76th भारत का स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त,1947)|essay on 15 august in hindi

अहंकार निष्फल हो ही जाता है, जब बात स्वाभिमान की हो। गुलामी का स्वाद चखते-चखते ,जब हिन्दुस्तानियों के दिल में  आत्मसम्मान की भावना जगी तो इस अग्नि को कोई रोक ना पाया। 

आज़ादी का अर्थ तब ही समझ आया ,जब भारत का स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 1947 को मनाया जाने लगा। देशभक्ति और  बलिदान से परिपूर्ण हृदय, अपने  देश की आज़ादी भी एक जश्न की तरह मनाने लगे।देश के Prime Minister , Independence Day पर लालकिले पर तिरंगा लहराते हैं और देश के नाम संदेश देते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता है। 

स्कूल के विद्यार्थी, Army, Airforce, Navy सबका प्रदर्शन किया जाता है। दूर दूर से लोग आते हैं, देश की राजधानी दिल्ली में, आज़ादी का जश्न मनाने।

 भारत का स्वतन्त्रता दिवस, 15 अगस्त को राष्ट्रीय त्यौहार(National Festival के रुप में मनाया जाने लगा। इस आर्टिकल   (Essay on 15 august in Hindi) में आज़ादी से सम्बंधित, इतिहास, परिस्थितियाँ, घटनाओं इत्यादि की जानकारी दी जायेगी। 

भारत का Swatantrata Divas,देश के नागरिकों को उन सभी बलिदानों की याद दिलाता है ,जो स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए किए हैं।

कुछ ऐसे महत्तवपूर्ण प्रश्न हैं, जिन्हें जानना बेहद आवश्यक है,सही ज्ञान के लिये। इस आर्टिकल में सभी प्रश्नों का विस्तृत रूप से जवाब दिया जायेगा।

[प्रस्तुत आर्टिकल “Essay on 15 August in HINDI” में अब आगे आपको सम्पूर्ण जानकारी प्रश्न व उत्तर के रूप में मिलेगी। Writer की पूरी कोशिश रही है कि ये आर्टिकल 15 अगस्त, 1947 के सभी घटनाक्रमों को अच्छे तरीके से प्रस्तुत करे, जिससे ये आर्टिकल Viewers और स्टूडेंट्स को Independence से related sabhi जानकारी उपलब्ध करवाए!]

What was Indian Independence  from  Britain? How did India got Independence?

भारत को ब्रिटेन अथवा  ईस्ट इंडिया कंपनी से आज़ादी कैसे प्राप्त हुई? 

1757 में शुरू हुए 200 वर्षों तक, भारतीयों को ब्रिटिश उपनिवेशवादियों के प्रभुत्व का सामना करना पड़ा। देश पर उनका नियंत्रण, प्लासी की लड़ाई में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की जीत से हुआ था।

 भारतीय इतिहास प्रतिशोध और विद्रोह की  घटनाओं से भरा पड़ा है, जिसने अंततः अंग्रेजों को खदेड़ दिया और पूर्व वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को,भारतीयों को सत्ता हस्तांतरित करने का जनादेश देने के बाद 15 अगस्त, 1947 को भारत को मुक्त करने के लिए मजबूर किया।  और इस दिन ने भारत को दो देशों, भारत और पाकिस्तान में विभाजित कर दिया।

अंग्रेज अपनी फूट डालो और राज करो की नीति के साथ सफल रहे ।  200 साल की गुलामी करना और अपने देश को वापस लेने का दावा करना, हमें महान नेताओं के बलिदान की याद दिलाता है।

Did India got independence peacefully?

क्या हिंदुस्तान को शांतिपूर्वक आज़ादी प्राप्त हुई?

भारत देश को आज़ादी के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। भारत के स्वाधीनता आंदोलन का नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया था। लेकिन जब देश को 15 अगस्त 1947 में आजादी मिली तो वे इसके जश्न में शामिल नहीं हुएथे।

भारत का स्वतंत्रता दिवस( Independence Day )15 अगस्त को मनाया जा रहा था ,परंतु महात्मा गांधी उस दिन बंगाल के नोआखली में थे, जहां वे हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच हो रही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए वे अनशन कर रहे थे।

जब तय हो गया कि भारत 15 अगस्त को आजाद होगा, तो जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने महात्मा गांधी को एक पत्र भेजा। इस पत्र में लिखा था, ’15 अगस्त हमारा पहला स्वाधीनता दिवस (Swatantrata Divas)होगा। आप राष्ट्रपिता हैं, इसमें शामिल हों आप अपना आशीर्वाद दें।’

गांधीजी ने इस पत्र का जवाब भिजवाया, ‘जब कलकत्ता में हिन्दू-मुस्लिम एक-दूसरे की जान ले रहे हैं, ऐसे में मैं जश्न मनाने के लिए कैसे आ सकता हूं? मैं दंगा रोकने के लिए अपनी जान दे दूंगा।’

जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्रता दिवस पर भाषण “Tryst with Destiny”(ट्रिस्ट विद डेस्टनी) 14 अगस्त की मध्यरात्रि को वायसराय लॉज ( राष्ट्रपति भवन) से दिया गया था।

तब नेहरू प्रधानमंत्री नहीं बने थे। 15 अगस्त 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन को  नेहरू ने अपने मंत्रिमंडल की सूची सौंपी और बाद में इंडिया गेट के पास Princess Garden में एक सभा को संबोधित किया।

हर स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते हैं, लेकिन 15 अगस्त 1947 को ऐसा नहीं हुआ था। लोकसभा सचिवालय के एक शोध पत्र के मुताबिक नेहरू ने 16 अगस्त 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था।

भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन के प्रेस सचिव कैंपबेल जॉनसन के अनुसार मित्र देशों की सेनाओं के सामने जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ 15 अगस्त को पड़ रही थी, इस कारण इसी दिन भारत को आजाद करने का फैसला किया गया था।

15 अगस्त तक भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा का निर्धारण नहीं हुआ था। इसका फैसला 17 अगस्त को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा से हुआ, जो कि भारत और पाकिस्तान की सीमाओं को निर्धारित करती थी।इस तरह सही मायने मे आज़ादी प्राप्त करना आसान नहीं था।

आगे बढ़ने से पहले आर्टिकल “Essay on 15 August in Hindi” में अपने देश के तिरंगे के बारे में थोड़ा जान लेते हैं,जो हर हिन्दुस्तानी का स्वाभिमान है

What is the flag of India?

  essay on 15 august in hindi

National Flag, भारत का  तिरंगा कहलाता  है, जो तीन रंगों से मिलकर बना है,जिसमें सबसे ऊपर केसरिया , बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा समान अनुपात में है। 

झंडे की चौड़ाई और उसकी लंबाई का अनुपात दो से तीन होता है।  सफेद पट्टी के केंद्र में एक गहरे नीले रंग का पहिया होता है जो चक्र का प्रतिनिधित्व करता है।

Who started Indian Independence?

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन 1857 में शुरू हुआ, और 1947 तक चला। आंदोलन की शुरुआत से पहले, भारत को कभी भी  राजनीतिक स्वतंत्रता का पता नहीं था।  

 जब अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा कर लिया, तब भारत के लोग किसी भी राजनीतिक निर्णय में सक्षम ना होने के कारण बेचैन हो गए थे। 

भारतीयों ने अपनी स्वतंत्रता की दिशा में जो पहला बड़ा कदम उठाया, वह था भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन।  इसने अंग्रेजों को दिखाया कि भारतीय अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए गंभीर थे।

Why did British Empire fall?

आंदोलन के नेता महात्मा गांधी थे।  1914 में वे भारत आ गए और उन्होंने आंदोलन का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया।  

उन्होंने हिन्दुस्तानियों को इकट्ठा करने और एक ठोस,मजबूत भारतीय एकता  बनाने का एक तरीका खोजा।  उन्होंने मूल निवासियों को अपनी भारतीय संस्कृति को अपनाने के लिए कहा, एक ऐसी चीज जो उनसे पहले किसी ने नहीं की थी।  

गांधीजी ने भारतीयों से कहा कि हमारे आपसी मतभेदों के बावजूद, हम सभी एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात पर सहमत हैं: और  वो है “अंग्रेजों के प्रति एक समान घृणा और अपने देश को अंग्रेजों के चंगुल से आज़ाद करवाना।”  और यहीं से ब्रिटिश शासन की उल्टी गिनती शुरू हो गई।

Why did England  give up on India?

शायद इस प्रशन को भी सुलझाने में गाँधी जी ने ही सहायता की। गाँधी जी ने भारत में एक सामूहिक पहचान बनाई ,जो पहले कभी देश में मौजूद नहीं थी।  

एक बार जब उन्होंने मूल निवासियों का ध्यान आकर्षित किया, तो गांधी जी ने भारतीय स्वतंत्रता के विरोध में विभिन्न हथकंडे अपनाने शुरू कर दिये।  

इन युक्तियों में सप्ताह भर के उपवास, मार्च शामिल थे, और सबसे महत्वपूर्ण बात, उन्होंने अहिंसा का प्रचार किया।  उन्होंने सामाजिक न्याय के विचार को भी पेश किया जो हर भारतीय से संबंधित था और वह सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक था ,जो अंग्रेजों पर भारतीयों की अंतिम जीत का कारण बना।

Is India fully independent?

  essay on 15 august in hindi

15 अगस्त 2023, हमारा 76वां स्वतंत्रता दिवस।  अब तक हमने भी अंग्रेजों को गलत साबित किया ।न तो देश बिक पाया और न ही बिखरा।  

आज 76 साल बाद भारत एक उभरती हुई महाशक्ति है लेकिन आज भी इतने सालों के बावजूद कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनसे हमें अभी भी आजादी चाहिए। 

गरीबी, भूख, भ्रष्टाचार ने भारत के स्वतंत्रता दिवस पर सवाल या निशाँ लगा दिये हैं। हाथों में  तिरंगा लेकर बस एक दिन ही देश को याद करना है, फिर  सड़कों  पर गिरा हुआ दिखाई देगा ये तिरंगा। क्या वाकई आज़ादी का जश्न यही है..?

किसी ने सच ही कहा है.

बिकने लगी है

फिर से भावनाएँ 

देशप्रेम उमड़ पड़ा है.

आज दिलों में 

चलो छोड़ो .

कौनसा हर रोज की

बात है!”

 हम इतने लंबे समय से इन अध्यायों का अध्ययन कर रहे हैं परंतु  इस बार हम कुछ नए अध्यायों के बारे में भी बात करेंगे, हो सकता है कि अगर हम समय पर उनका अध्ययन करें, तो हम उन्हें पारित करने में सक्षम हो सकते हैं,।देश तभी आगे बढ़ पाएगा जब हम इन चीजों से खुद को मुक्त कर पाएंगे।

Paid media

एक और महामारी है ,जो हमारे देश के लिए अधिक खतरनाक और घातक है।   देश के हालात चाहे जो भी हों या देश किसी भी संकट से गुजर रहा हो लेकिन Paid Media अपनी छवि खुद तैयार करने में लगा हुआ है !  जब तक ये Media पक्षपात बंद नहीं करते, तब तक हमारे लिए महाशक्ति बनना मुश्किल है।

 गलत जानकारी देना (Fake news)

 न केवल Paid Journalism, बल्कि हमें fake news की महामारी से भी तुरंत मुक्ति चाहिए!  कोई फर्क नहीं पड़ता कि विषय क्या है- चुनावी वोट, पुलवामा में हमला या नागरिकता संशोधन अधिनियम, या यूपी में राम मंदिर या यहां तक ​​​​कि किसी भी विषय  पर  आपको हर विषय पर फर्जी खबरें मिलेंगी, चाहे आप किसी भी किस्म की मांग करें।  यह लगभग चोर बाजार की तरह है- आप जो भी मांगते हैं वह आपको मिलता है।

गलत का विरोध ना करना

 जैसे-जैसे समय बीत रहा है हमारे शरीर का विकास हो रहा है, एक अतिरिक्त तत्व जोड़ा गया है- असहिष्णुता का तत्व। लोग सार्वजनिक रूप से कितना भी बहस करें, हम इसके बारे में नहीं  सोचते। Ignor करते हैं और सही बात पर कभी Stand नहीं लेते। 

गलत बात का विरोध नहीं  करते। हम अचानक कई चीजों के प्रति असहिष्णु हो गए हैं।कहें तो अगर कभी कोई हमारी राय के विरोध में पलटवार करता है तो हमारी पहली प्रतिक्रिया हिंसक हो जाती है। 

लेकिन इस साल स्वतंत्रता दिवस पर शायद हमें गांधी जी की बात सुननी चाहिए।  हमें स्वयं प्रयास करना चाहिए और चुप रहना चाहिए ताकि हिंसा को बढ़ावा  ना मिल सके।

Nepotism ( भाई भतीजावाद)

 दुख की बात यह है कि भारतीय समाज के विभिन्न हिस्सों में भाई भतीजावाद की सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम  है।  फिल्म उद्योग, राजनीति और यहां तक ​​कि हर क्षेत्र में Nepotism फैला हुआ है।  

अब तक हम समझ चुके हैं कि यह समस्या कितनी व्यापक है, हमारा अगला कदम यह होना चाहिए कि भारत से भाई-भतीजावाद की प्रवृत्ति को दूर करने का प्रयास किया जाए।  आप इसके खिलाफ आवाज उठा सकते हैं आप राजनीतिक वंशवाद को सत्ता से हटा सकते हैं ।

पर्यावरण के लिए आजादी

 यदि वातावरण खतरे में है तो इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।  हम भले ही दुनिया न जीतें लेकिन प्रदूषण के क्षेत्र में हम चैंपियन हैं क्योंकि “दुनिया के Top 10 सबसे प्रदूषित शहरों” की सूची में Top 6 हमारा है। 

 लेकिन हम अभी भी अपने तरीके नहीं बदलते हैं।  प्रदूषण के कारण दिल्ली NCR के बच्चे स्कूल जाते समय मास्क पहनते हैं लेकिन हम अभी भी इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं।

 हमने 1947 में आजादी हासिल की और ऐसा नहीं है कि आजादी के बाद एक देश के तौर पर हमने कुछ हासिल नहीं किया।  हमने चांद और मंगल पर अपना रास्ता बना लिया है लेकिन इन उपलब्धियों के बावजूद

हम अभी भी सामाजिक और राजनीतिक खामियों में फंसे हुए हैं, जिन्होंने हमें गुलाम बनाया है और जब हमें इन चीजों से खुद को मुक्त करने की आजादी है, तो हम ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं?  भारत का स्वतंत्रता दिवस पर प्रश्न चिन्ह लगना लाज़मी है।

 Who is the 1st freedom fighter of India?

  essay on 15 august in hindi

मंगल पांडे भारतीय स्वतंत्रता के 1857 के युद्ध के प्रमुख आंकड़ों में से एक थे, जिन्होंने उस चिंगारी को प्रज्वलित किया कि सिपाही विद्रोह के 90 साल बाद भारत को स्वतंत्रता मिली।

यह एक बहादुर था जिसने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने का साहस किया – मंगल पांडे, वह व्यक्ति जिसे अक्सर भारत के पहले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाना जाता है!मंगल पांडे, भारत का स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त का मुख्य शख्सियत हैं, जिनके प्रयासों से हमें यह दिन देखना नसीब हुआ।

Who is the most famous freedom fighter?


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महात्मा गांधी (2 अक्टूबर 1869 – 30 जनवरी 1948)

पूरा नाम: मोहनदास करमचंद गांधी

 

राष्ट्रपिता, मोहनदास करमचंद गांधी अहिंसा आंदोलन में विश्वास करते थे और दुनिया भर में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए लड़े थे।  उन्होंने दांडी नमक मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन, असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह जैसे अन्य आंदोलनों का नेतृत्व किया। भारत का स्वतंत्रता दिवस की पहचान हैं, गाँधी जी।

गांधी को उनके महान कार्यों के लिए “राष्ट्रपिता” माना जाता था।  राष्ट्रपिता, मोहनदास करमचंद गांधी अहिंसा आंदोलन में विश्वास रखते थे और दुनिया भर में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए लड़े थे।  उन्होंने दांडी नमक मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन, असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह जैसे अन्य आन्दोलनों का नेतृत्व किया।

 

अंग्रेजों द्वारा शासित भारत को देखने के बाद वे स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए।  उन्होंने नमक पर कर मुक्त करने के लिए दांडी मार्च में भाग लिया और अंग्रेजों के खिलाफ कई अहिंसा आंदोलनों में भी सक्रिय भाग लिया।गाँधी जी का नाम आज़ादी के पन्नों में  हमेशा अमर रहेगा। भारत का स्वतंत्रता दिवस, इस महानायक की भूमिका को कभी भुला नहीं  पायेगा।

Who ruled India before British?

अंग्रेजों के आने से पहले भारत कई छोटे और बड़े राज्यों में बंटा हुआ था।अंग्रेजों ने भारत के देशी राजाओं और नवाबों के बीच एकता और सहयोग की कमी का फायदा उठाया और इस तरह 200 से अधिक वर्षों तक भारतीयों पर राज किया।

 

इस सूची में उन प्रमुख साम्राज्यों और राज्यों के नाम हैं जो प्लासी की लड़ाई से ठीक पहले मौजूद थे, जिन्होंने भारतीय इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।

बंगाल के नवाब

बंगाल के नवाब ने फर्रुखसियर के कमजोर शासन के तहत औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त की।  मुर्शिद कुली खान बंगाल सल्तनत का पहला शासक था।  उन्होंने सुधारों की शुरुआत की जिसने बंगाल को दुनिया का सबसे अमीर स्थान बना दिया।  

इस क्षेत्र में अर्थव्यवस्था, व्यापार, उद्योग और कृषि फली-फूली। यही मुख्य कारण था कि अंग्रेज, बंगाल की ओर आकर्षित हुए।  सिराज उद दौला, बंगाल का अंतिम स्वतंत्र शासक कमजोर था, प्रशासन और सैन्य ज्ञान में खराब स्वाद था, अंग्रेजों ने फायदा उठाया और बंगाली नवाब को प्लासी की लड़ाई (1757) में विश्वासघात, धोखाधड़ी और आधुनिक रणनीति से हराया। इस प्रकार, बंगाल का क्षेत्र ब्रिटिश शासन के अधीन आने वाला पहला क्षेत्र था।

अवध के नवाब

बंगाल के नवाब की तरह, अवध के नवाब ने भी मुगल गवर्नर बुरहान अल मुल्क  सादात खान द्वारा सम्राट फर्रुखसियर के अधीन, कमजोर मुगल साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त की। 

 

इसने मुगलों और बंगाली कठपुतली नवाब मिर्जाफर के साथ अंग्रेजों के खिलाफ एक युद्ध लड़ा, जिसे बक्सर की लड़ाई के रूप में जाना जाता है, जिसमें अवध नवाब को अपनी आधी जमीन अंग्रेजों को देने के लिए मजबूर किया गया था और वर्ष 1856 में,  व्यपगत के सिद्धांत के तहत साम्राज्य को साम्राज्य में मिला लिया गया था।

 मराठा साम्राज्य।

16 वीं शताब्दी के अंत में औरंगजेब की बीमार नीतियों के खिलाफ मराठा दक्कन क्षेत्र में मुगलों के खिलाफ उठे और भारतीय उपमहाद्वीप में प्रमुख साम्राज्य बन गए। प्रत्येक लड़ाई के साथ, साम्राज्य के तहत भूमि में जबरदस्त वृद्धि हुई।  लेकिन कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता।  

पानीपत की तीसरी लड़ाई में अहमद शाह दुर्रानी के अधीन अफ़गानों के खिलाफ मराठा हार गए, जिसने प्रतिष्ठा को चकनाचूर कर दिया और अन्य साम्राज्यों के लिए मराठों की कमजोरी को प्रदर्शित किया।  

अंग्रेजों के साथ तीन युद्ध लड़े (एंग्लो मराठा युद्ध) उनमें से 2 को अंग्रेजों से हारना पड़ा, जब तक कि उन्हें सहायक गठबंधन पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर नहीं किया गया और वे वर्ष 1870 में भंग कर दिए गए।

हैदराबाद के निज़ाम 

हैदराबाद के अन्य 2 निज़ामों की तरह, इस राज्य की स्थापना निज़ल अल मुल्क ने 1720 में की थी। वे उपमहाद्वीप में सबसे बुद्धिमान राज्य थे। 

उन्होंने अंग्रेजों की शक्ति और शक्ति को समझा और इस तरह सही काम किया, सहायक गठबंधन पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने WW2 के युद्ध क्षेत्रों में जनशक्ति भेजने में एक प्रमुख भूमिका निभाई और ऑपरेशन पोलो के तहत भारत गणराज्य में शामिल हो गए।

 सिख साम्राज्य

 सिख साम्राज्य, जो युद्ध के मैदान में युद्ध की लड़ाई और बहादुरी और साहस के लिए जाना जाता है। इस प्रकार अंग्रेजों ने पहले 

उन्हें अकेला छोड़ दिया। लेकिन रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद, इस क्षेत्र में राजनीतिक अराजकता थी।  अंग्रेजों ने फायदा उठाया और साम्राज्य पर हमला किया और जीत हासिल की, और ब्रिटिश साम्राज्य को उत्तर में विस्तारित किया।

 ये कुछ प्रमुख और शक्तिशाली राज्य थे जिन्होंने भारत के भविष्य को निर्धारित करने में प्रमुख भूमिका निभाई।

निष्कर्ष(Conclusion)

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ।

आज़ादी की लड़ाई में, भारतीय सैनिकों ने चाहे कितनी भी छोटी भूमिका निभाई हो, वे आज बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उन्होनें उस समय देश के लिये आहुति दी जब हमारा देश परतन्त्रता की बेड़ियों में  जकड़ा था।  

  

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था कि उनके पास कोई प्रशिक्षण नहीं था;  बल्कि, उन्होंने अपने देश को स्वतंत्र बनाने के इरादे से ऐसा किया।  अधिकांश स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति दे दी।

 महत्वपूर्ण रूप से, उन्होंने अन्याय से लड़ने के लिए और अधिक प्रेरित किया।  उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के पीछे स्तंभ के रूप में कार्य किया, जिन्होंने कई लोगों को अपनी शक्ति और अधिकारों के बारे में जागरूक किया।  यह सब स्वतंत्रता सेनानियों का 

बलिदान ही है जो भारत भूमि पर हर हिन्दुस्तानी आज़ादी की साँस ले रहा है।

एक सुखद भविष्य की कामना के साथ

आर्टिकल “Essay on 15 August in Hindi” में स्पष्ट उत्तर दिया गया है, सभी प्रश्नों का ! आशा करते हैं, आप सभी संतुष्ट होंगे, हर जवाब से और आपको कई और नयी जानकारी भी मिली होगी। आगे शेयर कीजिए इस जानकारी को ताकि बाकी Viewers व students भी फायदा उठा पाएं, सम्पूर्ण ज्ञान का।

Happy Independence day 2023

भारत का स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त की शुभकामनायें !🙏🙏

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