गायत्री मंत्र |Gayatri Mantra with Meaning In Hindi.

Original Gayatri Mantra

भूर्भुव स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं

भर्गो देवस्य धीमहि ,धियो यो नः प्रचोदयात

गायत्री मंत्र से आप भली  भांती परिचित होंगे।यह मंत्र हिन्दू धर्म का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र है, जिसकी महत्ता ॐ के बराबर मानी जाती है।

यह यजुर्वेद के मंत्र ॐ भूर्भुवः स्वः और ऋग्वेद के छंद 3.62.10 के मेल से बना है। इस मंत्र में सवित्र देव की उपासना है, इसलिए इसे सावित्री भी कहा जाता है।ऐसा माना जाता है कि इसके उच्चारण और इसे समझने से ईश्वर की प्राप्ति होती है।

गायत्री मंत्र के रचयिता कौन थे?

Gayatri Mantra with Meaning In Hindi

यह मंत्र सर्वप्रथम ऋग्वेद में उद्धृत हुआ है। इसके रचयिता ऋषि विश्वामित्र और देवता सविता हैं। वैसे तो यह मंत्र विश्वामित्र के इस सूक्त के 18 मंत्रों में केवल एक है, किंतु अर्थ की दृष्टि से इसकी महिमा का अनुभव आरंभ में ही ऋषियों ने कर लिया था और संपूर्ण ऋग्वेद के 10 सहस्र मंत्रों में इस मंत्र के अर्थ की गंभीर व्यंजना सबसे अधिक की गई। इस मंत्र में 24 अक्षर हैं

उनमें आठ आठ अक्षरों के तीन चरण हैं। किंतु ब्राह्मण ग्रंथों में और कालांतर के समस्त साहित्य में  इन अक्षरों से पहले तीन व्याहृतियाँ और उनसे पूर्व प्रणव या ओंकार को जोड़कर मंत्र का पूरा स्वरूप इस प्रकार स्थिर हुआ:

गायत्री मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई थी? Origin Of Gayatri Mantra.

देवी गायत्री को सनातन संस्कृति के धर्म शास्त्रों में बहुत महत्व दिया गया है। शास्त्रोक्त मान्यता है कि गायत्री मंत्र को समझने मात्र से चारों वेदों के ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है। देवी गायत्री की आराधना से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और मोक्ष की प्राप्ति है।

देवी गायत्री को चारों वेदों की जन्मदात्री माना जाता है। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि इस कारण वेदों का सार भी गायत्री मंत्र को माना जाता है।

मान्यता है कि चारों वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के बाद जो पुण्य फल मानव को मिलता है, अकेले गायत्री मंत्र को समझने मात्र से चारों वेदों का ज्ञान मिल जाता है। गायत्री माता को सनातन संस्कृति की जन्मदात्री भी माना जाता है।

मान्यता है कि चारों वेद, शास्त्र और श्रुतियां की जन्मदात्री देवी गायत्री हैं। वेदों की जन्मदात्री होने के कारण इनको वेदमाता भी कहा जाता है।

त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश की आराध्य देवी भी इनको माना जाता है, इसलिए देवी गायत्री वेदमाता होने के साथ देवमाता भी हैं। गायत्री माता ब्रह्माजी की दूसरी पत्नी हैं, इनको पार्वती, सरस्वती, लक्ष्मी का अवतार भी कहा जाता है।

गायत्री मंत्र अर्थ ( Gayatri Mantra Meaning)

Gayatri Mantra with Meaning In Hindi

  गायत्री मंत्र पहली बार ऋग्वेद (मंडला 3 .62 .10) में प्रकट हुआ, जो 1100और 1700 ईसा पूर्व के बीच लिखा गया एक प्रारंभिक वैदिक पाठ है। 

इसे उपनिषदों में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान और भगवद गीता में परमात्मा की कविता के रूप में जाना जाता है।  ऐसा माना जाता है कि गायत्री मंत्र का जाप करने से मन दृढ़ता से स्थापित होता है । 

अलग अलग शब्दों का अर्थ.

 : सर्वरक्षक परमात्मा

भू: प्राणों से प्यारा

भुव: दुख विनाशक

स्व: सुखस्वरूप है

तत् : उस

सवितु: उत्पादक, प्रकाशक, प्रेरक

वरेण्य : वरने योग्य

भुर्ग: शुद्ध विज्ञान स्वरूप का

देवस्य : देव के

धीमहि : हम ध्यान करें

धियो : बुद्धियों को

: जो

न: : हमारी

प्रचोदयात : शुभ कार्यों में प्रेरित करें.

भावार्थ : उस सर्वरक्षक प्राणों से प्यारे, दु:खनाशक, सुखस्वरूप श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंतरात्मा में धारण करें तथा वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

सरल शब्दों में गायत्री मंत्र का अर्थ:

हे दिव्य माता, हमारा हृदय अंधकार से भर गया है।  कृपया इस अंधकार को हम से दूर करें और हमारे भीतर के प्रकाश को बढ़ावा दें।

 गायत्री मंत्र, जिसे सावित्री मंत्र के रूप में भी जाना जाता है ।गायत्री मंत्र का प्रचार ब्रह्मऋषि विश्वामित्र ने ही किया था।  उन्होंने गायत्री मंत्र के जाप से होने वाले फायदों के बारे में भी बताया।

 Gayatri Mantra का जाप कब और  कैसे करें?

गायत्री मंत्र को हिंदू धर्म में सबसे सर्वोच्च मंत्र का स्थान दिया गया है। इस मंत्र का जाप करना इंसान के लिए बहुत लाभकारी माना गया है, लेकिन नियम और समय से करने पर ही इसका फल प्राप्त होता है।

गायत्री मंत्र का जाप करने के कई फायदे हैं।  हालांकि इनके जप की एक निश्चित प्रक्रिया होती है।  इस प्रकार, लोगों को गायत्री मंत्र का जाप करते समय कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। 

गायत्री मंत्र के नियम

गायत्री मंत्र का जाप करते समय हमेशा आंखें बंद कर लेनी चाहिए और हर शब्द पर ध्यान केंद्रित करने और उनका अर्थ समझने की कोशिश करनी चाहिए। 

किस तरह करना चाहिए गायत्री मंत्र का जाप.

-गायत्री मंत्र का जाप हमेशा माला के साथ करना चाहिए। इसके लिए रुद्राक्ष की माला ही प्रयोग करनी चाहिए।

-मंत्र का जाप कभी तेज आवाज में नहीं करना चाहिए। मंत्र का जाप मौन रहकर भी किया जा सकता है।

मंत्र का जाप शुक्रवार के दिन करना विशेष लाभकारी माना गया है। इस दिन पीले वस्त्र पहनीं और हाथी पर विराजमान गायत्री मां का ध्यान कर करना चाहिए

-गायत्री मंत्र का विशेष लाभ पाने के लिए मंत्र के आगे और पीछे श्री का संपुट लगाकर करना चाहिए।प्रत्येक शब्द या ध्वनि का उच्चारण सही ढंग से किया जाना चाहिए, जैसा कि होना चाहिए। 

गायत्री मंत्र का जाप कब करना चाहिये?

गायत्री मंत्र को लयबद्ध तरीके से जपना चाहिए। उसका उच्चारण सही हो यह ध्यान दें। साथ ही तीन प्रहर गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।

हालांकि इसका जाप दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन यह सुझाव दिया जाता है कि इस मंत्र का जाप सुबह जल्दी और रात को सोने से पहले जरुर करना चाहिए, यह बहुत लाभकारी होता है।

*पहला समयसूर्योदय से पूर्व गायत्री मंत्र का जाप प्रारंभ करें और तब तक करें जब तक सूर्योदय हो न जाएं। ये सबसे उत्तम समय होता है।

*दूसरा समयदोपहर में भी गायत्री मंत्र का जाप कर सकते हैं। इस वक्त जाप 12 से 1 के बीच में ही करना चाहिए।

*तीसरा समय : शाम को गायत्री मंत्र का जाप सूर्यास्त से पहले शुरू करें और तब तक करें जब तक सूर्यास्त  न हो जाए।

आखिर मंत्र जीवन देने वाले सूर्य और परमात्मा दोनों के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।  यह  मंत्र के प्रति हृदय-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए  स्वयं को प्रेरित करने का एक तरीका है।

गायत्री मंत्रसाधना विधि.

गायत्री मंत्र की रचना(Gayatri Mantra Rachna):- गायत्री मंत्र का वर्णन हमें सनातन धर्म के सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद में मिलता है,इस मंत्र के रचियता ऋषि श्री विश्वामित्र जी हैं|

गायत्री मंत्र साधना का महत्व( Gayatri Mantra ka mahatav):- गायत्री मंत्र को सभी मंत्रो में  शिरोमणि स्थान प्राप्त है| गायत्री देवी को विद्या, तेज़ और बल की

देवी भी कहा जाता है| यदि कोई साधक विधिपूर्वक गायत्री देवी की साधना करने लग जाए तो उस साधक को अदृश्य रूप में अनेक सिद्धियां प्राप्त शुरू होने लगती हैं और साधक के सभी कार्य अपने आप सिद्ध होने लगते हैं| इस मंत्र के रोज़ाना जाप करने से साधक की बाहरी नकारत्मक शक्तियों से भी रक्षा होती है|

साधना की विधि:- 

सबसे पहले किसी रविवार अथवा मंगलवार के दिन पूर्व या उत्तर की तरफ घर में कोई शुद्ध स्थान देख ले और उस तरफ किसी चौंकी पर साफ वस्त्र के ऊपर गायत्री देवी की प्रतिमा स्थापित करें,

अब देवी की प्रतिमा को गंगा जल के छींटे लगा कर साफ करें, उसके बाद प्रतिमा के सामने देसी घी का दीपक और धूप जलाये, उसके बाद देवी को लाल सिन्दूर से तिलक करें,

सामने थोड़ा भोग के लिए प्रसाद रखे, एक जल का लोटा साथ में रख दे, यह सब करने के बाद संकलप ले| अपने जितने दिन का भी अनुष्ठान करना है उतने दिन आपका साधना करने का स्थान और सम्य एक होना चाहिए |

साधना में प्रयोग होने वाली सामग्री

1दीपक, जल का लोटा, धूप, सिन्दूर, भोग के लिए कोई प्रसाद(किशमिश या मिश्री), 1 गायत्री देवी की प्रतिमा, 1 ऊन के कम्बल का आसन, 1 माला (ऊन, रुद्राक्ष, तुलसी की कोई भी माला ले सकते हो), हो सके तो रोज़ाना एक फूल |

Gayatri Mantra के फायदे.

गायत्री मंत्र का जाप करने के कई फायदे हैं।  इस प्रकार, गायत्री मंत्र जप के कुछ सकारात्मक प्रभाव यहां दिए गए हैं। गायत्री मंत्र का है ऐसा रहस्य, इससे मिलते हैं ये फायदे.

1. यह सीखने की शक्ति को बढ़ाता है।

2. यह एकाग्रता बढ़ाता है।

3.यह समृद्धि लाता है।

4.यह लोगों को शाश्वत शक्ति देता है।

5.यह शांति के लिए बहुत उपयोगी है।

6.यह आध्यात्मिक पथ पर पहला कदम    है।

7.यह भगवान से संबंधित है।

8. यह मन को मजबूत करता है और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार करता है।

9.यह सांस लेने के लयबद्ध पैटर्न में सुधार करता है।

10.यह हमारे दिल को स्वस्थ रखता है।

11.यह भक्त को सभी खतरों से बचाता है और अंतर्ज्ञान के माध्यम से भगवान की ओर मार्गदर्शन करता है।

12.यह हमारे पारिवारिक जीवन को बेहतर बनाता है।

गायत्री मंत्र का जाप क्या स्त्रियाँ कर सकती हैं?

गायत्री मंत्र बहुत ही पवित्र मंत्र माना जाता है। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि मंत्रों में वे गायत्री मंत्र हैं। गायत्री मंत्र की महिमा को देखते हुए ही आज हर किसी को यह मंत्र याद है।

छोटे बालक से लेकर वृद्ध तक इस मंत्र का जाप करते हैं। लेकिन शास्त्रों में प्रत्येक मंत्र को जप करने के कुछ नियम भी बताये जाते हैं।

गायत्री मंत्र के लिये तो विशेष रूप से शास्त्र सम्मत विधि विधानों का पालन करने के निर्देश हैं। मान्यता है कि शास्त्रानुसार गायत्री मंत्र का जप न करने से मंत्र फलित नहीं होता। ऐसे

में क्या महिलाएं कर सकती हैं गायत्री मंत्र का जाप? यदि नहीं तो क्यों वर्जित माना जाता है महिलओं के लिये गायत्री मंत्र का जाप करना? आइये जानते हैं।

वैसे तो गायत्री मंत्र इतना लोकप्रिय और स्मरण करने में इतना सरल है कि हर कोई इसका जाप कर सकता है। फिर वे महिलाएं हों या बच्चे, ब्राह्मण हों या अन्य।

लेकिन शास्त्रों के मतानुसार गायत्री मंत्र का जाप केवल वही कर सकता है जो मन, वचन व कर्म से ब्राह्मण हो व जनेऊ धारण करता हो।

यहां ब्राह्मण कोई जाति विशेष नहीं बल्कि कर्म आधारित वर्ण हैं। ब्राह्मण के अलावा शुद्ध आचरण रखने व जनेऊधारण करने वाले अन्य वर्ण क्षत्रिय, वैश्य भी कर सकते हैं।

लेकिन शूद्र कर्म करने वाले जो चाहे वह जन्मजात ब्राह्मण ही क्यों न हों के लिये गायत्री मंत्र का जाप करना शास्त्रानुसार सही नहीं है।

स्त्रियों के गायत्रीमंत्र जप न करने को लेकर भ्रांतियां.

समाज में कुछ भ्रांतियां भी प्रचलित हैं जिनके अनुसार महिलाओं के लिये गायत्री मंत्र को वर्जित बताया जाता है। इनके अनुसार अलग-अलग कारण बताये जाते हैं।

जैसे कि गायत्री मंत्र का जाप करने से महिलाओं के मासिक धर्म का चक्र प्रभावित होता है, या फिर उनमें पुरूषों के गुण आने लगते हैं, उनके चेहरे पर दाड़ी मूंछ के रूप में अवांछित बाल आने लगते हैं, उनके हार्मोन्स में बदलाव होने लगते हैं। ये सभी लोक प्रचलित मान्यताएं हैं जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

एक बात और है जो प्रत्येक मंत्र पर लागू होती है, वह है सही उच्चारण। किसी भी मंत्र मे निहित सकारात्मक ऊर्जा का संचार तभी होता है जब उसका विधिवत व सही उच्चारण किया जाये।

मलिन हृदय के साथ व स्वार्थ सिद्धि के लिये यदि कोई किसी भी मंत्र का जाप करता है तो उसका नकारात्मक प्रभाव ही ज्यादा पड़ता है। आप चाहे पुरुष हैं या स्त्री सच्ची श्रद्धा व नियमानुसार ही कोई पूजा करेंगें तो वह फलित होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

आज कल के इस आधुनिक युग में  व्यक्ति को  एकांतवास व समय उपलब्ध नहीं है कि वह प्राचीन काल के ऋषि मुनियों की भांति शांतचित होकर व शुद्धतापूर्वक विधि विधान से जप तप की क्रिया कर सके।

अतः यदि कोई व्यक्ति दैनिकचर्या के रूप में स्नान करके पूजा के समय गायत्री मन्त्र का 3-5-7-11 माला, जितना भी सम्भव हो, नियमित रूप से जाप करता रहे, तो उसे गायत्री मन्त्र का प्रभाव अवश्य ही देखने को मिल जाएगा।

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