गन, टच पैड,रिमोट,वेब कैमरा,बायोमेट्रिक डिवाइस

What is Input Device? 

आउटपुट डिवाइस क्या है? What is Output Device?

आउटपुट डिवाइस कच्चे डेटा के प्रसंस्करण के परिणाम को प्रदर्शित करता है जो इनपुट डिवाइस के माध्यम से कंप्यूटर में दर्ज किया जाता है। ऐसे कई आउटपुट डिवाइस हैं जो टेक्स्ट, इमेज, हार्ड कॉपी और ऑडियो या वीडियो जैसे विभिन्न तरीकों से आउटपुट प्रदर्शित करते हैं।

कुछ लोकप्रिय आउटपुट डिवाइस हैं:

मॉनिटर(Monitor):

CRT मॉनिटर, एलसीडी मॉनिटर,एल ई डी मॉनिटर,प्लाज्मा मॉनिटर

What is Output Device

प्रिंटर(Printer):

इंपैक्ट प्रिंटर्सइफेक्ट प्रिंटर,कैरेक्टर प्रिंटर्स,डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर प्रिंटर,डेज़ी व्हील प्रिंटर,लाइन प्रिंटर,ड्रम प्रिंटर

चेन प्रिंटर,नॉन-प्रिंटर,इंकजेट प्रिंटर,

Printer

प्रोजेक्टर(Projector):

Projector

डेस्कटॉप कंप्यूटर या लॅपटॉप क्या ख़रीदे? 

नया कंप्यूटर ख़रीदते समय डेस्कटॉप ख़रीदे या लैपटॉप यह प्रश्न हमारे सामने होता हैं। हमे डेस्कटॉप और लैपटॉप में क्या अंतर होता हैं। यह पता होना चाहिए। जिससे की हम अपनी आवश्यकता अनुसार डेस्कटॉप या लैपटॉप ख़रीद सके।

डेस्कटॉप कंप्यूटर(Desktop Computer): डेस्कटॉप कंप्यूटर आप अपनी आवश्यकता अनुसार असेम्बल करवा सकते हैं। साथ ही वह लैपटॉप की तुलना में बेहतर परफॉर्मेन्स देते हैं। डेस्कटॉप कंप्यूटर पोर्टेबल नहीं होते हैं। यानि आप उन्हें एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जा सकते। डेस्कटॉप कंप्यूटर में किसी उपकरण जैसे कीबोर्ड, माउस, रैम, हार्ड डिस्क, इ। के ख़राब होने पर उसे लैपटॉप की तुलना में आसानी से बदला जा सकता हैं। अगर आपको फ़ोटो एडिटिंग, व्हिडिओ एडिटिंग इ। करना चाहते हैं। तो डेस्कटॉप लैपटॉप की तुलना में बेहतर विकल्प होगा।

Desktop Computer

लैपटॉप (Laptop): लैपटॉप पोर्टेबल होते हैं। यानि इन्हें एक जगह से दूसरे जगह ले जाया सकता हैं। लैपटॉप में बैटरी होने की वजह से आप उन्हें ज्यादा देर तक उपयोग में ले सकते हैं। जबकि बिजली कटने पर डेस्कटॉप कंप्यूटर उपयोग नहीं किया जा सकता। लैपटॉप के किसी भाग जैसे की, कीबोर्ड, टचपैड़ इ। के ख़राब होने पर उसे दुरुस्त करने के लिए पुरे लैपटॉप को सर्व्हिस सेंटर में देना पड़ता हैं। जबकि डेस्कटॉप कंप्यूटर में कीबोर्ड, माउस इ। के ख़राब होने पर उसे आसानी से बदलकर उपयोग में लिया जा सकता हैं। लैपटॉप पर ज्यादा देर काम करने से या गेम्स इ। खेलने पर वह डेस्कटॉप की तुलना में जल्दी गर्म हो सकते हैं।

कंप्युटर का उपयोग(Use of Computer)

हालांकि कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, लेकीन दैनिक जीवन में इसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका है । किसी कंप्यूटर की सहायता से, हम विभिन्न कार्यों को घरबैठे कर सकते हैं । और अपना समय और पैसा दोनों बचा सकते हैं ।

1। जानकारी खोजना :- कंप्यूटर की सहायता से, आप इच्छित विषय पर जानकारी खोज सकते हैं । इंटरनेट की सहायता से, हम विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी पा सकते हैं, और किसी भी विषय के बारे में ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

2। ऑफिस के कार्य :- जॉब करने वाले व्यक्ति कंप्यूटर की मदद से विभिन्न प्रकार के काम कर सकते है । जैसे एम। एस। वर्ड में विभिन्न दस्तावेज़ बनाना, एम। एस। एक्सेल में विभिन्न गणितीय कार्य करना, एम। एस। पावरपॉइंट में प्रेझेंटेशन बनाना ।

3। बँक के कार्य :- कंप्यूटर की मदद से हम बैंक के विभिन्न कार्य कर सकते हैं । जैसे कि बॅलेन्स चेक करना, दूसरे व्यक्ति के खाते में पैसे ट्रान्स्फर करना, ऑनलाइन भुगतान के लिए डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड आदि का उपयोग करना ।

4। ऑनलाइन रिझर्वेशन :- यदि आप कहीं यात्रा करना चाहते हैं, तो आप कंप्यूटर की सहायता से बस, ट्रेन, विमान का ऑनलाइन आरक्षण कर सकते हैं।

5। ऑनलाइन शॉपिंग :- विभिन्न वस्तुओं की खरीद के लिए आजकल ऑनलाइन शॉपिंग बहुत लोकप्रिय है। कंप्यूटर की सहायता से, हम विभिन्न चीज़ों के लिए ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं।

6। बिजली का बील भरना :- कंप्यूटर की मदद से आप अपना बिजली बिल ऑनलाइन भर सकते हैं।

7। दोस्तों के साथ चैट करना :- आप अपने दोस्तों के साथ बातचीत करने के लिए कंप्यूटर का उपयोग कर सकते हैं। कंप्यूटर की सहायता से, हम किसी मित्र को ई-मेल संदेश भेज सकते हैं। या आप वीडियो कॉल के जरिए आमने-सामने बातचीत कर सकते हैं।

कम्प्यूटर के लाभ और हानि(Benefit and Loss of Computer)

कम्प्यूटर के लाभ (Benefits of Computer)

(1)।आज  हर   जगह  कंप्‍यूटर का उपयोग  बडें  पैमाने   पर किया जा     रहा है,   इससे   का  सबसे बड़ा कारण    यह   है कि मनुष्‍य के मुकाबले बहुत तेजी से काम करता है, यह बहुत बड़ी गणना को कुछ सेकेण्‍ड में कर सकता है।

(2)।आज हर  चीज कंप्‍यूटर पर उपलब्‍ध   है,  आप    बहुत  सारा डाटा कंप्‍यूूटर में स्‍टोर कर सकते हैं और उसे कभी भी उपयोग में ला  सकते हैं  और   अगर आपके पास इंटरनेट की    सुविधा भी है तो आप क्‍लाउड   स्‍टोरेज का उपयोग  कर इंटरनेट  पर भी अपने डाटा का सुरक्षित रख सकते हैं।

(3)।आप  कभी-भी  और कहीं भी  अपने     दोस्‍तों     के सम्‍पर्क  में वीडियो     कॉल,  ईमेल,     सोशल   नेटवर्किंग   जैसे सुविधाओं      के माध्‍यम से जुडें रह सकते हैं।

(4)।आप इंटरनेट पर कोई भी जानकारी प्राप्‍त कर सकते हैं।

(5)।बैंकिग जैसी सुविधाओं में कंप्यूटर तकनीक का जबाब नहीं है,  आप   घर बैठे-बैठे  अपने मोबाइल  फोन   से  या कंप्‍यूटर से किसी को भी रूपये ट्रांसफर कर सकते हैं।

(6)।आज   मोबाइल  रीचार्ज, बिजली का  बिल से जमा करने  से लेकर ऑनलाइन   शॉपिग यहॉ    तक   कि     हवाई    जहाज तक कंप्‍यूटर द्वारा उडाये जा रहे हैं वह भी बिना कोई गलती किये।

(7)।शिक्षा और चिकित्‍सा के क्षेत्र में कंप्यूटर ने दुनिया को बदल दिया है  आप घर बैठे-बैठे  ही    बेस्‍ट     टीचर्स/संस्‍थाओं  से   शिक्षा प्राप्‍त कर   सकते हैं  और   चिकित्‍सा की बात   करें   तो  दुनियॉ  के बेहतरीन डाक्‍टर्स से   इंटरनेट पर परामर्श ले   सकते हैं   और  अब तो मैडीकल स्‍टोर जाने  की  भी  जरूरत  नहीं है आप घर  बैठे ही दवाईयॉ भी      आर्डर  कर  सकते    हैं, चाहे   वह     आपके  श्‍हर   में मिलती हों या नहीं।

कंप्यूटर के नुकसान (Loss of Computer)

(1)।जहॉ     एक   और  कंप्‍यूटर  लोगों को स्‍मार्ट बना  रहा  है    वहीं दूसरी और    इसका जरूरत से ज्‍यादा प्रयोग बीमार भी  बना रहा है।

(2)।कंप्‍यूटर   और मोबाइल  का अधिक प्रयोग स्वास्थ्य  के   लिए हानिकारक साबित हो रहा है।

(3)।मोबाइल  और  कंप्‍यूटर  स्‍क्रीन   पर ज्‍यादा लगातार देखते रहने से सबसे ज्यादा नुकसान आंखों को होता है।

(4)।लोगों  का मिलना जुलना बंद हो गया है, ज्‍यादा  लोग किसी के घर    जाकर  मिलने से    बेहतर   उनसे सोशन   नेटवर्किंग साइट जैसे फेसबुक और व्‍हाट्सएप    चैट करना ज्‍यादा पंसद  करते हैं, यहॉ तक कि  एक  घर         में  रह    रहे  4     व्‍यक्ति  भी  अपने-अपने मोबाइल फोन से ही चिपके रहते हैं।

(5)।बड़ी-बड़ी  कंपनियों    और  फैट्रियों  में  कई-कई   मजदूरों का काम   कंप्‍यूटर और रोबोट करने लगे  हैं, जिससे   बेरोजगारी     भी बढी है।

(6)।इसी  प्रकार    सोशन    नेटवर्किंग  साइट पर भी    सावधानी से काम न करने पर भी होता है।

(7)।इंटरनेट के माध्‍यम से ठगी बहुत बड़े पैमाने पर बढ गयी है।

 

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