शारदीय नवरात्रि (2023)|  Navratri Mata ke 9 din|navratri puja navratri devi

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शारदीय नवरात्रि (2023):  Navratri Mata ke 9 din.

भारत में मनाये जाने वाले  हर त्यौहार  की अपनी ही महिमा लिखते हैं , हमारे देश के ग्रंथ, पुराण,  वेद इत्यादी।ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से सजी हमारे देश की परम्पराएँ , हर पर्व उत्साह व आनन्द से मनाने की प्रेरणा देते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है! नौ दिन का यह त्यौहार , हिन्दू परम्परा के अनुसार बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है।

Navratri Devi , दुर्गा माँ को समर्पित 9 दिन का त्यौहार किस प्रकार मनाया जाता है?पूजा व व्रत विधि क्या है? इसके पीछे का इतिहास क्या है?

इन्हीं सभी प्रश्नों के जवाब आपको मिलेंगे, इस आर्टीकल के ज़रिये। Navratri Puja  के हर सवाल के जवाब के लिये आप ध्यान से पढ़ें, “शारदीय नवरात्रि 2023” पर  निबंध  जो  सभी धर्मों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में  रखते हुए लिखा गया है। त्रुटि के लिये माफी चाहेंगे।

Navratri Puja (2023)

नवरात्रि नौ दिनों तक चलने वाला एक शुभ त्यौहार है, जो हर साल अलग-अलग भागों में  पूरे भारत में मनाया जाता है।  यह सांस्कृतिक रूप से Navratri devi “दुर्गा” को समर्पित है, जो शक्ति या ब्रह्मांडीय ऊर्जा की अभिव्यक्ति हैं। 

एक वर्ष में पड़ने वाले सभी पांच नवरात्रों (चैत्र, आषाढ़, अश्विन, पौष और माघ) में से शारदीय नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण है।  इसके अलावा, माघ, आषाढ़ और पौष को गुप्त नवरात्रि के रूप में जाना जाता है।

About Shardiya Navratri.

navratri puja navratri devi

शरद नवरात्रि सितंबर/अक्टूबर के महीने में मनाई जाती है।  पूरे देश में नवरात्रि का त्यौहार पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। Mata ke no din में  Navratri  Devi “मां दुर्गा” के 9 रूपों की पूजा की जाती है। 

देवी दुर्गा की प्रत्येक अभिव्यक्ति एक विशिष्ट गुण का उदाहरण है और माना जाता है कि यह आध्यात्मिक और सांसारिक तृप्ति प्रदान करती है।

Shardiya Navratri Dateनवरात्रि 2023 में कब है?

Navratri October 2023 date

पंचांग के अनुसार नवरात्रि का पर्व 15अक्टूबर 2023 से आरंभ होगा! इसे शरद नवरात्रि कहा जाता है! शरद नवरात्रि का पर्व 24 अक्टूबर 2023 को समाप्त होगा!

Kitane Navratri  hote hai?

2023 me kitane navratri hai?

समान्यतौर  पर 9 दिन *Navratri puja की जाती है।

 Navratri Dates  2023

Shardiya Navratri 2023 Date: शायदीय नवरात्रि पूरे देशभर में बड़ी झूमधाम से मानाया जाता है. लोग इसका साल भी इंतजार करते हैं.

नवरात्रि की आते ही त्योहारों की महक चारों ओर फैलने लगती है! शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 रुपों की पूजा की जाती है!

इस साल शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर से शुरु होंगे, इस दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरुपों की आराधना की जाएगी! इस साल नवरात्रि 15 अक्टूबर से शुरु होकर 24 अक्टूबर को दशहरा तक चलेंगे।

 हिंदु धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व हैं। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रचिपदा तिथि तो नवरात्रि का आरंभ होता है, और दशमी तिथि को ये समाप्त हो जाते हैं.

आएये जानते है शारदीय नवरात्रि की लिस्ट.

नवरात्रि में इस दिन करें मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की आराधना

*प्रथम तिथिशैलपुत्री-15 अक्टूबर2023

*द्वितीया तिथिब्रह्मचारिणी -16अक्टूबर 2023

*तृतीया तिथिसिन्दूर चंद्रघंटा-17 अक्टूबर 2023

*चतुर्थी तिथिकुष्मांडा-18 अक्टूबर 2023

*पंचमी तिथिस्कंदमाता-19 अक्टूबर 2023

*षष्ठी तिथिसरस्वती आवाहन,कात्यायनी-20 अक्टूबर 2023

*सप्तमी तिथि-सरस्वती पूजा-कालरात्रि21 अक्टूबर 2023

*अष्टमी तिथि महागौरी-22 अक्टूबर 2023

*नवमी तिथिसिद्धिदात्री-23 अक्टूबर 2023

*दशमी तिथिविजयदशमी24अक्टूबर 2023

Best Navratri in India.

शरद नवरात्रि पहले दिन से शुरू होती है और चंद्र मास के दसवें दिन अश्विन के शुक्ल पक्ष को समाप्त होती है। 

शरद Navratri puja, मां दुर्गा को समर्पित है और विशेष रूप से उत्तरी और पूर्वी भारत में जबरदस्त उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। 

दसवें दिन को अक्सर ‘विजयादशमी’ या ‘दशहरा’ के रूप में जाना जाता है।  शरद नवरात्रि अश्विन या शरद के महीने में मनाई जाती है जो सर्दियों की शुरुआत का संकेत देती है।

About Navratri  Festival.

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 नवरात्रि के त्योहार के दौरान, शहरों और गांवों के लोग घर पर या देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों के प्रतीक मंदिरों में नवरात्रि पूजा करने के लिए एक साथ आते हैं।

Mata ke 9 din के उत्सव के दौरान लगातार नौ दिनों तक मंत्रों के जाप, भजन या पवित्र गीतों के गायन के साथ *नवरात्रि पूजा की रस्में होती हैं।

हिंदू धर्म में मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना गया है!नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा को समर्पित है!*नवरात्रि देवी “मां दुर्गा” के विभिन्न स्वरूपों की पूजा और उपासना की जाती है!

मान्यता है कि नवरात्रि पर मां दुर्गा की विधि पूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है. नवरात्रि के मौके पर मां दुर्गा के भक्त 9 दिनों तक व्रत रखकर मां दुर्गा की भक्ति में लीन रहते हैं!

kaise kare Navratri ki Puja.

Navratri Puja Vidhi.नवरात्री पूजा के प्रथम दिन स्नान आदि के बाद घर में धरती माता, गुरुदेव व इष्ट देव को नमन करने के बाद गणेश जी का आहवान करना चाहिए।

इसके बाद कलश की स्थापना करना चाहिए। कलश में आम के पत्ते व पानी डालें। कलश पर पानी वाले नारियल को लाल वस्त्र या फिर लाल मौली से बांध कर रखें।

उसमें एक बादाम, दो सुपारी, एक सिक्का जरूर डालें। इसके बाद मां सरस्वती, मां लक्ष्मी व मां दुर्गा का आह्वान करें।

जोत व धूप बत्ती जला कर देवी मां के सभी रूपों की पूजा करें। नवरात्र के खत्म होने पर कलश के जल का घर में छींटा मारें और कन्या पूजन के बाद प्रसाद वितरण करें।

देवी पूजन रात्रिकाल में ही क्यूँ करना चाहिये?

Best time for  navaratri puja.शास्त्रों में रात्रि काल में देवी पूजा का विशेष फल माना गया है-`रात्रौ देवीं च पूज्येत्। क्योंकि देवी रात्रि स्वरूपा हैं, जबकि शिव को दिन का स्वरूप माना गया है। इसीलिए नवरात्रि व्रत में रात्रि व्रत का विधान है.

“रात्रि रूपा यतो देवी दिवा रूपो महेश्वरः। रात्रि व्रतमिदं देवी सर्व पाप प्रणाशनम्।।”

 भक्ति और श्रद्धापूर्वक , Navratri  devi की पूजा, दिन और रात्रि में कभी भी की जा सकती है। वस्तुतः शिव और शक्ति में कोई भेद नहीं है। इतना अवश्य याद रखें कि इस समय नौ देवियों की पूजा अवश्य की जानी चाहिए।

Navratri puja में कन्या पूजन का महत्व.

कुवारी कन्याएं माता के समान ही पवित्र और पूजनीय मानी जाती हैं। हिंदू धर्म में दो वर्ष से लेकर दस वर्ष की कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी जाती हैं।

यही कारण है कि *नवरात्रि पूजा में इसी उम्र की कन्याओं का विधिवत पूजन कर भोजन कराया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो की पूजा से भोग और मोक्ष, तीन की अर्चना से धर्म, अर्थ व काम, चार की पूजा से राज्यपद, पांच की पूजा से विद्या, छ: की पूजा से छ: प्रकार की सिद्धि, सात की पूजा से राज्य की, आठ की पूजा से संपदा और नौ की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।

Navratri Vrat Katha.

 एक समय बृहस्पति जी ने ब्रह्माजी के समक्ष चैत्र व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाले नवरात्र का महत्व जानने की इच्छा जताई, इन्होंने कहा इस व्रत का क्या फल है, इसे किस प्रकार किया जाता है?

सबसे पहले इस व्रत को किसने किया? ये सब विस्तार से कहिये। बृहस्पतिजी के प्रश्नों का जवाब देते हुए ब्रह्माजी ने कहा- हे बृहस्पते! प्राणियों के हित की इच्छा से तुमने बहुत अच्छा प्रश्न किया है।

जो इंसान मनोरथ पूर्ण करने वाली मां दुर्गा, महादेव, सूर्य और नारायण का ध्यान करता है, वे धन्य है। यह  “Navratri vrat vidhi ” संपूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाला है।

 व्रत को करने से पूर्व ,Katha navratri ki बहुत जरूरी ताकि इस परम कल्याणकारी उत्सव की पवित्र कथा को जाना जाए। इस पर्व से संबंधित कई कथाएं प्रचलन में है ….

प्रथम कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध करके देवताओं को उसके कष्टों से मुक्त किया था।

महिषासुर ने भगवान शिव की आराधना करके अद्वितीय शक्तियां प्राप्त कर ली थीं और तीनों देव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु व महेश भी उसे हराने में असमर्थ थे। महिषासुर राक्षस के आंतक से सभी देवता भयभीत थे।

उस समय सभी देवताओं ने अपनी-अपनी शक्तियों को मिलाकर *नवरात्रि देवी दुर्गा को अवतरि‍त किया। अनेक शक्तियों के तेज से जन्मीं, माता दुर्गा ने महिषासुर का वध कर सबके कष्टों को दूर किया।

द्वितीय कथा

एक नगर में एक ब्राह्माण रहता था। वह मां भगवती दुर्गा का परम भक्त था। उसकी एक कन्या थी। ब्राह्मण नियम पूर्वक प्रतिदिन दुर्गा की पूजा और यज्ञ किया करता था।

सुमति अर्थात ब्राह्माण की बेटी भी प्रतिदिन इस पूजा में भाग लिया करती थी। एक दिन सुमति खेलने में व्यस्त होने के कारण भगवती पूजा में शामिल नहीं हो सकी।

यह देख उसके पिता को क्रोध आ गया और क्रोधवश उसके पिता ने कहा कि वह उसका विवाह किसी दरिद्र और कोढ़ी से करेगा।

पिता की बातें सुनकर बेटी को बड़ा दुख हुआ, और उसने पिता के द्वारा क्रोध में कही गई बातों को सहर्ष स्वीकार कर लिया। कई बार प्रयास करने से भी भाग्य का लिखा नहीं बदलता है।

अपनी बात के अनुसार उसके पिता ने अपनी कन्या का विवाह, एक कोढ़ी के साथ कर दिया। सुमति अपने पति के साथ विवाह कर चली गई।

उसके पति का घर न होने के कारण उसे वन में घास के आसन पर रात,बड़े कष्ट में बितानी पड़ी।गरीब कन्या की यह दशा देखकर माता भगवती उसके द्वारा पिछले जन्म में किये गये , पुण्य प्रभाव से प्रकट हुईं और सुमति से बोलीं ‘हे कन्या मैं तुम पर प्रसन्न हूं’,”मैं तुम्हें कुछ देना चाहती हूँ , मांगों क्या मांगती हो?”

इस पर सुमति ने उनसे पूछा कि आप मेरी किस बात पर प्रसन्न हैं? कन्या की यह बात सुनकर देवी कहने लगी- “मैं तुम पर पूर्व जन्म के तुम्हारे पुण्य के प्रभाव से प्रसन्न हूं, तुम पूर्व जन्म में भील की पतिव्रता स्त्री थी।”

एक दिन तुम्हारे पति भील द्वारा चोरी करने के कारण तुम दोनों को सिपाहियों ने पकड़ कर जेलखाने में कैद कर दिया था। उन लोगों ने तुम्हें और तुम्हारे पति को भोजन भी नहीं दिया था।

इस प्रकार Navratri puja के दिनों में तुमने न तो कुछ खाया और न ही जल पिया इसलिए नौ दिन तक नवरात्री व्रत का फल तुम्हें प्राप्त हुआ।

हे ब्राह्मणी, उन दिनों अनजाने में जो व्रत हुआ, उस व्रत के प्रभाव से प्रसन्न होकर आज मैं तुम्हें मनोवांछित वरदान दे रही हूं। कन्या बोली कि अगर आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो कृपा करके मेरे पति का कोढ़ दूर कर दीजिये।

माता ने कन्या की यह इच्छा शीघ्र पूरी कर दी। उसके पति का शरीर माता भगवती की कृपा से रोगहीन हो गया। और  तब से Navratri puja की जाने लगी।

IS NAVRATRI AND DASSEHRA SAME?

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इस सवाल का जवाब भी इसी पौराणिक कथा में  निहित है। ध्यान से पढियेगा।

 रामायण के एक प्रसंग के अनुसार भगवान श्री राम, लक्ष्मण, हनुमान व समस्त वानर सेना द्वारा आश्चिन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिनों तक माता शक्ति की उपासना कर,दशमी तिथि को लंका पर आक्रमण  किया था।

भगवान राम ने रावण का वध करके विजय प्राप्त की। सीता माता को रावण के चंगुल से छुड़ाया। इसलिये दशमी तिथि को अच्छाई पर  बुराई की विजय के रुप में  मनाया जाता है जिसे “विजयदशमी” अर्थात दशहरा कहा जाता है।

इस तरह नवरात्रों में माता दुर्गा की पूजा करने की प्रथा के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं जिसके बाद से ही नवरात्रि का पर्व आरंभ हुआ और Navratri devi दुर्गा की पूजा होने लगी! और रामायण की कथा के अनुसार दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाने लगा।

Navratri Aarti

Navratri puja में  आखिर में  सबसे पहले गणेश जी की आरती की जाती है और  फिर माँ दुर्गा की आरती ” जय अम्बे गौरी “ की जाती है।

How to  break Navratri  Fast.

हिंदू त्योहारों में Navratri Puja विशेष रुप से साल में दो बार की जाती है।  देवी को प्रसाद चढ़ाने के अलावा, भक्तों के लिए अनुष्ठान करना भी पूजन का एक भाग है।

 नवरात्रि पूजा को  कुछ लोग सभी नौ दिनों में उपवास करते हैं, कुछ भक्त केवल नवरात्रि के पहले और आखिरी दिन उपवास करते हैं।

How to do Navratri  Fast?

NAVRATRI UPVAS FASTING RULES.

उपवास के दौरान, भक्त सात्विक आहार पर ध्यान देते हैं और मांसाहारी भोजन को पूरी तरह से छोड़ देते हैं।  केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन करने की अपेक्षा की जाती है और उपवास के लिए भोजन को बिना प्याज और लहसुन के पकाया जाना चाहिये और यहां तक ​​कि नियमित नमक के उपयोग से भी पूरी तरह से बचा जाता है और केवल सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है।

लोग उपवास के दौरान शराब, मांस, प्याज, लहसुन आदि से परहेज क्यों करते हैं? इसका वैज्ञानिक तर्क है। 

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार, ऐसे खाद्य पदार्थ नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और इसलिए, इनसे बचना चाहिए क्योंकि इस मौसम में हमारे शरीर में पहले से ही कम प्रतिरक्षा क्षमता होती है।

 उपवास के दौरान, उपवास-अनुमोदित सामग्री जैसे साबूदाना , कुट्टू का आटा,मखाना  आदि का प्रयोग किया जाता है।

अक्सर व्रती सुबह से शाम तक तो भूखे रहते हैं लेकिन सांयकाल को या रात को वह अधिक खा लेते हैं जिससे कई तरह की परेशानियां खड़ी होने की आशंका रहती है. इसके साथ ही व्रत के दौरान खान पान की बाहर बिकने वाली चीजों में भी जमकर मिलावट देखने को मिलती है।

इसलिये घर में  बने शुद्ध भोजन का उपभोग करना ही बेहतर है।इन सब के साथ व्रत के दौरान कुछ और सावधानियां बरती जानी चाहिए जिसमें से कुछ निम्न हैं.

Do and don’ts in Navratri Vrat? (In hindi)

नवरात्र व्रत के दौरान क्या ना करें

जो किसी भी बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें व्रत रखने में विशेष सावधानी रखनी चाहिए! खासतौर से उन महिलाओं को जिनका कम वजन है अथवा गर्भवती हैं, इसके अलावा हृदय रोग व मधुमेह से पीड़ित लोगों को भी विशेष सावधानी की जरूरत होती है!

निर्जला उपवास न रखें. इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और अपशिष्ट पदार्थ शरीर के बाहर नहीं आ पाते। इससे पेट में जलन, कब्ज, संक्रमण, पेशाब में जलन जैसी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

व्रत के दौरान जो लोग दवाई का प्रयोग कर रहे हैं। वह वसा वाले ड्राई फ्रूट्स व तली भुनी चीजें लेने से परहेज करें।यदि संभव हो सके तो थोड़े-थोड़े अंतराल पर कुछ खाते रहें।

Benefits of Navratri Fasting.

Mata ke 9 din उपवास, एक तरफ जहां आस्था से जुड़ा होता है वहीं शरीर के लिए भी लाभदायक होता है. क्योंकि दूषित व भारी खानपान से 90% लोग पेट की बीमारियों से पीड़ित हैं।

व्रत के दौरान एक तरफ जहां शरीर में अनावश्यक व हानिकारक तत्व नष्ट होते हैं, वहीं शरीर में पाचन क्षमता भी बढ़ जाती है। ऐसे में व्रत रखने से फायदा ही होता है।

Can we eat in Navratri  Fasting?

अगर आप भी नवरात्र के व्रत का सही तरह से फायदा उठाना चाहते हैं तो कुछ निम्न बिंदुओं को ध्यान में रखें खानपान में घर में तैयार चीजों का ही प्रयोग करें।अधिक से अधिक तरल पदार्थ लें।

दूध व दूध से बनी चीजों का प्रयोग अधिक करें।

सेब अनार, केला, साबूदाना की खीर, खजूर, छुहारा आदि चीजों का प्रयोग करें।

एक साथ अधिक पानी पीने के बजाए थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहें।

लौकी, परवल व आलू का प्रयोग फलाहार के रूप में कर सकते हैं।

यदि मधुमेह से पीड़ित हैं तो शुगर फ्री चीजों का प्रयोग करें।

सिंघाड़े के आटे से बनी हुई चीजें भी शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देंगी।

व्रत के शुरुआत में भूख काफी लगती है। ऐसे में पानी में नींबू और शहद डालकर पिएं।इससे भूख को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।

साथ ही, हम यह कामना भी करें कि नवरात्री पूजा, सभी साधकों के लिए उज्ज्वल संभावनाएं लेकर आए! ईश्वर गलत मार्ग पर चलने वाले व्यक्तियों को सद्बुद्धि प्रदान करें, ताकि वे कुमार्ग का त्याग कर सन्मार्ग पर चलें!

नवरात्र की नौ देवियां (NAVARATRI GODDESS)

नवरात्रपर्व (Navratri Festival) के दिनों में देवी मां के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।मातादुर्गाके 9 रूपों की साधना करने से भिन्न-भिन्न फल प्राप्त होते हैं।कई साधकअलग-अलगतिथियों को जिस देवी की तिथि हैं, उनकी साधना करते हैं।आइए जानें कि हर दिन किस मंत्र से करें देवी आराधना.

 

पहले दिन: माता शैलपुत्री.

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नवरात्री पूजा के प्रथम दिन को शैलपुत्री  देवी की आराधना की जाती है! पुराणों में यह कथा प्रसिद्ध है कि हिमालय के तप से प्रसन्न होकर आद्या शक्ति उनके यहां पुत्री के रूप में अवतरित हुई और इनके पूजन के साथ नवरात्र का शुभारंभ होता है!

*Navratri puja  के पहले दिन इनका पूजन-जप किया जाता है। मूलाधार में ध्यान कर इनके मंत्र को जपते हैं। धन-धान्य-ऐश्वर्य, सौभाग्य-आरोग्य तथा मोक्ष के देने वाली माता मानी गई हैं। 

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:।’

दूसरे दिन: माता ब्रह्मचारिणी.

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भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए पार्वती की कठिन तपस्या से तीनों लोक उनके समक्ष नतमस्तक हो गए। देवी का यह रूप तपस्या के तेज से ज्योतिर्मय है। इनके दाहिने हाथ में मंत्र- जपने की माला तथा बाएं में कमंडल है।

स्वाधिष्ठान चक्र में ध्यान कर इनकी साधना की जाती है। संयम, तप, वैराग्य तथा विजय प्राप्ति की दायिका हैं।

मंत्र- ‘ॐऐंह्रीं क्लींब्रह्मचारिण्यै नम:।’

तीसरेदिन: माताचंद्र घंटा

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यह देवी का उग्र रूप है।इनके घंटे की ध्वनि सुनकर विनाशकारी शक्तियां तत्काल पलायन कर जाती हैं। व्याघ्र पर विराजमान और अनेक अस्त्रों से सुसज्जित मां चंद्रघंटा भक्त की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहती हैं।

मणिपुर चक्र में इनका ध्यान किया जाता है। कष्टों से मुक्ति तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए इन्हें भजा जाता है।

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघंटायै नम:।’

चौथे दिन: माता कूष्मांडा.

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Mata ke no din में , चौथे दिन भगवती के इस अति विशिष्ट स्वरूप की आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इनकी हंसी से ही ब्रह्माण्ड उत्पन्न हुआ था।

अष्टभुजी माता कूष्मांडा के हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत-कलश, चक्र तथा गदा है।इनके आठवें हाथ में मनोवांछित फल देने वाली जपमाला है।

अनाहत चक्र में ध्यान कर इनकी साधना की जाती है। रोग, दोष, शोक की निवृत्ति तथा यश, बल व आयु की दात्री मानी गई हैं।

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नम:।’

पांचवे दिन: माता स्कंदमाता.

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नवरात्रि पूजा की पंचमी तिथि को भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है। देवी के एक पुत्र कुमार कार्तिकेय  हैं, जिन्हें देवासुर-संग्राम में देवताओं का सेनापति बनाया गया था।

इस रूप में देवी अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए बैठी होती हैं। स्कंदमाता अपने भक्तों को शौर्य प्रदान करती हैं।

इनकी आराधना विशुद्ध चक्र में ध्यान कर की जाती है। सुखशांति मोक्ष की दायिनी हैं। 

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमातायै नम:।’

छठे दिन: माता कात्यायनी.

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कात्यायन ऋषि की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवती उनके यहां पुत्री के रूप में प्रकट हुई और कात्यायनी कहलाई।

कात्यायनी का अवतरण, महिषासुर वध के लिए हुआ था। यह देवी अमोघ फलदायिनी हैं।भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने देवी कात्यायनी की आराधना की थी।

आज्ञा चक्र में ध्यान कर इनकी आराधना की जाती है। भय, रोग, शोकसंतापों से मुक्ति तथा मोक्ष की दात्री हैं।

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायनायै नम:।’

सातवें दिन: माता कालरात्रि.

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Navratri puja के सातवें दिन सप्तमी को कालरात्रि की आराधना का विधान है!यह भगवती का विकराल रूप है!

गर्दभ (गदहे) पर आरूढ़ यह देवी अपने हाथों में लोहे का कांटा तथा खड्ग (कटार) भी लिए हुए हैं! इनके भयानक स्वरूप को देखकर विध्वंसक शक्तियां पलायन कर जाती हैं!

ललाट में ध्यान किया जाता है। शत्रुओं का नाश, कृत्या बाधा दूर कर साधक को सुखशांति प्रदान कर मोक्ष देती हैं।

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम:।’

आठवें दिन: मातामहागौरी (Eighth day of Navratri).

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नवरात्री पूजा की अष्टमी को महागौरी की आराधना का विधान है। यह भगवती का सौम्य रूप है। यह चतुर्भुजी माता वृषभ पर विराजमान हैं।

इनके दो हाथों में त्रिशूल और डमरू है। भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए भवानी ने अति कठोर तपस्या की,तब उनका रंग काला पड गया था। तब शिव जी ने गंगाजल द्वारा इनका अभिषेक किया तो यह गौरवर्ण की हो गई। इसीलिए इन्हें गौरी कहा जाता है।

मस्तिष्क में ध्यान कर इनका जप किया जाता है। इनकी साधना से अलौकिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं। असंभव से असंभव कार्य पूर्ण होते हैं।

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:।’

नौवे दिन : माता सिद्धिदात्री.

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Navratri puja के अंतिम दिन नवमी को भगवती के सिद्धिदात्री स्वरूप का पूजन किया जाता है!इनकी अनुकंपा से ही समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं!

अन्य देवी-देवता भी मनोवांछित सिद्धियों की प्राप्ति की कामना से इनकी आराधना करते हैं!मां सिद्धिदात्री चतुर्भुजी हैं!अपनी चारों भुजाओं में वे शंख, चक्र, गदा और पद्म (कमल) धारण किए हुए हैं!

कुछ धर्मग्रंथों में इनका वाहन सिंह बताया गया है! परंतु माता अपने लोक प्रचलित रूप में कमल पर बैठी (पद्मासना) दिखाई देती हैं! सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्र में नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान पूर्ण हो जाता है!

मध्य कपाल में इनका ध्यान किया जाता है। सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं।

मंत्र– ‘ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्यै नम:

दसवां दिन : दशमी ( दशहरा).

Mata ke no din  बाद दशहरा  मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम ने रावण पर  विजय प्राप्त की थी।

नव ग्रहों की पूजा

नवरात्र पर्व (Navratri Festival) में *Navratri  devi के पूजन के माध्यम से नवग्रह शांति भी होती है! देवी के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा के माध्यम से क्रमश: नौ ग्रहों सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु की शांति होती है!

आइए, नवरात्र के अवसर पर हम जगत माता देवी दुर्गा से यह प्रार्थना करें :

सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:.

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दु:ख भाग्यवेत्.”

In which state Navratri is celebrated?

Navratri 2023: देश के अलगअलग राज्यों में कुछ इस तरह मनाया जाता है नवरात्रि का त्यौहार (Navratri 2023): 

भारत एक ऐसा देश है, जहां ढेर सारे त्यौ हार मनाए जाते हैं।जिस तरह से देश के हर राज्य की अपनी अलग संस्कृति और सभ्यता है, ठीक उसी तरह किसी भी त्यौ हार को मनाने का हर राज्य का अपना अलग ही अन्दाज़  है।

अलग-अलग होने के बावजूद, यह सभी त्योहार हमें हर साल ढेरों खुशियां देकर जाते हैं। भारत में की जाने वाली  navratri puja से सारा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। अलग अलग परम्पराओं से होकर गुज़रता नवरात्रि का पर्व देश की एकता को बनाये रखता है।

नवरात्रि 9-दिवसीय त्योहार है जो देवी माँ और उनके विभिन्न रूपों जैसे सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा और जैसे कई और रूपों को समर्पित है।

ये देवी अलग-अलग गुणों का प्रतिनिधित्व करती हैं और इनकी 9 अलग-अलग दिनों में पूजा की जाती है।पूरे देश में ये 9 दिन अलग-अलग तरह से मनाए जाते हैं।आइए जानते हैं कैसे देश के अलग-अलग राज्यों में *नवरात्रि देवी का त्योहार मनाया जाता है.

. नई दिल्ली

भारत की राजधानी नई दिल्ली में नवरात्रि के उत्सव को बहुत विविध रूप से मनाया जाता है।इस त्यौहार को मनाने के लिए सभी क्षेत्रों के लोग एक साथ आते हैं।

त्यौहार के 9 दिनों में सभी अलग-अलग अनुष्ठान एक साथ करते हैं।दिल्ली एक ऐसा शहर है, जहाँ बड़ी संख्या में बंगाली लोग रहते हैं।

इस वजह से यहां *Navratri devi “दुर्गा” पूजा का आयोजन भी बड़े ही भव्य तरीके से किया जाता है। इसके अलावा पूरे शहर में रामलीला का प्रदर्शन किया जाता है। रामलीला में रामायण की कहानी का मंचन किया जाता है।

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में नवरात्रि समारोह नई शुरुआत का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें महिलाएं तांबे या पीतल के घड़े में पानी भरकर उसे चावल के एक ढेर पर रखती हैं, जिसे लकड़ी की मेज पर रखा जाता है और उसके बगल में एक दीपक जलाया जाता है। जो ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है. घड़ा कृषि-कल्याण का प्रतीक है।

गुजरात  

नवरात्रि  गरबा (Navratri  garba)और डांडिया गुजरात में  मुख्य कार्यक्रम हैं, यहां के लोग इस त्यौहार को बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं।

“Navratri Puja” Gujrat का प्रसिद्ध पर्व है। भक्त गार्बो नामक एक प्रतीकात्मक मिट्टी के बर्तन की पूजा करते हैं, जो पूरे ब्रह्मांड में एक परिवार का प्रतिनिधित्व करता है और एक दीपक जो बर्तन के बगल में जलाया जाता है।

डांडिया लोक नृत्य है, जो पूरे राज्य में बहुत विख्यात है।इसमें महिलाएं और पुरुष सभी हाथ में दो छोटी डंडियों को लेकर समूह में पारंपरिक परिधान पहनकर नृत्य करते हैं।

यह त्यौहार नौ रातों और दस दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा करने और गुजरात के लोक नृत्यों गरबा और डांडिया का आनंद लेने के लिए मनाया जाता है। 

Navratri Jewellery/Navratri dress

पुरुषों के साथ महिलाएं रंगीन चनिया-चोली और केडियुस के साथ-साथ ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी पहनती हैं, जिसे नवरात्रि ज्वैलरी के नाम से जाना जाता है।

रंग बिरंगे लहंगे और  सम्पूर्ण गहनों के साथ महिलाएं सजती हैं। गोल दायरे में  सब स्त्री पुरुष मिलकर गार्ब और  डांडिया का लुत्फ़ उठते हैं।एक अलग ही अंदाज है गुजरात का।

पंजाब

Do Punjabi celebrate Navratri?

 पंजाब में *नवरात्रि पूजा मनाने का एक अलग ही तरीका है!   पंजाब में नवरात्रि कोआपकी कल्पना से बहुत अलग अंदाज से मनाया जाता है। 

पहले सात दिनों के लिए महिलाएं आमतौर पर उपवास करती हैं और *नवरात्रि देवी से प्रार्थना करती हैं और जागरण में भाग लेती हैं, जो भजनों के जाप और भक्ति गीत गाने का एक रात भर का उत्सव है। 

और आठवें और नौवें दिन व्रत तोड़ा जाता है और नौ लड़कियों को देवी दुर्गा के नौ रूपों के रूप में पूजा जाता है।

पश्चिम बंगालअसम और बिहार

(Is navratri  and Durga Puja same?)

इन राज्यों में नवरात्रि का त्योहार दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है, जो पश्चिम बंगाल का मुख्य त्योहार है!सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी नवरात्रि के अंतिम चार दिन हैं, जिन्हें पूर्वी भारत में  बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।

दुर्गा पूजा पूरे राज्य में एक भव्य पैमाने पर मनाया जाता है। जिसमें कुछ विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और माँ दुर्गा की प्रार्थना की जाती है।

Do Bengali eat Fish in Navratri?

*Navratri puja, बंगाल में  दुर्गा पूजा के रुप में  मनाया जाता है। जहाँ  बड़े बड़े अनुष्ठान किये जाते हैं। मांसाहारी व्यंजन भी बनाये जाते हैं। चिकन, मटन, fish, सब बनाया जाता है और प्रसाद के रुप में  भंडारा किया जाता है।

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश में नवरात्रि का उत्सव दसवें दिन होता है, जिसे कुल्लू दशहरा के रूप में जाना जाता है, जो अयोध्या में भगवान राम की वापसी का प्रतीक माना जाता है।

यह उत्तर में नवरात्रि समारोहों का हिस्सा है और कुल्लू घाटी में प्रसिद्ध है।इस दौरान घाटी को चमकदार रंगों के साथ सजाया जाता है।

वहाँ देवी की मूर्तियों के साथ एक विशाल जुलूस निकाला जाता है और ब्यास नदी के किनारे लंकादहन के प्रसिद्ध प्रदर्शन के बाद कुछ नृत्य और अनुष्ठान किए जाते हैं।

केरल

Is navratri celebrated in south India?

यह राज्य नवरात्रि पूजा को देवी सरस्वती के सम्मान के रूप में मनाता है!इन नौ दिनों को केरल में सबसे शुभ माना जाता है और यहां हर दिन कुछ नया किया जाता है।

त्यौहार के आखिरी तीन दिनों में केरल में लोग सरस्वती की पूजा करते हैं और उनकी मूर्ति या छवि के सामने किताबें रखते हैं।

तमिलनाडु

(Do Tamils best for navratri?Do tamils celebrate  *Navratri puja?)

Navratri puja के दौरान तमिलनाडु में गुड़ियों का एक प्रसिद्ध त्यौहार मनाया जाता है, जिसे बोम्मई कोलू के नाम से भी जाना जाता है! इन गुड़ियों में विभिन्न विषयों के अनुसार देवता, देवी, पक्षी, किसान शामिल होते हैं!

Colours of  Navratri puja.

बहुत सारे लोग हैं जो जानना चाहते हैं कि Mata ke no din में किस रंग के कपड़े पहनने चाहिए? Navratri puja का प्रत्येक दिन एक शुभ रंग का होता है, जो देवी के सभी अवतारों को समर्पित होता है।  आप संबंधित रंग पहनकर त्योहार के दिनों को और खास बना सकते हैं। 

आइए नजर डालते हैं Navratri 2023के 9 रंगों पर:

 Day 1: पीला(YELLOW)

 यह दिन शैलपुत्री को समर्पित है, जो प्रकृति का प्रतीक है और इस दिन का विशेष रंग पीला है।  यह रंग खुशी और खुशी का प्रतीक है।

Day 2: हरा (GREEN)

 दूसरा दिन ब्रह्मचारिणी का सम्मान करता है और आध्यात्मिक ज्ञान को समर्पित है।  इस दिन हरे रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए।

 Day 3: ग्रे(GREY)

 *Navratri puja के तीसरे दिन आपको Grey रंग पहनना चाहिए।  यह दिन देवी चंद्रघंटा को समर्पित है, जो अपने माथे पर अर्धचंद्र रखती हैं।

Day 4: नारंगी (ORANGE)

यह दिन *Navratri  devi कुशमांडा को समर्पित है।  चमक, खुशी और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करने के लिए इस दिन नारंगी रंग पहनना चाहिए।

 Day5: सफेद(WHITE)

 यह दिन माँ स्कंदमाता को समर्पित है।  यह दिन पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है और व्यक्ति को सफेद रंग पहनना चाहिए।

Day 6: लाल(RED)

इस दिन देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है और इस दिन  लाल रंग के वस्त्रों का उपयोग करना चाहिये।  रंग शत्रुओं के प्रति देवी के क्रोध का प्रतिनिधित्व करता है।

 Day 7:  नीला (BLUE)

 इस दिन देवी कालरात्रि का सम्मान किया जाता है।  देवी की अपार शक्ति को गहरे नीले रंग से दर्शाया गया है।

 Day 8: गुलाबी(PINK)

 आठवां दिन(Eighth navratri) माँ महागौरी को समर्पित है।  इस दिन आपको गुलाबी रंग पहनना चाहिए, जो आशा, आत्म-शोधन और सामाजिक उत्थान का प्रतिनिधित्व करता है।

 Day 9: बैंगनी(PURPLE)

*Navratri puja का अंतिम दिन, माता सिद्धिदात्री को समर्पित है।  देवी ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं और सबकी की इच्छाओं को पूरा करती हैं।  इस दिन का रंग बैंगनी है, जो आकांक्षा और शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।

इस वर्ष 2023 की *Navratri puja में नौ दिन शरद नवरात्रि में शुभ रंग के वस्त्र धारण करें और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करें।  वह सर्वशक्तिमान और सर्वोच्च देवी हैं जिन्होंने सभी को सुख और शक्ति का आशीर्वाद दिया।

Navratri  Decorations.

दीयों  से सजावट

*नवरात्रि पूजा के प्रथम दिन आप देवी का स्वागत जगमगाते दीयों से करें। दीये की चमक और खूबसूरती आपके घर और मंदिर को रौशन कर देगी।

दीयों से घर और मंदिर को सजाना सबसे आसान और खूबसूरत तरीका है। रंगोली या फूलों की सजावट के बीच ये दीये रखने से सजावट में चार चांद लग जाएंगे।

अलग अलग फूलों से सजावट

फूल के बिना तो कोई भी सजावट अधूरी लगती है और जहां बात *नवरात्रि देवी की पूजा की हो वहां फूलों का महत्व और बढ़ जाता है।

सुगंधित फूलों की खूशबू और उनकी खूबसूती मन को ईश्वर से जोड़ने का काम करती है। फूल विनम्रता और पवित्रता के प्रतीक  हैं। 

घर के मुख्यद्वार पर फूलों का तोरण बनाएं और मंदिर को भी फूलों से सजाएं। देवी की जहां प्रतिमा रखेंगे वहां गुलाब के फूलों से एक कालीन बना लें। हवा में जब इन फूलों की खूशबू बिखरेगी तो मन अपने आप श्रद्धा से भर जाएगा।

लालटेन से सजावट करें

रोशनी सजावट को पूर्ण करती है। आप चाहे तों अपने घर में रंग-बिरंगे कुछ लालटेन ले आएं। घर और मंदिर को सजाने का सबसे खूबसूरत तरीका ये हो सकता है।

मुख्यद्वार, छत या मंदिर के पास इस लालटेन को टांगें। । इसमें आप दीप या सुगिंधित कैंडल रख कर सजावट को पूर्णता प्रदान कर सकते हैं।

एलईडी लाइट्स से सजावट करें

जगमगाती छोटी-छोटी रोशनियों वाली एलईडी लाइट्स भी आप सजावट के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इन्हें किसी कांच की बोतल में डाल कर भी आप प्रयोग करसकते हैं या एक झूमर बना कर उसमें इन लाइट्स को लगा दें। इनकी रौशनी जब बाहर आती है तो मन खिल उठता है। 

मिट्टी के सजावटी सामान

सजावट के लिए मिट्टी के सजावटी समान का प्रयोग करें। इसके लिए मिट्टी के बड़े टब नुमा बर्तन में फ्लोटिंग कैंडल, फ्लोटिंग फ्लावर पेटल्स आदि का प्रयोग करें।

चाहें तो इनमें फूलों, रंगीन पानी डाल कर घर या मंदिर के सामने रख दें। मिट्टी के कई सजावटी समानों का प्रयोग भी आप कर सकते हैं। 

Navratri Rangoli से सजावट

*Navratri puja मे  रंगोली केवल सजावट के लिए ही नहीं होती, बल्कि रंगोली स्वागत करने का एक तरीका भी है।

इसलिए Navratri devi के आगमन पर रंगोली अपने घर के मुख्यद्वार और मंदिर पर जरूर बनाएं। रंगोली त्योहार का अहसास कराती है। आप रंगोली रंग, फूल, दीप, दाल या चावल आदि से सुन्दर रंगोली सजा सकते हैं।

रंगीन पेपर से बनाएं झालर

घर या मंदिर की सजावट का एक खास और परंपरिक तरीका है रंगीन कागजों से बने झालर। आप कागज से लालटेन, तोरण, झूमर आदि बनाकर भी घर-मंदिर को सजा सकते हैं। 

देवी के आगमन का स्वगात आप खुद के बनाए सजावटी चीजों से जब करेंगे तो आपके मन में त्यौहार और नवरात्रि देवी के प्रति भक्ति और बढ़ेगी। 

Is navratri good for grih parvesh( गृह प्रवेश)?

ऐसा माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में घर में प्रवेश करने से जीवन आसान हो जाता है और नए घर में जाने के बाद परिवार के लिए कम से कम संघर्ष करना पड़ता है। 

ऐसे मुहूर्त के लिए सबसे अनुकूल दिन वसंत पंचमी, अक्षय तृतीया, गुड़ी पड़वा, गणेश चतुर्थी, Navratri puja, दशहरा  हैं, जबकि उत्तरायण, होली, अधिकमा और श्राद्ध पक्ष जैसे दिनों से बचना चाहिए। 

 दशहरे पर किए गए शुभ काम के  लिए शुभ समय की भी आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि इस दिन का हर पल शुभ माना जाता है।  गृह प्रवेश से पहले, आमतौर पर कलश पूजा की जाती है।

 इस अनुष्ठान के लिए एक तांबे के बर्तन में पानी भरकर उसमें नौ प्रकार के अनाज और एक सिक्का रखा जाता है।  एक नारियल को बर्तन पर रखा जाता है और एक पुजारी द्वारा मंत्र जाप के साथ उसके साथ घर में प्रवेश किया जाता है।

गृह प्रवेश करने के लिए क्या करें और क्या न करें?

गृहप्रवेश तभी करना चाहिए, जब नया घर परिवार के  रहने के लिए तैयार हो।  “घर को पूरी तरह से तैयार किया जाना चाहिए।  इसे नए सिरे से रंगा जाना चाहिए और छत तैयार होनी चाहिए । 

 “वास्तु पुरुष और अन्य देवताओं की पूजा की जाती है।  मुख्य द्वार (जो घर में समृद्धि और अच्छे वाइब्स के लिए प्रवेश बिंदु है)

को दहलीज पर खींचे गए स्वास्तिक और लक्ष्मी के चरणों जैसे शुभ प्रतीकों से सजाया जाना चाहिए।  एक तोरण( जो ताजे आम के पत्तों और गेंदे के फूलों से बना होता है )को द्वार पर लटका दिया जाना चाहिए। 

घर में मंदिर उत्तर-पूर्व क्षेत्र में होना चाहिए और घर के गर्म होने के दिन तय किया जाना चाहिए । गृह प्रवेश समारोह घर के मालिक के आधार पर सरल या विस्तृत हो सकता है। 

आमतौर पर, एक हवन किया जाता है, जिससे अंतरिक्ष को शुद्ध करने के लिए नकारात्मक शक्तियों को साफ किया जाता है। 

एक गणेश पूजा, नवग्रह शांति, जिसका अर्थ है नौ ग्रहों की पूजा और एक वास्तु पूजा, आम तौर पर की जाती है।  पुजारियों और परिवार और दोस्तों को भी भोजन देना चाहिए, जिन्हें इस दिन आमंत्रित किया जाता है। 

एक बार गृह प्रवेश समारोह हो जाने के बाद, मालिक नए घर में जा सकते हैं।  साथ ही वास्तु विशेषज्ञों की सलाह है कि गृह प्रवेश पूजा के बाद अगले 40 दिनों तक परिवार का कम से कम एक सदस्य हर समय घर पर मौजूद रहना चाहिए और घर को बंद और खाली नहीं रखना चाहिए।

गृह प्रवेश के लिए टिप्स.

 *गृहप्रवेश हमेशा शुभ दिन पर करें।  *मूर्तियों को घर की पूर्व दिशा में रखना चाहिए।

 *पूजा से पहले घर को अच्छी तरह साफ कर लें।  उस स्थान को  शुद्ध करने के लिए फर्श को नमक के पानी से पोछें।  इसे नमक, नींबू के रस और सफेद सिरके के मिश्रण से भी धो सकते हैं।

* घर में प्रवेश करते समय हमेशा अपना दाहिना पैर पहले रखें।

 *मुख्य द्वार को सजाया जाना चाहिए, क्योंकि इसे सिंह द्वार कहा जाता है और यह वास्तु पुरुष का चेहरा है।  दरवाजे को आम के पत्तों और ताजे फूलों से सजाएं। 

*इसके दोनों सिरों पर स्वस्तिक, गो-पद्म,कमल या कोई अन्य आध्यात्मिक प्रतीक होना चाहिए।

* फर्श को चावल के आटे या चमकीले रंगों से बनी रंगोली से सजाएं।  माना जाता है कि फर्श पर रंगोली देवी लक्ष्मी को आमंत्रित करती है।

 *एक हवन , अंतरिक्ष को शुद्ध करने और परिवेश को शुद्ध करने के लिए किया जाता है।

 

यदि संभव हो तो, केवल अपने प्रियजनों के साथ ही घर में पार्टी  करें, क्योंकि बहुत से लोगों को आमंत्रित करने से नकारात्मक ऊर्जा आ सकती है, जो निवासियों की भलाई में बाधा उत्पन्न कर सकती है। 

 गृह प्रवेश पूजा में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को कुछ उपहार अवश्य दिया जाना चाहिए।  कोई भी व्यक्ति खाली हाथ घर से न निकले। 

यह एक छोटे से चांदी के सिक्के, भगवान की मूर्ति, मिठाई के बक्से, या ताजे जीवित पौधों से कुछ भी हो सकता है, जो किसी के बजट पर निर्भर करता है।

नवरात्रि में विवाह क्यों नहीं होते?

Is navratri good for marriage?

Navratri puja पवित्र और शुद्धता से जुड़ा पर्व है, जिसमें नौ दिनों तक पूर्ण पवित्रता और सात्विकता बनाए रखते हुए देवी के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है।

इस दौरान शारीरिक और मानसिक शुद्धता के लिए व्रत रखे जाते हैं। इन दिनों बहुत से श्रद्धालु कपड़े धोने, शेविंग करने, बाल कटाने और पलंग या खाट पर सोने से भी परहेज़ करते हैं।

विष्णु पुराण के अनुसार, *नवरात्री पूजा करते समय बार-बार पानी पीने, दिन में सोने, तम्बाकू चबाने और स्त्री के साथ सहवास करने से व्रत खंडित हो जाता है।

चूंकि विवाह जैसे आयोजन का उद्देश्य संतति के द्वारा वंश को आगे चलाना माना गया है, इसलिए इन दिनों विवाह नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष (CONCLUSION)

Navratri  puja (Navratri Mata ke 9 din)एक ऐसा पर्व है, जो पूरे देश की संस्कृति व सभ्यता को एक धागे में  पिरोये रखता है। 

देश के लोगों के बीच धार्मिक उत्सवों को देखते हुए, हम गर्व से कह सकते हैं कि भारत विविधताओं का देश होने के बावजूद, विविधता में एकता है और यही भारत को अन्य देशों से अलग बनाती है।

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