अंतर्मुखी और बहिर्मुखी व्यक्तित्व | Introverted and Extroverted Personality.| Introvert and Extrovert kya hai

 Introvert and Extrovert kya hai कभी देखा है ,कुछ लोगों को अकेले -अकेले या चुपचाप रहते हुए या कुछ लोगों को बिंदास और  मस्त  अपनी ज़िंदगी का मज़ा लेते हुए ! यही है अलग -अलग व्यक्तित्व की छवि!

इस आर्टीकल में  हम व्यक्तित्व (Personality) के सम्बंध में  फैली मान्यताओं का विस्तृत रुप से अध्ययन करने वाले हैं! अंतर्मुखी और  बहिर्मुखी की सभी संभावनाओं,मिथ्य,तथ्य, विशेष रुप से अंतर्मुखी व्यक्तित्व और बहिर्मुखी व्यक्तित्व को सरल शब्दों में गहराई से समझने की कोशिश करेंगे!

हर एक पहलू का बारीकी से अध्ययन करके ही आप समझ पायेंगे हर एक व्यक्तित्व को, कि Introvert personality (अंतर्मुखी व्यक्तित्व) है या Extrovert Personality (अंतर्मुखी व्यक्तित्व)है!

अंतर्मुखी और बहिर्मुखी का अर्थ (MEANING OF INTROVERTS AND EXTROVERTS)

20वीं सदी में साईकोलोजीस्ट Dr. Carl JUNG ने अपनी ही इंस्टीटयूट के कुछ students के behaviour पर research की !

और  काफ़ी समय की मेहनत के बाद इस नतीजे पर पहुँचे कि Personality मुख्य रुप से 3 तरह की होती है अंतर्मुखी ,बहिर्मुखी,उभयमुखी(Introvert,Extrovert,Ambivert)

1.अंतर्मुखी व्यक्तित्व :‐-जो बाहरी वातावरण से दूर रहते है और अपनी सोच और भावनाओं में  संलग्न रहते हैं !

2.बहिर्मुखी व्यक्तित्व :‐- जो बाहरी वातावरण में आसानी से घुल मिल जाते हैं! और  दोस्तों के ग्रुप में  रहना पसंद करते हैं! 3.उभयमुखी:‐ जो अंतर्मुखी और बहिर्मुखी व्यक्तित्व का मिश्रण है अर्थात स्थिति के अनुसार लोगों के बीच भी मस्त रहते हैं और अकेले में  भी अपनी संगति को एन्जॉय करते हैं.

अंतर्मुखी व्यक्तित्व की विशेषता (Introvert kya hai)

 क्या आप अकेले समय बिताना पसंद करते हैं? क्या आपको पार्टी में  जाना  पसंद नहीं?क्या आप भीड़ में भी उदासीन महसूस करते हैं? सही पहचाना आपने !

अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग ही अक्सर ऐसा ही करते हैं! गहराई से समझने के लिये आइये अंतर्मुखी व्यक्तित्व पर एक नज़र डालते हैं.

1.अंतर्मुखी (Introverts) अपनी feelings और emotions के साथ ज्यादा रहना पसंद करते हैं!भीड चाल से दूर, शान्ति में  समय बिताना अच्छा लगता है!

2.अंतर्मुखी सामान्यतौर पर बहुत अच्छे listeners होते हैं! (Introverts are generally  better listeners.)

3.अंतर्मुखी अपनी अंदर की दुनिया में  ही व्यस्त रहते हैं! उन्हें बिल्कुल भी फ़र्क नहीं पड़ता,कि लोग क्या कहेंगे? इस प्रवृति के लोग अक्षर खोये-खोये से रहते हैं!

4.अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग focus or concentrate रहते हैं,अपनी मंज़िल की ओर! वो जानते हैं उनका लक्ष्य क्या है?(Introverts  are able to really focus.)

5.अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोगों के ज्यादा दोस्त नहीं  होते! लेकिन इनसे जुड़ने वाले लोगों का गहरा जुडाव होता है!(Introverts cultivate deep connections with people.)

6.अंतर्मुखी अक्सर आत्म निर्भर होते हैं! वे जानते हैं,उन्हें  क्या चाहिये?(Introverts are more independent. They know what they want)

7.अंतर्मुखी अपना समय किसी के साथ बाँटना नहीं  चाहते! अपनी ही दुनिया में, अपनी ही सोच में  डुबे रहते हैं!

8.अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग हर विषय को गम्भीरता से समझने की कोशिश करते हैं!

9.अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग छोटी बातचीत में बोर होने लगते हैं! उन्हें गहरी बातचीत पसंद होती है!(They love deep conversations.)

10.अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग हकीकत को गहराई से समझने की कोशिश करते हैं! (They know the value of struggles)

बहिर्मुखी व्यक्तित्व की विशेषता (Extrovert kya hai.)

 क्या आपको दोस्त बनाना पसंद है?क्या आपको पार्टी में loud music सुकुन देता है? क्या आप अकेले में  उदास हो जाते हैं ? बिल्कुल सही पहचाना आपने बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले इन्सान हैं  आप!

आइये कुछ और गतिविधियों पर  प्रकाश डालते हैं हम ! बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोगों में  और क्या खास बात होती है.

1.बहिर्मुखी अक्सर बातूनी, मिलनसार,  उत्साही, मैत्रीपूर्ण  के रूप में वर्णित हैं!

2.बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग जोखिम वाले व्यवहारों में संलग्न होने की अधिक संभावना रखते हैं!

3.बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग ज्यादा दोस्त बनने में  विश्वास रखते हैं! अजनबियों से बात करने में  भी बिल्कुल हिचकिचाते नहीं!(They are very friendly in nature)

4.बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोगों को समूह कार्य में आनंद आता है! बहिर्मुखी अपने आपको अच्छा प्रदर्शित कर  पाते हैं!

5.बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग अकेले बिताए गए बहुत अधिक समय से पृथक-पृथक महसूस करते हैं! लोगों के बीच ही उनकी ऊर्जा वापिस आती है!

6.बहिर्मिखी व्यक्तित्व वाले लोग बातचीत करके ,संवाद करना पसंद करते हैं! इससे उनका तनाव कम  होता है! (They love to talk)

7.बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग अपने विचारों और भावनाओं के बारे में  बिना किसी झिझक के बात करना पसंद करते हैं!

8.बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग विचारों और प्रेरणा के लिए दूसरों और बाहर के स्रोतों को आदर्श मनाते हैं!

9.बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग गम्भीर स्थिति में  तुरंत फ़ैसला लेते हैं और बिना सोचे समझे कार्य करते हैं!

10.बहिर्मुखी लोग अन्य लोगों के साथ अधिक समय बिताने के लिए, सामाजिक गतिविधियों में अधिक समय बिताने के लिए अधिक दोस्त बनाते हैं!

        कुछ मनोवैज्ञानिकों  का मानना है कि  बहिर्मुखी ,अंतर्मुखी की तुलना में अधिक खुश होते हैं!

अंतर्मुखी और बहिर्मुखी व्यक्तित्व को कैसे जाने?

बहिर्मुखी लोग केवल दोस्तों, परिवार के सदस्यों और सहकर्मियों से ही बात करने का आनंद नहीं लेते हैं; बल्कि  अजनबियों के साथ बातचीत करना भी पसंद होता है।

आप नए लोगों से मिलना और उनके जीवन के बारे में जानना पसंद करते हैं। अंतर्मुखी लोगों के विपरीत जो बोलने से पहले सोचते हैं, बहिर्मुखी अपने विचारों और विचारों का पता लगाने और व्यवस्थित करने के तरीके के रूप में बोलते है!

अंतर्मुखी व्यक्तित्व की बात करें तो इस तरह के लोग अपनी ही संगति पसंद करते हैं! अपने ही विचारों  में,अपनी ही सोच में,अपने ही ख्यालों में खोये रहते हैं!

लोगों से दूर,दुनिया से दूर, अपने खुद मे ही एक दुनिया बसा लेते हैं! अपनी भावनाओं का गहन अध्ययन करते हैं! और  यही सबसे बड़ा  अंतर है अंतर्मुखी ओर बहिर्मुखी व्यक्तित्व में!

अंतर्मुखी और बहिर्मुखी व्यक्तित्व को हम एक दूसरे से तुलना करके भी जान सकते हैं! आइये कुछ ओर पहलुओं पर भी नज़र डालें!

1.अंतर्मुखी व्यक्तित्व अकेले में  ही ऊर्जावान बनते हैं !लोगों के बीच बहुत जल्दी थक जाते हैं! इसके विपरित बहिर्मुखी व्यक्तित्व सामाजिक परिंदा हैं! लोगों के बीच में ही ऊर्जावन बनते हैं और अकेलापन सहन नहीं  कर  पाते!

2.अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोगों की ज़िंदगी में दोस्त बहुत कम होते हैं! लेकिन लोगों से इनका deep connection होता है जो ज़िंदगी भर रहता है! इसके विपरीत  बहिर्मुखी हर किसी को अपना दोस्त बना लेते है चाहे कोई अजनबी ही क्यूँ ना हो! इन्हें लोगों के बारे में  जानना अच्छा लगता है!

3.अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग एक समय में एक ही इन्सान से बात करते हैं! इनकी बातचीत काफ़ी गहरी होती है, दूसरे बंदे की भावनाओं से आसानी से जुड़ जाते हैं! इसके विपरीत बहिर्मुखी दोस्तों के साथ पार्टी वगैरह सब एन्जॉय करते हैं! बिंदास प्रकृति के ये लोग भावनाओं से कईं बार जुड़ नहीं पाते पर centre of attraction जरुर बं जाते हैं!

4.अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग ज़िंदगी में  आई परेशानियों का चुप रहकर,खुद से ही लड़कर solution ढूंढ लेते हैं! अपने आपको बिखरने से संभाल लेते हैं ! इसके विपरीत बहिर्मुखी समस्या को संभल नहीं  पाते! अपने दोस्तों से मिलते हैं! अपनी भावनायें बेझिझक व्यक्त कर देते हैं!

5.अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग Mysterious (रहस्यमयी) होते हैं! अपनी feelings,अपने emotions किसी के सामने भी व्यक्त नहीं  करते! जबकि बहिर्मुखी लोग खुले परिन्दे की तरह होते हैं! जो मन में  आया बिंदास बोल दिया!

अंतर्मुखी या बहिर्मुखी व्यक्तित्व बेहतर कौन  है ?

 अक्सर हर किसी के मन में ये सवाल तो आता ही होगा! आखिर अंतर्मुखी ओर बहिर्मुखी व्यक्तित्व में  कौन  ज्यादा बेहतर है?

इस सवाल के जवाब में  यही कहना चाहूंगी कि अच्छा और  बुरा ये दोनों शब्द तो हर विषय,हर वस्तु के साथ जुड़े  हैं! उसी प्रकार हर व्यक्तित्व की अपनी ही पहचान होती है!

किसी में  कुछ अच्छा है तो किसी में  कुछ बुरा! व्यक्तित्व इन्सान की सोच,भावनाएँ और  कार्य का प्रतिबिंब है! ( Personality is the mirror of thoughts, feelings and actions)व्यक्तित्व को परिभाषित करना इतना आसान नहीं !

Where beauty captures the attraction

Personality captures the heart!

                        

अगर कुछ गहरे पहलुओं पर  नज़र डाले तो समझ पायेंगे कि अंतर्मुखी का अर्थ हमेशा अकेले रहना नहीं होता और ना ही बहिर्मुखी का अर्थ हमेशा सामाजिक होना होता है!

स्थिति के अनुसार अंतर्मुखी भी भीड़ का हिस्सा बन सकते हैं! Motivational Speakers इसी category में  आते हैं क्योंकि उनका अपनी सोच पर पूरा फोकस होता है! और स्थिति के अनुसार ही बहिर्मुखी भी shyहो सकते हैं!

क्या अंतर्मुखी व्यक्तित्व और बहिर्मुखी व्यक्तित्व सम्बंध बना सकते हैं?

             

लोगों में जिज्ञासा होती है ये जानने की कि  अंतर्मुखी ओर बहिर्मुखी संबध बना सकते हैं या नहीं!इसका सरल उपाय यही है यदि अंतर्मुखी दूसरे लोगों से बातचीत करने में progress लाना चाहते हैं  तो अपनी writing skills को बढ़ावा देना होगा!

अगर बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उस इन्सान के बारे मे हो बात कीजिये! उसकी आदतें,उसके शौक,उसकी पसंद य्यही है बातचीत के नये आयाम!

कुछ भी नामुमकिन नहीं! है तो इन्सान ही! जो दिल को छू जाये तो सम्बध बनाने में  वक़्त नहीं लगता!! भावनाओं से ही तो जुड़ा होता है हर इन्सान! दिल के करीब आने में कितना वक़्त लगता है!

निष्कर्ष .

         

बहुत से विद्वानों ने व्यक्तित्व पर अलग-अलग ना जाने कितनी बार परिभाषित किया है..! प्राचीन विद्वान मनाते थे ऐसी कोई theory नहीं है जो व्यक्तित्व को परिभाषित कर  सके! बचपन की घटनाएँ, बचपन का माहौल ये सब असर डालती हैं  इन्सान की मानसिकता पर ! इसलिये हर इन्सान की प्रकृति अलग अलग होती है!

 अगर मेरी राय लेना चाहेंगे तो यही कहूँगी इन सब परिभाषा को मैं नहीं  मानती! एक इन्सान का आधार feelings और emotions हैं!

इसके बिना इन्सान ,इन्सान ही नहीं  है! बेहतर है, इंसानियत को अपनाये, इंसानों से प्यार करें! प्यार और चाहत के सामने तो हर इन्सान नतमस्तक हो ही जाता है! इन्सान को स्वीकार करे जैसा भी वो है!

हर इन्सान खुदा की बनाई देन है! कुछ खास तो हर किसी में  होता है! दिल जुड़ने की बात है! खुले दिल से अपनाये, हर इन्सान को, रिश्तों की कमी नहीं!

           खुश रहिये ! आबाद रहिये! स्वस्थ रहिये!

                             शुक्रिया 🙏🙏

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