जाने Pyar ka matlab kya hota hai? प्यार में क्या क्या होता है?

 प्यार, आकर्षण, इश्क़, मोहब्बत कितने ही अल्फाज़ हैं, एक छोटे से लफ्ज़ को ब्याँ करने के लिये। फिर भी लोग अनजान है, आखिर प्यार का मतलब क्या होता है ? 

आकर्षण प्यार है या मोहब्बत को प्यार कहा जाता है। इश्क़ और मोहब्बत एक ही हैं? तो फिर pyar ka matlab kya hota hai? प्यार में  क्या – क्या होता है? 

आइये इस आर्टिकल में अनसुलझे से लफ्जों को, एक ही कड़ी में  पिरोने की कोशिश करते हैं!

Pyar ka matlab kya hota hai? 

 प्यार वो एहसास है जो दिल से गुज़रकर रूह में ठहर जाता है। प्यार का मतलब, किसी वस्तु से नहीं  है  ना ही प्यार कभी किया जाता है।

प्यार कोई कोशिश नहीं है ना ही कोई प्रयत्न। प्यार कोई सोच नहीं है और ना ही कोई विचार।हर शब्द से आज़ाद होकर ,जब एहसास, एहसासों को महसूस करते हैं, एहसासों का वो मिलन ही प्यार कहलाता है। 

और गहराई से समझने की कोशिश करते हैं कि pyar ka matlab kya hota hai? 

प्यार क्या है?(what is love?) 

 जहाँ कोशिश है, वहाँ प्यार नहीं है। जहाँ दो इन्सान अलग-अलग हैं,अर्थात मैं और तू..वहाँ प्यार नहीं  है। जहाँ separation है, वहाँ प्यार exist ही नहीं करता, अर्थात साथ रहकर भी साथ ना होना।

If you’re in relationship  इसका मतलब ये नहीं  है कि प्यार भी हो। Husband-wife की रिलेशनशिप में  जरुरी नहीं  कि  प्यार भी हो।फिर love ka matlab kya hai? 

सरल शब्दों में  कहें तो लोग किसी की याद में तड़पने को ही प्यार समझ बैठते हैं। तड़पना प्यार नहीं है, ठहर जाना प्यार है। 

Pyar kaise hota hai? प्यार कैसे होता है?

वास्तव में,लोग attraction को प्यार समझ बैठते हैं, brain में कुछ chemical release होते है , जो हमारे शरीर में आकर्षण जैसी प्रति क्रियाएं  करते हैं। इसी आकर्षण को हम प्यार समझ बैठते हैं। 

और  ये आकर्षण time to time Change होता रहता है, कईं बार तो इस आकर्षण को  बदलने में  एक पल भी नहीं  लगता।

Sachcha pyar kya hota hai?(what is true love?) 

सच्चा प्रेम क्या होता है? हर कोई महसूस करना चाहता है उस कशिश को ,जिसका कोई वज़ूद नहीं,फिर भी पनपती है , हर दिल के दर्मियाँ ! 

 “True  love” का सही मायनों में  अर्थ है,परम “सर्वोच्चय”। सच्चा प्रेम” जिसका अर्थ है,  खुद को समर्पित कर देना..। 

It’s not about physical attraction towards the opposite sex.True love is about soul connection. 

अगर हकीकत की बात की जाये तो दो इंसानों के बीच  सिर्फ़ ज़रुरत है। भूख लगना,  मोहब्बत नहीं  है। भूख का मिट जाना, सच्चा प्यार है। 

घंटों-घंटों तक एक ही इन्सान को महसूस करना। ना कोई sensations, ना कोई ज़रूरत और ना ही कोई सोच, सिर्फ़ एक दूसरे को महसूस करना।  बिना छुए  भी कोई फ़ासला  ना होना। यही तो है “सच्चा प्रेम”।

 कौन कहता है कि 2,3 महीने में  प्यार हो जाता है या love at first sight…ये सिर्फ़ एक धोखा है, जो हम अपने आप को देते आये हैं।

इसलिये जानना जरुरी है, प्यार  की परिभाषा। मोहब्बत का मिनिग। Actually, It takes life time to understand the depth of love..!  खुद को खोना नहीं, खुद का मिट जाना  सच्चा प्यार है।

जुड़ना नहीं  है, जुड़े पड़े हैं सदियों तक। ऐसा एहसास प्यार है ,जहाँ अलग होने की कोई शंका ही नहीं। मृत्यु भी जिसे अलग नहीं  कर सकती। रूह जुड़ी पड़ी है जन्मों-जन्मों तक।

Pyar me kya kya hota hai? 

 प्यार की प्रकृति भी इंसानों की तरह अलग -अलग होती है। लेकिन हर एक तरह का प्यार,  ज़िंदगी को एक अलग मायना देता है। प्यार के बिना ज़िंदगी अधूरी है।

हर तरह के प्यार की अपनी Importance होती है। समझने की कोशिश करते हैं, अलग अलग तरह की चाहत में क्या-क्या होता है? 

Eros(Burning Passion)‐

Eros was the Greek God of attraction  and sexual  desire. Eros  को दिव्य सौंदर्य और  वासना के रुप में  परिभाषित किया गया है। 

यह सबसे तीव्र प्रकार (Intense love)का प्रेम है।इस तरह का प्यार young generation में  काफ़ी popular होता है। 

इस तरह का प्यार great रोमांस, वासना और  यौन आकर्षण का प्रतीक है। यह एक  dangerous love माना जाता है।  It’s power could destroy you.

Philia (Shared Goodwill)

Philia is a brotherly  love .Philia ,siblings और दोस्तों के प्यार को दर्शाता है। यह intimate or affectionate  तो है परंतु sexual नहीं। इस तरह का प्यार great understanding  और  sincere love का प्रतीक है।

Ludus (Filrting love)   

 Ludus, एक तरह का flirting love है। इस तरह के प्यार में  हर पल को enjoy करना, डांस ,पार्टी, passionate love, fun loving moments शामिल हैं ।

आज के आधुनिक युग में  इस तरह का  fun loving love, young generation में  काफ़ी पॉपुलर है। Application like Tinder इसका उदाहरण है।

Pragma (Stable love)

Pragma is a standing love. शादी इसका उदाहरण है। Husband-wife के बीच में  इसी तरह का प्यार होता है, commitment होती है।ज़िंदगी भर एक ही इन्सान के साथ रहना और  उसे ही प्यार करना।

Agape love(Selfless love)

इंसानियत के लिये प्यार, जिसमें कुछ भी पाने  की इच्छा नहीं  होती। दूसरों की मदद करना Agape love कहलाता है।

unconditional love का एक अनूठा उदाहरण है ये।इसे प्यार की शुद्धता भी कहा जाता है।आज दुनिया में  इसी तरह के प्यार की जरुरत है।

Philautia (Self love)

Philautia,  self love को दर्शाता है। खुद के बारे में  सोचना, खुद के ड्रीम्स (Dreams) पूरे करना, खुद को प्यार करना, यही है इस तरह के प्यार की पहचान। कहा भी जाता है, दूसरों को प्यार करने के लिये जरुरी है, स्वयं  से प्रेम करना।

जो इन्सान खुद से प्रेम नहीं  करता,वह कभी किसी को भी प्यार नहीं  कर सकता, यही अर्थपूर्ण सत्य है।

Storge (Unwavering love)

Storge is known as parents love. इस तरह का प्यार प्राकृतिक है। और  यही है सच्ची मोहब्बत की परिभाषा।

बिना किसी शर्त के अपने बच्चों का ख्याल रखना ,प्यार करना, इसी तरह का प्यार है।  Protection and understanding is the main aspects of this type of love. Pyar karne se kya kya hota hai?

Pyar ka matlab kya hota hai? इसकी वास्तविकता तो ये है कि.  

Pyar ka matlab kya hota hai?
Pyar ka matlab kya hota hai?

*प्यार किया नहीं  जाता, बल्कि एक एहसास है जो मन  में  पनपता है, दूसरे की खुशी बनकर, जिसे “प्यार का हो जाना ” कहा जाता है।

 *प्यार एक सुकुँ है, जो प्यार करने वाले एक दूसरे में  महसूस करते हैं, बिना किसी उम्मीद के। गर प्यार सच्चा हो तो।

*प्रेम एक राहत है, जो जीने की नयी आशाओं को जगाता है। दिल के हर ज़ख्म पर  मरहम का काम करता है।

*प्रेम एक आईना है, जो खुद से प्यार करना सिखाता है। अपने अस्तित्व की पहचान करवाता है। ज़िंदगी की कीमत समझाता है।

 *प्रेम एक इबादत है, जो निश्छल कर्म को प्रोत्साहन देता है। हृदय को पवित्र बनाता है। इंसानियत जगाता है।

*प्यार ,इन्सान को समंदर की तरह बना देता है। ज़िंदगी की उथल-पुथल का, मन की गहराई पर  कोई प्रभाव नहीं  पड़ता। ज़िंदगी में  एक ठहराव लाता है। 

Pyar ka kya matlab hota hai? Pyar karne se kya kya hota hai?ये एहसास केवल वही जी सकता है, जिसने कभी अपनी ज़िंदगी में सच्चा प्यार किया हो। 

Real love kya hai?( according to SPIRITUALITY) 

It’s not about flirting.It’s not about,  how to play love games. 

प्यार  ना ही किसी को पाने  का तरीका है।और  ना ही किसी को जीतने का कोई खेल।खुद की तलाश ही सच्चा प्यार है।

आध्यात्मिकता के अनुसार,  गीता में  कहा गया है कि अगर कुछ दिनों के लिये प्रेम करना चाहते हो तो अपनी रुचियों से प्रेम करो, अगर कुछ महीनों तक प्रेम करना चाहते हो तो अपने मित्रों से प्रेम करो, अगर अपनी पूरी ज़िंदगी प्रेम करना चाहते हो तो अपने सगे संबंधियों, पति, पत्नी, बच्चों से प्रेम करो।  

 लेकिन अगर जन्मों तक प्रेम करना चाहते हो तो अपने कर्मों से प्रेम करो। प्रत्येक वस्तु और  इन्सान नाशवान है, कर्म ही हैं जो जन्मों तक का सफ़र तय करते हैं। और सच्चे प्यार की पहचान बनते हैं।

प्यार करने का सही तरीका ढूंढना नहीं है, बल्कि स्वयं का ज्ञान प्राप्त करना ही सच्चा प्रेम  है। 

एक नज़र, जो दुनिया को देखती है अर्थात जो मोहमाया में  बंधी हुई है और  एक सही नज़र,  जो संसार की वास्तविकता का ज्ञान करवाती है जो इस कायनात को अर्थपूर्ण बनाती है। वो सही नज़र ही पहचान सकती है “सच्चे प्रेम” को। 

एक सही नज़र की जरुरत है, सच्चे प्यार को महसूस करने के लिये।  एक सही नज़र की जरुरत है, अपने आपको तलाशने के लिये।

 दुनिया की वो नज़र तो हमें छोटा बनाती  है, स्वार्थी बनाती है, अपनी इच्छाओं के जाल में  बुनती चली जाती है। 

हर इन्सान के अंदर वो प्रकाश है, which is the source of this whole “UNIVERSE “.हर एक मन ,  प्यार का सागर है, देखने की नज़र अगर सही हो तो।

“बारिश” एक मौसम ही सही, दुनिया की नज़र में। क्या कभी महसूस किया है, बारिश की बुन्दों को, हथेली में  लेकर। 

क्या कभी महसूस किया है, इन बूँदों की शुद्धता में  खुद को भिगोकर। कभी तो महसूस करो उस खुशबू को, जो मिट्टी से मिलने के बाद महकती है, उन बारिश की बूँदों से।  

और यही है, सही नज़र ,जब इन्सान वास्तविकता को महसूस करने लगता है, जो दुनिया की नज़र से काफ़ी अलग है। इसे ही तो कहते हैं सच्चा प्यार।

दुनिया की नज़र से देखें , तो समंदर में ऊपर उठने वाली, मोहपाश में  बँधी लहरें तूफान का एक हिस्सा ही तो है।एक सही नज़र से छूकर तो देखो,  क्या वो पानी नहीं है। 

क्या हर दिल में  नहीं  बहता, प्यार का समंदर। क्यूँ  लहर  बनाकर, भेदभाव किया जाता है।  फिर क्या जवाब देना नामुमकिन है कि pyar ka matlab kya hai? 

जिसने खुद को सही नज़र से जान लिया वही वास्तविकता को महसूस करने लगता है!जो दुनिया की नज़र से काफ़ी अलग है। इसे ही तो कहते हैं “सच्चा प्यार”।

वही समझ पायेगा, कि  सारी कायनात मुझमें ही समाई है, ना पाने की खुशी, ना खोने का गम, कुछ भी नहीं। 

निष्कर्ष (CONCLUSION) 

राधा कृष्ण का प्रेम हो या मीरा का, ऐसे ही संसार में  पूजा नहीं जाता। आत्मिक प्रेम से कोई भी अछूता नहीं  रहा। वही है सच्चा प्रेम।  अनेकों प्यार की कहानियाँ बनती हैं, मिटती हैं! ज़िंदा रह जाता है, सच्चा प्रेम, लोगों के दिलों में। 
pyar ka matlab kya hota hai? pyar kya hota hai? क्या फ़र्क पड़ता है,इन सवालों से, गर सही नज़र से हर इन्सान अपने मूल्य को समझे, वास्तविकता को समझे, अपने कर्मों से प्यार करे। और एक सही नज़र से देखे, इस  कायनात की हर हकीकत को।  

जो इस संसार में  ढूंढ्ता है, वास्तव में इन्सान के  अंतर्मन में  ही विद्यमान है।DISCOVER YOURSELF ! खुद से प्रेम करना ही “सच्चा प्रेम” है।

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