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DSP Full Form in Hindi | What is the Full Form of DSP in Hindi

by Manish Sharma
DSP FULL FORM IN HINDI

DSP Full Form in Hindi | What is the Full Form of DSP in Hindi

दोस्तों आप में से कई लोग ऐसे होंगे जिनके मन में DSP Full Form in Hindi क्या होता है, DSP क्या होता है, DSP बनने के लिए क्या करना चाहिए, DSP करने की फीस कितनी होगी, DSP करने के लिए योग्यता क्या होनी चाहिए,DSP की चयन प्रक्रिया कैसी होती है, DSP होने के फायदे क्या होते हैं, जैसे सवाल उत्पन्न होते हैं और अगर आप भी DSP से जुड़े इन सवालों के जवाब ढूंढ रहे हैं तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें।

DSP का फुल फॉर्म (DSP Full Form in Hindi):

दोस्तों अगर बात की जाए DSP (DSP) के फुल फॉर्म की तो वह होता है “डेपुटी सुपरइंटेंडएंट ऑफ़ पुलिस ” (Deputy Superintendent of Police) और हिन्दी में इसे “उप पुलिस उपाध्यक्ष” कहते हैं।

DSP की चयन प्रक्रिया (DSP Selection Process):

  • अधिकारियों का चयन प्रत्येक वर्ष संघ लोक सेवा आयोग यूपीएससी द्वारा आयोजित करवाई जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से किया जाता है
  • परीक्षा का परिणाम आने के बाद जिन विद्यार्थियों का चयन होता है उन विद्यार्थियों को उनके कुल अंक और उनके द्वारा दी गई सेवा वरीयता सूची के आधार पर सेवा का आवंटन किया जाता है
  • क्योंकि इस सेवा के साथ अनेक चुनौतियां और उत्तर दायित्व भी जुड़े होते हैं इसीलिए इस सेवा हेतु ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है जो इसके लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त और अनुकूल हैं

DSP बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification to Become an DSP):

अगर आप DSP बनने के इच्छुक हैं और सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं तो इसके लिए आपका किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट (Graduate) होना अनिवार्य है

DSP बनने के लिए आयु सीमा (Age Limit to Become a DSP):

  • अगर आप जनरल कैटेगरी से है तो आपकी आयु 21 वर्ष से 30 वर्ष के बीच होने चाहिए
  • अगर आप ओबीसी कैटेगरी से हैं तो आपकी आयु 21 वर्ष से 33 वर्ष के बीच होनी चाहिए
  • अगर बात की जाए अनुसूचित जनजाति के लोगों की तो इनकी आयु 21 वर्ष से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए

DSP बनने के लिए शारीरिक योग्‍यता (Physical Qualification to Become an DSP):

लंबाई (Height): अगर आप एक DSP ऑफिसर बनना चाहते हैं तो इसके लिए आप की लंबाई (HHeight) बहुत मायने रखती है DSP में चुने जाने के लिए पुरुष उम्मीदवार की लंबाई कम से कम 165 सेंटीमीटर होनी चाहिए और वही अगर महिला उम्मीदवार की बात की जाए तो उनकी लंबाई कम से कम 155 सेंटीमीटर होनी चाहिए

छाती (Chest): अब अगर हम बात करें छाती (Chest) की चौड़ाई की तो पुरुषों के मामलों में वह कम से कम 84 सेंटीमीटर होनी चाहिए और महिलाओं की कम से कम 79 सेंटीमीटर होनी चाहिए

DSP बनने के लिए प्रशिक्षण (Training to Become an DSP):

अब अगर हम बात करें DSP के प्रशिक्षण की तो उसकी कुछ निम्नलिखित अवस्थाएं हैं जो कि नीचे दी गई है:

फाउंडेशन कोर्स (Foundation Course): इस कोर्स के अंतर्गत चुने गए अधिकारियों को प्रशासनिक सेटअप, भारत का संविधान, अंतर विभागीय संबंध और स्थानीय कानून के बारे में जानकारी दी जाती है।इस ट्रेनिंग में 2 महीने का समय लगता है। राज लोक सेवा आयोग द्वारा चुने गए और भी कई अधिकारी इस ट्रेनिंग में भाग लेते हैं।

इंस्टीट्यूशनल ट्रेनिंग (Institutional Training): फाउंडेशन ट्रेनिंग को पूरा करने के बाद अधिकारियों को इंस्टिट्यूशन ट्रेनिंग के लिए ले जाया जाएगा। इस ट्रेनिंग में 8 महीने का समय लगता है। इस ट्रेनिंग के अंतर्गत निम्नलिखित विषयों को कवर किया जाता है:
आधुनिक भारत में पुलिस (Police in Moden India):

  • पुलिस की भूमिका।
  • पुलिस प्रशासन और सेवा मामले।
  • पुलिस संगठन।
  • एक राज्य में पुलिस सेटअप।

विधि (Law):

  • भारत का संविधान।
  • न्याय शास्त्र और कानूनी अवधारणाएं।
  • आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973।
  • भारतीय दंड संहिता 1860।
  • भारतीय साक्ष्य अधिनियम 11872।
  • विशेष और स्थानीय कानून।

अपराध निवारण और रिकॉर्ड्स ( Crime Prevention & Records):

  • पेट्रोलिंग करना।
  • अपराध और अभियोजन संबंधित रिकॉर्ड्स को रखना।
  • निगरानी और खुफिया जानकारी संग्रह करना।

सार्वजनिक आदेश, यातायात और सुरक्षा ( Public order, Traffic and Security):

  • समाज में शांति व्यवस्था को बनाए रखना।
  • सुरक्षा और सुरक्षा कर्तव्य।
  • यातायात नियम और प्रबंधन।
  • राहत और आपदा प्रबंधन।

जांच और परीक्षण (Investigation and Trial):

  • फॉरेंसिक विज्ञान।
  • फॉरेंसिक चिकित्सा।
  • मामलों और न्यायालय प्रबंधन का परीक्षण।
  • कंप्यूटर ट्रेनिंग।

मानव व्यवहार और संबंध प्रबंधन (Human behaviour and relationship management):

  • मानव व्यवहार को समझना।
  • समूह और संस्थानों के साथ संबंध बनाए रखना।
  • रिलेशनशिप मैनेजमेंट।
  • पुलिस और मानवाधिकार।
  • सामुदायिक पुलिस।

प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (Practical Training): इंस्टिट्यूशन ट्रेनिंग के बाद नंबर आता है प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का यह ट्रेनिंग परिचालन क्षेत्र में दी जाती है । इस ट्रेनिंग में 6 महीने का समय लगता है।इस ट्रेनिंग के अंतर्गत अधिकारियों को निम्नलिखित चीजें सिखाई जाती है:

  • अपराध की रोकथाम कैसे करना है।
  • अपराध की जांच कैसे करनी है।
  • कानून और व्यवस्था का रखरखाव।
  • विशेष और स्थानीय कानूनों का प्रवर्तन।
  • खुफिया जानकारियों को संग्रह करना।

प्राथमिक परीक्षा (Preliminary Exam)

प्राथमिक परीक्षा (Preliminary Exam) के अंतर्गत आपको दो पेपर देने होते हैं और दोनों ही प्रश्न पत्र सामान्य अध्ययन General Study से जुड़ा होता है और दूसरा पेपर वैकल्पिक विषय (Optional Subject) का होता है जोकि 300 अंक का होता है।

मुख्य परीक्षा (Main Exam):

प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद आपको मुख्य परीक्षा की तैयारी करनी होगी।इस परीक्षा के अंतर्गत आपको मुख्य रूप से चार पेपर देने होंगे जो कि इस प्रकार है अंग्रेजी (English) 300 अंक, वैकल्पिक विषय (Optional Subject) 300 अंक, निबंध (Essay) 300 अंक, सामान्य अध्ययन (General Study) 300 अंक, वैकल्पिक विषय (Optional Subject) विषय के लिए अंको को 2 अंको (Two Digit) में निर्धारित किए गए हैं।

DSP की नियुक्ति प्रक्रिया (DSP Appointment Process): 

मुख्य परीक्षा (Main Exam) पास करने के बाद उम्मीदवारों को पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। यह इंटरव्यू लगभग 45 मिनट का होता है। इन उम्मीदवारों का इंटरव्यू एक पैनल के सामने होता है। इंटरव्यू के बाद मेरिट लिस्ट बनाई जाती है जिसके आधार पर इन अधिकारियों का चयन होता है।

DSP का कार्य और कर्तव्य (Work and Duty of an DSP):

  • उप पुलिस उपाध्यक्ष (DSP) रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए इन अधिकारियों की जवाबदेही पुलिस अधीक्षक(SP), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक(SSP), उप पुलिस महानिरीक्षक(DIG) के प्रति होती है।
  • उप पुलिस उपाध्यक्ष (DSP) सार्वजनिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक नियंत्रण इत्यादि के लिये ज़िम्मेदार होता है
  • इन सबके अलावा एक उप पुलिस उपाध्यक्ष (DSP) को वीआईपी सुरक्षा, मादक पदार्थों की तस्करी, आर्थिक अपराध, भ्रष्टाचार के मामले, आपदा प्रबंधन, सामाजिक-आर्थिक कानून, और पर्यावरण कानूनों आदि के संरक्षण आदि पर विशेष ध्यान देना पड़ता है

 

आशा करता हूं DSP Full Form in Hindi से जुड़ी यह जानकारी आप लोगों को पसंद आई होगी अगर ये पोस्ट आपको अच्छा लगे तो इसे अपने दोस्तों को शेयर और कमेन्ट जरूर करें और अगर आपके पास कोई सुझाव हैं तो हमें जरूर कमेन्ट सेक्शन में लिखकर बताएं। अगर आप भी किसी फूल फॉर्म के बारे में  जानना चाहते हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं।

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