Meditation Kya Hai|ध्यान Meditation की साधना कितने प्रकार की होती है?

Meditation Kya Hai?

आज के युग में हर इन्सान अपनी व्यस्त और भाग दौड़ वाली ज़िंदगी में एक  पल सुकून का ढूंढ  नहीं पाता ।संसारिक क्रिया-कलापों और मोहमाया में फँसकर, वास्तविकता से दूर होता चला जाता है।

शारीरिक थकान के साथ मानसिक थकान भी हावी होने लगती है। हर इन्सान को जरुरत है, मन की शान्ति की, जो शायद, इन्सान स्वयं ही भूल जाता है।

 इसका एकमात्र उपाय है, “ध्यान”। Meditation Kya Hai? यही एक सवाल है, जिसे हर किसी को समझना अति  आवश्यक है, जो ज़िंदगी की काफी हद तक समस्याओं

को भी हल कर सकता है।इस आर्टिकल में  ध्यान के बारे में  जानकारी दी जायेगी।  Meditation Kya Hai? ध्यान कितने प्रकार का होता है? कब करना चाहिये?

सभी प्रश्नों का जवाब देने की कोशिश की जायेगी। आध्यात्मिक उद्धेश्य से शब्दों का चयन किया गया है ताकि किसी की भावना को भी कोई ठेस ना पहुँचे। त्रुटियों के लिये क्षमाप्रार्थी हैं।

“ध्यान” शब्द कि गहराई।

Meditation Kay Hai?
Meditation Kay Hai?

 “ध्यान” एक छोटा सा शब्द है,  जो अनंत गहराई में  अपने अर्थ और विस्तार को समेटे हुए है। सरल शब्दों में  कहा जाए तो स्वयं से सम्बंधित सभी क्रिया-कलापों पर ध्यान केंद्रित करना।

अक्सर हम कहते हैं कि अपना ध्यान रखना जो “Take care”  को सम्बोधित करता है। इसी प्रकार ध्यान करना भी जीवन की एक व्यवस्थित प्रणाली है।

 Meditation Kay Hai? Meditation  का हिन्दी मतलब है, “ध्यान”।  अपने मन का ध्यान रखना, अपनी सोच का ध्यान रखना, अपने शब्दों का ध्यान रखना, अपने कर्मों का ध्यान रखना।

कईं बार जब हम ध्यान में  बैठते हैं तो हमें  लगता है कि हमारे मन की स्थिति बहुत श्रेष्ठ है। शान्ति और सशक्तीकरण महसूस होता है! परंतु हमारी दिनचर्या के दौरान, ऊर्जा का level घटने लगता है। और बहुत ही उदासी  महसूस होती है।

इसलिये कहा जाता है कि ध्यान सिर्फ़ कुछ ही वक़्त नहीं किया जाता बल्कि पूरी दिनचर्या के दौरान  मेडिटेशन  में लगे रहना चाहिये, अर्थात अपने आचरण पर ध्यान देना चाहिये, अपने व्यवहार पर ध्यान देना चाहिये, अपने विचारों पर ध्यान देना चाहिये। इसे कहते हैं “Meditative life style”।

अगर कोई पूछता है कि Meditation Kay Hai? Meditation कैसे करते हैं? सरल उत्तर यही है कि ध्यान करते नहीं है। ध्यान का अनुभव होता है। ध्यान कोई वस्तु नहीं है जो की जाए। ध्यान सूत्र, संसार से परे अपने ही अंदर सम्माहित गहरे ज्ञान को महसूस करने का अनुभव है।

Meditation करने का तरीका/ध्यान साधना विधि.

Meditation Kay Hai?
Meditation Kay Hai?

Meditation Kay Hai? ध्यान लगाने का तरीका क्या है? अक्सर लोग समझ नहीं  पाते।ध्यान लगाने की विधिकहीं भी, कभी भी, कोई भी, कैसे भी  ध्यान लगा सकता है।

समय-

मेडिटेशन कितनी देर करना चाहिये?  

ध्यान , किसी भी वक़्त लगाया जा सकता है। परंतु सुबह 4  से 5 बजे तक का समय उपयुक्त माना जाता है। क्योंकि इस वक़्त वातावरण में high positive energy होती है।

जिसे ग्रहण करने से पूरी दिनचर्या भी सकारात्मक गुज़रती है। आत्मा का सशक्तीकरण होता है। वैसे मेडिटेशन  किसी भी वक़्त किया जा सकता है।

जगह-                                          

ध्यान करने के लिये शान्त, स्वच्छ और सुव्यवस्थित  जगह को चुनें। मेडिटेशन किसी आसान पर, कुर्सी पर या सोफे पर कहीं भी बैठकर किया जा सकता है। परंतु ध्यान देने

वाली बात ये है कि  रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी होनी चाहिये। नीचे पीठ से लेकर, गर्दन तक। ऐसी जगह चुने, जहाँ  आप लम्बे समय तक आराम से बैठ सके। Comfortable feel हो।

अवधि –                                

आरम्भ में मेडिटेशन  का समय 5 मिनट  से 10 मिनट रखें । फिर हर सप्ताह 5 मिनट बढ़ाते जायें। अभ्यास के साथ समय सीमा भी बढ़ती जायेगी।

 मेडिटेशन टिप्स

मेडिटेशन क्या है? ये जानने के बाद कुछ और बातों को भी समझना होगा।

1.भारी व्यायाम के तुरंत बाद  ध्यान ना करें। शरीर थका हुआ नहीं  होना  चाहिये।

2.भोजन करने के 2,3 घन्टे बाद मेडिटेशन करें।आपका पेट भरा हुआ नहीं  होना चाहिये। सुबह खाली पेट मेडिटेशन  करना सबसे अच्छा है।

3.अपने अभ्यास के दौरान, अपने मोबाईल को बन्द कर दें। ताकि आपकी concentration बनी रहे। Disturb ना हों।

4.खुले और आरामदायक वस्त्र का प्रयोग करें।

5. ध्यान करने से पहले, गहरी लम्बी साँस लें।

6.मेडिटेशन की जो भी विधि आपको उपयुक्त लगे, उसका ही अभ्यास करें। बार -बार  अलग विधि को ना करें। मेडिटेशन का सही ज्ञान अति आवश्यक है।

7.ध्यान साधना विधि की और ध्यान केंद्रित करना बहुत ही आवश्यक है।हमेशा याद रखें, ध्यान किया नहीं जाता बल्किध्यान एक अनुभव है, जो हर रोज़ के अभ्यास से महसूस होने लगता है।

ध्यान में आध्यात्मिक अनुभव.

Meditation Kay Hai?

ध्यान, अन्तर्ज्ञान प्राप्त करने की साधना है। Meditation kya hai? इसकी परिभाषा तो जान चुके हैं परंतु इसका लाभ प्राप्त करने के लिये, ध्यान के  चमत्कारिक अनुभव को हर रोज़ के अभ्यास से महसूस करना होगा। ध्यान, आध्यात्मिकता का आधार है। Spirituality में  चार Subject  सिखाते हैं.

ज्ञान-                                                                   

मनुष्य बुद्धि के लिये ज्ञान का होना अति आवश्यक है। हमारा मस्तिष्क विचारों की गंगा है। हम जो भी देखते हैं,सुनते हैं, पढ़ते हैं,

उनका प्रभाव हमारे विचारों पर  पड़ता है। हर तरफ से चाहे  दूरदर्शन हो, फोन हो, अखबार हो या कोई भी माध्यम। नकारात्मकता से विचारों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

जिससे जीवन में  उदासीनता फैलती है।  जो लोग “Meditative life style” अपनाते हैं, वो choose करते हैं,कौनसे विचार ग्रहण करने हैं और कौनसे नहीं।

सात्विक विचार ही Energy का level high रखते हैं। सात्विक का मतलब सिर्फ़ खाने पीने से नहीं  है बल्कि सुनने,पढ़ने,और देखने से भी है।

ध्यान-

विचारों  के सही मार्गदर्शन के लिये, 1 घन्टा रोज़ ज्ञान ग्रहण करना चाहिये। ज्ञान रुपी ऊर्जा को प्राप्त करके, ध्यान लगाना भी  बेहद आवश्यक है जो आत्मा रुपी ऊर्जा में प्रवाहित होता है।

और दिन भर के क्रिया-कलापों  के लिये सम्माहित होता है। Meditative life style में  यही ज्ञान ,ध्यान  में  बहने लगता है जो वास्तविकता से परिचय करवाता है।

धारणा-

ध्यान में होने वाले अनुभव ही धारणा बनते हैं अर्थात हमारे आचरण का हिस्सा बनते हैं। Meditative life style (अर्थात जो मेडिटेशन करते हैं ) में  अपने आचरण पर  ध्यान रखा जाता है।

अपने शब्दों पर  ध्यान रख जाता है, अपने कर्मों पर ध्यान रखा जाता है, अपने देखने, सुनने, बोलने, पढ़ने  हर दिशा में  ध्यान रखा जाता है। ताकि दिनचर्या में  अपनी आत्मा रुपी ऊर्जा को संग्रहीत किया जा सके। उससे बढ़ाया जाए। जिससे हमारे मन की दशा भी संतुलित रहे और जीवन में भी शान्ति बनी रहे।

सेवा-

ध्यान की धारा  जब बहने लगती है, आध्यात्मिकता की परिभाषा भी स्पष्ट होने लगती है। मनुष्य का ज्ञान बस यहाँ तक ही सीमित है कि वह इस  ब्रह्मांड का एक तुच्छ प्राणी है परंतु वह इस ज्ञान से अनभिज्ञ है कि सारा ब्रह्मांड, उसके अंदर ही समाया  हुआ है।

अन्तर्ज्ञान ही आध्यात्मिकता है और ध्यान का आधार भी। उच्च विचारों की पृष्ठभूमि में दया, प्रेम, सहनशीलता, करुणा, सेवा जैसी भावनाएँ जन्म लेती हैं। और जीवन को शान्तिमय और  सुखमय बनती हैं।

 Meditative life style जीने वालों को सात्विक आहार ही ग्रहण  करना चाहिये, शुद्ध शाकाहारी भोजन, शुद्ध पेय पदार्थ, शुद्ध सुनना, शुद्ध बोलना, शुद्ध देखना, शुद्ध विचार, शुद्ध सोचना।

काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार, ये 5 विकार है जो ताम्सिक प्रवृति के हैं। जिसमें भी आपको इं 5 विकारों में  से कोई भी दिखाई दे। तुरंत छोड़ दे।

ध्यान का तेज आपके चेहरे पर दिखेगा जिससे सिर्फ़ आप ही प्रभावित नहीं होंगे बल्कि आपके आस पास का वातावरण, आपके आस पास के लोग भी प्रभावित होंगे।

योग ध्यान/क्रिया-योग का अभ्यास.

Meditation Kay Hai?

योग एक संस्कृत भाषा का शब्द है,जिसका अर्थ होता है जुड़ना ।सरल भाषा में बोले तो योग का अर्थ आत्मा को परमात्मा से जोड़ने से है।

पतंजलि योगदर्शन के अनुसार योग के आठ अंग है क्रमशः यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान तथा समाधि।

1. यम- क्या नहीं करना है- मांसाहार, मदिरापान ,जुआ,पर पुरुष ,पर नारी संग बचाव।

2. नियम-क्या करना चाहिये-

3.साधू संग करना चाहिये।

4.शास्त्र अध्ययन।

5.भगवान के नाम का जप।

6.भगवान को भोग लगाकर ही प्रसाद ग्रहण करना।

विभिन्न योग मुद्राओं में, आसन करना जो स्वयं का निरिक्षण करते हैं। लम्बी गहरी साँस का अभ्यास ,प्राणायाम  से किया जा सकता है। जिससे अपनी मन और इंद्रियों पर काबू रख सकते हैं।

ध्यान ओर धारणा से भगवान के करीब महसूस करते हैं। अन्तर्ज्ञान होता है, संसारिक मोहमाया से दूर। और  इस प्रकार ध्यान को महसूस करके, अपने आचरण से Meditative life style अपनाकर , अभ्यास

से समधि को भी प्राप्त किया जा सकता है। अर्थात एक ऐसी दशा जिसमें सुख हो या दुख मन की परिस्थिति पर कोई प्रभाव नहीं  पड़ता। हर स्थिति में मन शान्त रहता है और वास्तविकताओं को समझ पाता है।

इसी प्रकार महर्षि दत्तात्रेय ने भी योग के चार प्रकार बताए है जो कि निम्न लिखित है-

1.मंत्र योग

 2.लय योग

 3.हठ योग

 4.राज योग

योग मार्ग एक ऐसा मार्ग है जिस पर आप हमेशा आगे बढ़ते है, चाहे मृत्यु ही क्यों न आ जाए। लेकिन अगले जन्म में आप अपनी योग यात्रा उसी जगह से आगे ले जा सकते है न कि फिर

से शरुआत से।Meditation kya hai? वास्तव में योग का मार्ग ही ध्यान तक ले जाता है।  जो आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर होता है।

इसी आधार पर हर प्रकार के योग साधको के लिए विभिन्न योग मार्ग बताए गए हैं|

पतंजलि ने मध्यम श्रेणी के साधको के लिए क्रियायोग का वर्णन किया है | इस योग पद्यति में क्रिया की अधिकता के कारण इसे क्रियायोग का नाम दिया गया है |

क्रियायोग में क्रिया करते करते साधक अक्रिय हो जाता है | इसी बात को भगवद्गीता में श्री कृष्ण भगवान् “कर्मयोग” नाम से कहते हैं| वास्तव में मन को (चित्त) स्थिर और शुद्ध करने के लिए इसे क्रियाशील रखना आवश्यक है|

कहा भी जाता है कि “खाली दिमाग शैतान का घर” अर्थात जो व्यक्ति कोई काम नहीं करता वह बुरे कार्यो की और प्रवृत हो जाता है| इसके विपरीत जो निरन्तन कर्म करता रहता है उसका चित्त शुद्ध और पवित्र रहता है |

क्रियायोग के साधन 

  • तप – शारीरिक क्रिया
  • स्वाध्याय – वाचिक क्रिया
  • ईश्वर प्राणिधान – मानसिक क्रिया

तप – भूख-प्यास, सर्दी- गर्मी, सुख-दुःख, मान-अपमान आदि परिस्थितियों में समान भाव से रहने का अभ्यास करना तप कहलाता है|

अहिंसा, ब्रह्मचर्य का पालन करना शारीरिक तप है।सत्य का पालन करना वाचिक यानी वाणी का तप है।मन मे किसी के लिए द्वेष न रखना और सबके साथ प्रेम-पूर्वक व्यवहार करना, मानसिक तप है।

स्वाध्याय – परमात्मा के पवित्र नाम और महिमा का समरण करना और शास्त्रों तथा अन्य अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करना|

ईश्वर–प्रणिधान – सामान्य अर्थ है – “परमात्मा को समर्पण”| सभी कर्मो के फल की इच्छा का त्याग करके अपने सभी कार्य परमात्मा को समर्पित करना |

क्रिया योग का पालन कोई भी कर सकता है। गुरु के मार्ग दर्शन में भी और स्वयं भी क्रिया योग का अभ्यास किया जा सकता है।

क्रिया योग से शरीर व मन निर्मल बनता है और एक संयमित, सुखी जीवन आप जी सकते है। बल्कि आपके सानिध्य में जो भी आएगा आपके प्रेम, करुणा और निर्मलता से वह भी सुख का अनुभव करेगा।

मेडिटेशन के फायदे.

Meditation Kay Hai?

Meditation kya hai? इसे परिभाषित करने के बाद, अब हम अध्ययन करेंगे कि ध्यान के क्या लाभ हैं।प्रतिदिन ध्यान करने के निम्नलिखित लाभ हैं:

1. नियमित ध्यान आपके शरीर को आराम देता है! यह नकारात्मकता को कम करता है।

 2.ध्यान आपको अपने जीवन में स्थिरता लाने में मदद करता है।

 3. आत्मविश्वास और संयम को बढ़ाता है।

4.जिस प्रकार अवांछित पत्थरों को हटाकर मूर्ति बनाई जाती है, उसी प्रकार ध्यान से अवांछित विचारों को दूर करने में मदद मिलती है और एक सुंदर व्यक्तित्व सबके सामने आता है।

5.ध्यान करने वाले व्यक्ति के पास एक शक्तिशाली आभा होती है, वह दूसरे के जीवन को भी बदल सकता है।

 6. Meditative life style अपने अन्तर्मन की ऊर्जा को संग्रहीत करने में  मदद करता है।

7.आपका जीवन संतुलित हो जाता है। आपकी  कल्पनाशक्ति में सुधार होता है।

8.यह आपको समाधि  जगाने में मदद करता है जो इतनी शक्तिशाली है।

9.बुरे विकारों से दूर रखता है और शांतिमय जीवन प्रदान करता है।

10.बाहरी सुन्दरता को बनाये रखता है। जो मानसिक स्थिति पर भी निर्भर होती है, जो ध्यान के माध्यम से बेहतर होती जाती है।

11.वर्तमान में जीना सिखाता है। इच्छा-शक्ति और मजबूत बनाता है।

12.आपके आचरण में  सुधार लाता है। प्रेम, इंसानियत और दया के भाव पैदा करता है।

13. SPIRITUALITY में भी विश्वास जगाता  है। मन, इंद्रियां और विचारों को नियन्त्रित करना सिखाता है।

Types of meditation (in Hindi)

 आधा अधूरे ज्ञान की वज़ह से लोगों में  भ्रम है कि ध्यान बुज़ुर्ग लोगों का ही काम है। वही पूजा पाठ में लगे रहते हैं । परंतु इन्सान अनजान है कि Meditation kya hai? ध्यान एक साधना है, जिसका ज़िक्र हमारे वेदों, पुराणों में  भी किया गया है। ध्यान कईं प्रकार के होते हैं, हर इन्सान अपनी सहुलियत के हिसाब से कर सकता है..

ज़ेन मेडिटेशन-

यह भी ध्यान की एक विधि है जिसमें अपने अन्तर्मन को एकाग्र करते हैं। अपने unconscious mind को कण्ट्रोल करते हैं।

आध्यात्मिक मेडिटेशन-

ध्यान का अभ्यास आध्यात्मिकता का ही एक भाग है। ध्यान के मार्ग पर चलकर ही आध्यात्मिकता का मार्ग स्पष्ट दिखाई देता है।

माईंडफूलनेस मेडिटेशन-

यह मेडिटेशन भी अपने विचारों और  मन को नियन्त्रित करने में  कारगर सिद्ध होता है।

कुंडलिनीयोग मेडिटेशन-

इस मेडिटेशन में  अपने आन्तरिक भाग में  ध्यान केंद्रित करना होता है।

मन्त्र मेडिटेशन-

मन्त्र मेडिटेशन में  अपना पर ध्यान एक मन्त्र पर  ही केंद्रित किया जाता है जैसे ओम का उच्चारण करना।ध्यान के और भी प्रकार हैं, और भी उपभाग हैं जिनका विस्तृत वर्णन, अगले आर्टिकल में  प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष ( Conclusion)

  Meditation kya hai?  जिसकी परिभाषा को उपरोक्त लिखे हुए शब्दों के ज्ञान से समझतो सकते हैं, परंतु ध्यान , वास्तविक रुप में  एक अनुभव है जो महसूस किया जा सकता है, हमारे ही आचरण में, हमारे ही जीवन में, हमारे ही विचारों में।

ध्यान से ना केवल आत्मज्ञान, आत्म निरीक्षण  और  जीवन को सुधार जा सकता है बल्कि ईश्वर से जुड़ना और आध्यात्मिकता को भी प्रेरणा मिलती है। जो जीवन का मुल है।

ध्यान के अभ्यास से मन, तन ,स्वास्थ्य, विचार, आचरण सभी को सुन्दर बनाया जा सकता है। शांतिमय और सुखमय जीवन का सपना अब कल्पनामात्र  नहीं, हकीकत है।

ध्यान का अभ्यास करें, स्वस्थ रहें, शान्त मन प्राप्त करें।हम आज जो कुछ भी हैं ,वह कल के हमारे विचारों से बनतेहै, और हमारे वर्तमान विचार हमारे कल के जीवन का निर्माण करते हैं।  हमारा जीवन हमारे मन की रचना है।  – बुद्ध

🙏🙏🙏

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