difference between love and attraction?|प्यार और आकर्षण में क्या अंतर है?

Difference between love and attraction?(प्यार और आकर्षण अंतर है?)

ना जाने क्यूँ,उससे जब नज़रें मिली, दिल धड़कने लगा, बेचैनियाँ बढ़ने लगी। हज़ारों सवाल ज़हन में  आने लगे। क्या ये प्यार है,या आकर्षण?

उलझन में  थी कि प्यार और आकर्षण में क्या अंतर है?(what is the difference between love and attraction? In hindi)

आइये समझने की कोशिश करते हैं, प्यार और  आकर्षण को।Difference between love and attraction ही अक्सर रिश्तों (Bondings) में दरारें उत्पन्न करती हैं।

What is the difference between love and attraction?(प्यार और आकर्षण में क्या अंतर है?)

1.आकर्षण कुछ ही पलों का खेल है, प्यार जन्मों-जन्मों का मेल है।

2.लोग, सूरत से प्रभावित होते है।चाहत सीरत से की जाती है।

3.नज़र का लगाव, एक दिल्लगी है। प्यार दिल की लगी है।

4.पसंदीदा वस्तु में ईर्ष्या और कब्जा होता है। मुहोब्बत  में  आज़ादी है, खुलकर जीने की।

5.मोह, के बदलने की प्रवृति होती है। प्रेम में  ठहराव है।

6.आकर्षण एक जुनून है। प्यार मौन है।

7. मोह, वासनाओं का वास है। मन की चाहत, रूहानियत प्रेम है।

8.infactuation में पाने की इच्छा होती है। मुहोब्बत में  त्याग की भावना प्रजवल्लित होती है।

9.आकर्षण में विषमताएं, रिश्ता टूटने का कारण बनती हैं। जबकि प्यार में  एक-दूसरे की विषमताओं का सम्मान किया जाता है।

10.दिलचस्पी , अल्पकालीन मोह है जबकि सच्चा इश्क़ जन्मों जन्म साथ निभाता है। प्यार और  आकर्षण में अंतर (Difference between love and attraction in hindi) को समझने के लिये, परिभाषा का गहन अध्ययन  अति आवश्यक है।

प्यार की परिभाषा,Definition of love,

difference between love and attraction?

प्यार क्या है?  इस सवाल में  ही हर कोई उलझता जाता है, रिश्तों में तकरार का मुख्य कारण, प्यार शब्द के प्रति अनभिज्ञता है।

जब कोई हमें अच्छा लगने लगे, उसकी हर बात में  दिलचस्पी होने लगे, बार-बार उसे ही देखने को मन  चाहे। तो क्या यही प्यार है?

 जब एक दूसरे की आदतें मिलने लगे, एक-दूसरे की बात मानने लगे, तो क्या ये प्यार है या आकर्षण? प्यार और आकर्षण में  अंतर (Difference  between love and attraction)क्या है?

प्यार का अर्थ है, जुड़ना। इस कदर जुड़ना कि मैं और तू की कोई सम्भावना ही ना रह जाये। इस कदर जुड़ना कि मिलना और  बिछड़ना महज़ अल्फाज़ ही रह जाये। “हम” से ही जुड़े हुए हैं, कभी “मैं” और “तू” के टुकड़ों में ना बिखरे। यही प्यार है।

प्यार के लिये एक गहरी समझ की जरुरत होती है। नासमझी से तो कभी प्यार किया ही नहीं  जा सकता। जब हमारा mind उस वास्तविकता को समझने लगता है, जहाँ हम के सिवा कुछ भी नहीं।

वो सोच उत्पन्न करता है, जहाँ चाहे बाहरी दुनिया में दोनों के बीच कैसी भी स्थिति हो, चाहे जुदा क्यूँ  ना हो जाये परंतु हम का वो जुड़ाव खत्म नहीं  होता।

हम हमेशा है, साथ होने पर भी, साथ ना होने पर भी।जुड़ाव का वो आनन्द, कभी समाप्त ही नहीं  होता, वही प्यार है।True fact about love is that “LOVE IS ALWAYS ONE SIDED”.प्यार, हमेशा एक तरफ़ा होता है, ना पाने  की उम्मीद, ना खोने का गम, सिर्फ़ प्यार की भावनाएक दूसरे से जुड़ने का एहसास।

दोनों तरफ़ तो conflicts होते हैं, expectations होती हैं, लडाई-झगड़े होते हैं। तभी तो कहा जाता है, सच्चा प्यार हमेशा एक तरफ़ा होता है। एक जुड़ाव होता है जो मै और तू में  कभी नहीं  बँटता यही सच्चा प्यार है।

आकर्षण की परिभाषा,Definition of attraction,

difference between love and attraction?

Attraction, crush,like, infatuation.कुछ भी कहा जा सकता है, लेकिन प्यार, इन शब्दों से बिल्कुल भी मेल नहीं  खाता।

किसी इन्सान को पसंद करना या पाने  की इच्छा होना आकर्षण है। आकर्षण का अर्थ है, खुद को खुश करना जबकि प्यार दूसरे की खुशी मे ही संतुष्ट होता है।

किसी इन्सान को उसकी गलती या व्यवहार के लिये छोड़ देना, आकर्षण का ही एक रुप है जिसमें प्यार की कोई भावना नहीं  है।

जबकि प्यार में,उस इन्सान को सही रास्ते का ज्ञान करवाया जाता है, उसके भले के लिये, मन  की असीम भावनाओं के साथ। यही सच्चा प्यार है जो दूसरे की खुशी के लिये किया जाता है।

आकर्षण का अर्थ ,दूसरे से लगाई गई उम्मीदों को पूर्ण करने से है ताकि आपको खुशी मिल सके।जबकि प्यार हमेशा बिना किसी उम्मीद, दूसरे की खुशी देखता है।

प्यार और आकर्षण में फ़र्क  ही रिश्तों(Relationships)को पनपने नहीं  देता।इन्सान जैसे एक भूल-भुलैया

प्यार और आकर्षण में फ़र्क  ही रिश्तों(Relationships)को पनपने नहीं  देता।इन्सान जैसे एक भूल-भुलैया(Doubts/unsecure feelings) में ही फँस कर रह जाता है।

फिर भी एक सवाल, ज़हन में  जरुर पैदा होता है कि क्या आकर्षण के बिना प्यार हो सकता है?(Can you be in love without attraction?)

इस कायनात में  हर वस्तु आकर्षण या ये कहें कि हर इंसान की Energy पर  ही निर्भर है। हर इन्सान एक दूसरे की एनर्जी से प्रभावित होता है।

जिन्हें vibrations भी कहा जाता है। आकर्षण के बिना कुछ भी संभव नहीं। लेकिन आकर्षण, प्यार की सीमा नहीं  है। उससे कहीं अधिक परे है, बहुत दूर!” SECRETS ” Law of attraction” से काफ़ी अच्छे से समझा जा सकता है।

प्रेम और आकर्षण के बारे में मनोवैज्ञानिक तथ्य। Psychological love facts.

Psychological facts about  love and attraction.

1.प्यार के बारे में  psychological fact है कि अगर दोनों लड़का ओर लड़की, 10 सेकंड तक आँखों में  आंखें डालकर बात करते रहें तो दोनों की दिल की धड़कन  एक जैसी होने लगती है।

2.According to Psychology , what cause love and attraction? इन्सान को पसंद करने में 4 मिनट  का वक़्त लगता है अगर वो eye contact के साथ एक दूसरे से बात करते रहे।

3.लड़कों को हमेशा स्माइल करती हुई लड़कियाँ ही पसंद आती हैं जबकि लड़कियाँ serious typeके लड़के ज्यादा पसंद करती हैं।

4.प्यार में  रहने वालों को अक्सर एक दूसरे की, छोटी से छोटी बात भी impact करती है। और छोटी से छोटी बात भी hurt कर जाती हैं।

5.प्यार करने वालों के लिये एक hug, kiss or sex से भी ज्यादा दर्द निवारक का काम करता है।

6.अगर आप किसी से आकर्षित हो और वो आपको ignore करे तो आकर्षण और  अधिक होने लगता है,जिसे love of attraction भी कहा जा सकता है।ना भी चाहे फिर भी आकर्षण बढ़ता है।

7.अक्सर, attraction को love का नामं दे दिया जाता है, जो physical ralation ही देखता है । इसमें Emotional love की गूंजाईश नहीं  होती।

8.After marriage,  एक साल तक रोमांटिक प्यार ज़िंदा रहता है। psychology के अनुसार, एक साल बाद committed relation ही निभाया जाता है।

9.सभी feelings or emotions से बढ़कर, प्यार ही एक ऐसा emotion है जिसमें ठहराव और सुकून दोनों हैं।

10.लड़के “I LOVE YOU “ कहने में वक़्त नहीं लगाते जबकि लड़कियाँ काफ़ी वक़्त लेती हैं।

11.According to Psychologist, In young generation, लड़कियाँ ज्यादातर, अच्छी position, अच्छे status वाले लड़कों को ही पसंद करती है।अच्छी looks भी impact डालती हैं।

12.एक fact ये भी है कि दिल टूटने के बाद जो ताकत लगती है वो ऐसे ही होती है जैसे कोई नशा छोड़ने में लगती है।

13.According to psychological fact, सच्चा प्यार है या नहीं, इसका पता sex के बाद ही पता चलता है। क्या अभी भी same emotions है या नहीं।Attraction and love difference यही है।प्यार सच्चा है या नहीं। या सिर्फ़ शारीरिक लगाव है।

14.अक्सर, लड़के, छोटी उम्र वाली लड़कियों को पसंद करते हैं  जबकि लड़कियों को बड़ी  उम्र के लड़के पसंद आते हैं। एक stability दिखती है उनमें।

15.जिससे आप प्यार करते हैं  उसकी तस्वीर देखने मात्र से सभी उलझन, सभी परेशानी दूर हो जाती है। एक अजीब से सुकून का अनुभव करने लगते हैं।

Difference between law of attraction and law of love.

difference between love and attraction?

Law of attraction.

“जो सोचोगे, वही होगा।”क्या संभव है, क्या असम्भव है यह प्रकृति का काम है।अगर आप चाहते हैं, कि जीवन को आपके अनुसार चलना चाहिये तो सबसे पहले आपकी सोच क्या है और  विचार प्रक्रिया में कितनी ऊर्जा है। इससे तय होगा कि आपका विचार क्या एक सच्चाई है या एक विचार ही रहेगा।

 सरल शब्दों में कहें तो अगर आप मन  को एक ही बिन्दु पर निश्चितता तक संगठित करते हैं तो ये पूरी प्रणाली आपका शरीर, भावनाएँ,आपका मन और  आपकी जीवन ऊर्जायें एक ही जीवन में व्यवस्थित हो जाती हैं।

अगर ये चारों आयामों को एक ही दिशा में स्थिर रखते हैं तो ऐसी स्थिति में  आप जो चाहते हैं,वो हो जाता है। तब आप कल्पवृक्ष की तरह हो जाते हैं।जो चाहोगे वो होगा।

दूसरे शब्दों में कहें तो मन की ऐसी स्थिति में  पहुँचने के लिये योगाभ्यास अत्यंत आवश्यक है ताकि  शारीरिक क्रिया, मानसिक क्रिया, भावनात्मक क्रिया , मन की क्रियाओं के साथ व्यवस्थित हो जाये।

जीवन को अपने अनुसार चलाने के लिये जानना है कि विचारों पर कितना फोकस है,विचारों में कितनी स्थिरता है, विचारों में कितनी ऊर्जा है?

इससे तय होगा कि विचार सच्चाई का रुप लगा या सिर्फ़ विचार बनकर ही रह जायेगा।यही सरलतम रुप है  law of attraction का।प्यार और आकर्षण में अंतर(Difference  between  love and attraction)का यह मुख्य रुप है।

Law of love.

Law of love का पहला कदम है ,अर्थात step

Step1‐‐”Ask”

सबसे पहले हमें  सोचना होगा कि  हजारों desires में  से किसको छोड़ना है और किसको रखना है? इस प्रक्रिया में  अगर feelings के आधार पर निर्णय लेते हैं, तो वह गलत हो

सकता है क्योंकि feelings are temporary. Feelings हमेशा comfort zoneको ही attract करती है। अपने वश में  करती है! बेहतर है, सही और  गलत के हिसाब से निर्णय लिया जाये, चाहे feelings अच्छी हों या बुरी।

Step2 “Believe”

YOU DON’T GET,WHAT YOU WANT.YOU GET WHAT YOU ARE !

Always remember that According to law of love.सरल शब्दों में  कहें तो हमें सिर्फ़ माँगने या इच्छा करने पर  ही believe नहीं  करना है बल्कि खुद को उसे पाने के लिये Deserving बनाना है।

अर्थात सिर्फ़ हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करते रहें कि मुझे गाड़ी मिल जाये, मुझे गाड़ी मिल जाये, ऐसा नहीं  होता। अपनी इच्छा को पाने के लिये आवश्यक है एक जीवन का लक्ष्य हो, और  पूरा  ध्यान उस पर  केंद्रित  करें।

तब आपके लक्ष्य को प्राप्त करने में कोई नहीं रोक सकता। यही आपका believe बनेगा, इससे ही आप strong होंगे और जो चाहेंगे प्राप्त कर पायेंगे।

Step3 “Act”

अपनी desire,Decide करने के बाद जब आप अपना Purpose समझ लेंगे। तब आपके अंदर भी emotions create होंगे, लेकिन ध्यान रहे , लक्ष्य सही होना चाहिये तभी सकारत्मक emotions पैदा होंगे क्योंकि purpose गलत हो सकता है, जिससे नकारात्मकता फैलेगी।

       Positive emotions से positive energy पैदा होगी जो positive actions का प्रतीक होंगी।

 PURPOSE.

       👇   

BELIEFS

           👇   

EMOTIONS

          👇 

ENERGY

          👇   

ACTIONS

   And you’ll get what you’re!

Step4 “Accept”

अपनी Desires को decide करने के बाद अपने BELIEFS को लक्ष्य दिया और  सकारात्मक सोच और emotions के साथ खुद को  Deserving बनाया।

अर्थात Step1,2 and 3 करने के बाद परिणाम की स्थिति आती है। जिसमें जरुरी नहीं कि  सफलता ही प्राप्त हो। इसकी तीन स्थितियाँ हैं ।

1. या तो 100%कर्म करते रहें, फल की चिंता ना करें।

2.80%कार्य करें, लेकिन 20% result को भी चेक करते रहें ।

3 20% काम करें और 80% चापलूसी से या चालाकी से सफलता प्राप्त करे।

गीता में भी कहा गया है कि  कर्म करो फल की चिंता ना करो। इसी condition के साथ हमें  आगे बढ़ना चाहिये। चाहे सफलता मिले या विफलता।

यही बेस्ट outcome है। law of love के अनुसार हमें  पूरी शिद्दत से अपने कार्य पर  धयं देना चाहिये। चाहे परिणाम कुछ भी हो।Feelings जैसी भी हो। और यही सिद्धांत इस दुनिया में  कारगर सिद्ध होगा। इसी का पालन करना चाहिये।

निष्कर्ष (CONCLUSION)

प्यार और  आकर्षण, उलझन भरे शब्दों के गहन अध्ययन से इतना तो समझ में  आने लगा है कि  इन्सान अपनी ही मृगतृष्णा में  उलझता चला जाता है। प्यार क्या है? आकर्षण क्या है?प्यार और  आकर्षण में  क्या अंतर है?(what is difference between love and attraction)

 ना जाने कितने सवालों से जुझता है और  रिश्तों को भी दाँव पर लगा देता है। ऊपर दी गई जानकारी से यह तो स्पष्ट हो गया कि सच्चा प्यार किसे कहते हैं। लेकिन फिर भी, प्यार कोई वस्तु नहीं, एक ऐसा एहसास है जिसे महसूस करने में ज़िंदगी लग जाती है।

भगवान से यही दुआ है मेरी, आप सभी की ज़िंदगी में  भी प्यार का सुकून आये और आप हमेशा खिलते-मुस्कुराते रहें।

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