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SHARE MARKET Meaning in Hindi | What is the Meaning of SHARE MARKET in Hindi

by Manish Sharma
SHARE MARKET Meaning in Hindi

SHARE MARKET Meaning in Hindi | What is the Meaning of SHARE MARKET in Hindi

दोस्तों आप लोगों में से कई लोग ऐसे होंगे जिनके मन में शेयर मार्केट का मतलब क्या है (Share Market Meaning in Hindi), शेयर मार्केट कैसे काम करता है, शेयर मार्केट में पैसा कैसे लगाएं, शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव कैसे होता है, इक्विटी शेयर क्या है, बोनस शेयर क्या है, स्टॉक एक्सचेंज क्या है, मुझे कौन से शेयर खरीदनी चाहिए, शेयर कितने प्रकार के होते हैं, जैसे सवाल उत्पन्न होते हैं और अगर आप भी शेयर मार्केट (Share Marke से जुड़े इन सवालों के जवाब ढूंढ रहे हैं तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें।

शेयर बाजार क्या है? Share Market Kya Hai  in Hindi?
शेयर का सीधा सा मतलब होता है हिस्सा और अगर शेयर बाजार की भाषा में बात करें तो शेयर का मतलब है किसी कम्पनियों में आपका हिस्सा। उदाहरण के लिए अगर किसी कम्पनी ने कुल 20 लाख शेयर जारी किए हैं और आप उस कम्पनी के प्रस्ताव के अनुसार जितना हिस्सा खरीद लेते हैं आपका उस कम्पनी में उतने का मालिकाना हक हो जाएगा जिसे आप कभी भी किसी अन्य खरीददार को जब भी चाहें बेच सकते हैं। आप 100 से लेकर अधिकतम शेयर खरीद सकते हैं।

कोई भी कम्पनी जब शेयर जारी करती है तो उस वक्त किसी व्यक्ति या समूह को कितने शेयर देना हैं यह उसका अधिकार होता है। बाजार में शेयर खरीदने/बेचने के लिए कई शेयर ब्रोकर्स होते हैं जो उनके तय कमीसन (लगभग 2 फीसदी) लेकर अपने ग्राहकों को यह सेवा देते हैं।

इन कम्पनियों के शेयरों का मूल्य मुंबई शेयर बाजार (Bombay Stock Exchange) BSE में दर्ज होता है। सभी कम्पनियों का मूल्य उनकी प्रॉफिट की क्षमता के अनुसार कम और ज्यादा होता रहता है। इस पूरे बाजार का नियंत्रण भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) SEBI का होता है।

इसकी अनुमति के बाद ही कोई कम्पनी अपना प्रारंभिक इश्यू यानी (आईपीओ) जारी कर सकती है। हर 6 महीने या 1 साल बाद कंपनियां लाभ होने पर शेयर होल्डर्स को प्रॉफिट का हिस्सा भी देती हैं और कम्पनी की गतिविधियों की जानकारी से भी समय-समय पर देती है।

SEBI

शेयर बाजार में लिस्टेड होने के लिए हर कम्पनी को बाजार से लिखित समझौता करना पडता है, जिसके अन्दर कम्पनी अपनी हर हरकत की जानकारी बाजार को समय-समय पर देती रहनी पड़ती है, खासकर ऐसी जानकारियां, जिससे निवेशकों के हित प्रभावित होता हो।

इन्हीं सब जानकारियों के आधार पर किसी कम्पनी का मूल्यांकन होता है और इस मूल्यांकन के आधार पर ही मांग घटने-बढ़ने से कम्पनी के शेयरों की कीमतों में उतार-चढाव आता है। अगर कोई कम्पनी बाजार से किये गए समझौते के नियमों का पालन नहीं करती, तो उसे सेबी के द्वारा डीलिस्ट करने की जा सकती है।

कैसे होती है सेंसेक्स में उतार-चढ़ाव की गणना (How Sensex Fluctuations Are Calculated)?
हम अक्सर शेयर बाजार में अंकों के चढ़ने और उतरने की चर्चा करते हैं, जैसे शेयर बाजार 300 या फिर 400 अंक ऊपर या नीचे गिर गया। पर क्या हम यह जानते हैं कि शेयर बाजार के ऊपर उठने या फिर नीचे गिरने की गणना कैसे की जाती है।

इस अंक में हम यही बताने की कोशिश करेंगे कि आखिर शेयर बाजारों में उतार चढ़ाव का आकलन कैसे किया जाता है। देश में मुख्य रूप से दो शेयर बाजार हैं: मुंबई स्थित (Bombay Stock Exchange) BSE और (National Stock Exchange) NSE। बीएसई में सूचीबद्ध कम्पनियों के प्रदर्शन को सेंसेक्स के द्वारा बताया जाता है जबकि एनएसई में इसे निफ्टी के नाम से जाना जाता है।

अगर मैं ये कहूं कि सेंसेक्स ऊपर गया तो इसका मतलब होता है कि बीएसई में शामिल ज्यादातर कम्पनियों के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है और वहीं दूसरी तरफ सेंसेक्स के नीचे लुढ़कने का मतलब होता है, इसमें शामिल कम्पनियों के शेयरों के भाव नीचे गिर रहे हैं।     

BOMBAY STOCK EXCHANGE                               

सेंसेक्स का  आंकलन (Sensex Estimates):                                                                                   BSE में सचीबद्ध 30 कम्पनियों के शेयरों के प्रदर्शन के आधार पर सेंसेक्स का निर्धारण किया जाता है। इसके आकलन के लिए मुक्त बाजार पूंजीकरण विधि का इस्तेमाल किया जाता है। अब इस तकनीक को जानने के पहले यह समझते हैं कि बाजार पूंजीकरण क्या होता है?

बाजार पूंजीकरण (Market capitalization):
कुल शेयर का मूल्य ही उस कम्पनी का बाजार पूंजीकरण कहलाता है।किसी कम्पनी के बाजार पूंजीकरण के आधार पर ही यह तय किया जाता है कि कम्पनी मिड-कैप, स्मॉल-कैप या फिर लार्ज-कैप है। बाजार पूंजीकरण को समझने के बाद हम मुक्त बाजार पूंजीकरण को समझने की कोशिश करेंगे।

मुक्त बाजार पूंजीकरण (Free Market Capitalization):
कम्पनी के शेयर विभिन्न प्रकार के निवेशकों के पास होते हैं। इनमें से कुछ शेयरों पर सरकार का कब्जा भी हो सकता है तो कुछ पर कम्पनी के संस्थापक या फिर निदेशकों का और बचे हुए शेयर्स फ्री फ्लोट शेयर कहा जाता है जिनका कारोबार खुले बाजार में किया जाता है। यानी जिन्हें कोई भी निवेशक खरीद सकता है।

मुक्त शेयर ऐसे शेयर होते हैं जिन पर कम्पनी के संस्थापक, निदेशक या मालिक का कोई हक नहीं होता, जिनपर किसी व्यक्ति या इकाई की होल्डिंग्स का हक नहीं होता। 

साथ ही ऐसे शेयर जो लॉक्ड इन की श्रेणी में आते हैं और जिन्हें आम निवेशकों के लिए जारी नहीं किया जाता है, वे भी मुक्त शेयर नहीं कहलाते। हर कम्पनी को बीएसई को संपूर्ण रिपोर्ट सौंपनी होती है कि उसके कितने शेयर किन किन लोगों के पास हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर बीएसई तय करती है कि कम्पनी के मुक्त शेयर कितने हैं और कम्पनी का मुक्त बाजार पूंजीकरण कितना है।

Equity Share क्या है? What is Equity Share?
इक्विटी शेयर किसी कम्पनी में आपके स्वामित्व के प्रारूप को प्रदर्शित करता है। ऐसे एक शेयर का धारक कम्पनी का एक सदस्य माना जाता है और उसके पास मतदान का अधिकार भी होता है।

इसमें क्या जोखिम हैं? What are the risks?
इक्विटी शेयर काफी जोखिम भरें होते साथ ही साथ उनमें रिटर्न भी बोहोत मिलता है। इक्विटी निवेश और सभी अन्य निवेश विकल्पों में प्रमुख अंतर यह है कि जहां अन्य विकल्पों जैसे बैंक जमा, लघु बचत योजनाओं, डिबेंचर, बांड आदि से मिलने वाला लाभ निर्धारित और निश्चित होता है, वहीं इक्विटी निवेशों से होने वाली कमाई बेहद अनिश्चित और विविध होती है।

सही समय पर किया गया एक अच्छा निवेश काफी अच्छा रिटर्न दिला सकता है, अन्यथा रिटर्न बेहद कम भी हो सकता है या यह ऋणात्मक भी हो सकता है, यानी निवेश किया गया फ़ंड स्वयं भी धीरे धीरे ख़त्म हो सकता है।

Share Market Kya Hai Aur Kaise Kam Karta Hai

लाभांश क्या है? What is a dividend?
लाभांश किसी कम्पनी द्वारा अपने निवेशकों में वितरित लाभ का एक हिस्सा होता है। 

बोनस शेयर क्या है? What is a bonus share?
कम्पनियों द्वारा अपने शेयरधारकों के लिए पिछले वर्षों में अर्जित लाभों के द्वारा निःशुल्क जारी किए गए एक शेयर को बोनस शेयर कहा जाता है।

बांड क्या है? What is a bond?
एक बांड, किसी कम्पनी या सरकार द्वारा उसके Creditors के लिए जारी किया गया एक वचनपत्र होता है। एक बांड ऋण का वह साक्ष्य है, जिस पर जारीकर्ता कम्पनी बांडधारक को ब्याज की एक निश्चित राशि का भुगतान करने का वादा करती है, और समय समाप्त होने पर मूलधन(Principal Amount)  चुकाने का वादा करती है।

डिबेंचर क्या है? What is a debenture?
यह एक निश्चित ब्याज दर के साथ कम्पनी द्वारा जारी किया गया एक बांड है जिसका भुगतान सामान्यतः निर्दिष्ट तिथियों पर छमाही रूप से किया जाता है और मूलधन (Principal Amount) का भुगतान एक विशेष तिथि पर डिबेंचरों को रिडीम करने (भुनाने द्वारा) पर किया जाता है।

स्टॉक एक्सचेंज क्या है? What is a stock exchange?
स्टॉक एक्सचेंज वह जगह है जहां क्रेता और विक्रेता एक व्यवस्थित ढंग से शेयरों की ट्रेडिंग करने के लिए मिलते हैं। वर्तमान समय में देश में 25 मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज हैं जो Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 द्वारा शासित हैं।

मैं कौन से शेयर खरीद सकता हूं? Which shares can I buy?
आप वे शेयर खरीद सकते हैं जो किसी भी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध हों।

शेयर/स्टॉक कितने प्रकार के होते है? What are the types of shares?
शेयर कई तरह के हो सकते हैं और अलग अलग लोग इन्हें अलग अलग रूप से परिभाषित(Define) करते हैं. फिर भी हम शेयर को मुख्यत: 3 रूप में बाँट सकते है: 
1. Common Shares: इन शेयर्स को कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है और जरुरत पढ़ने पर बेच भी सकता है. यह सबसे आम शेयर होते है.
2. Bonus Shares: जब भी कोई कम्पनी अपने शेयर होल्डर्स को मुनाफे में पैसो के बदले शेयर देती है तो उसे बोनस शेयर जाता है.
3. Preferred Shares: इस तरह शेयर्स कम्पनी कुछ ख़ास लोगों के लिए ही लाती है. जब किसी कम्पनी को अचानक पैसे की जरुरत पड़ती है तो वह जो शेयर जारी करती है उन्हें खरीदने का पहला अधिकार कुछ गिने चुने खास लोगो को ही देती है. जैसे की किसी विशेष कम्पनी में काम करने वाले कर्मचारी. आम तौर पर इस तरह के शेयर्स को काफी सुरक्षित माना जाता है.

मुझे अपने शेयर बाजार संबंधित लेनदेनों के लिए किससे संपर्क करना चाहिए?                               
स्टॉक मार्केट में शेयर खरीदने या बेचने में सक्षम होने के लिए आपको किसी स्टॉक ब्रोकर से संपर्क करना होगा और जिसने स्टॉक एक्सचेंजों में सदस्यता ग्रहण की है और जो सेबी के साथ भी पंजीकृत हो।

क्या मुझे ब्रोकर या सब-ब्रोकर के साथ किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता है?      Do I need to sign any agreement with a broker or sub-broker?
जी हां, आपको एक ब्रोकर को अधिकृत करने के उद्देश्य से ‘सदस्य-क्लाइंट समझौता’ फॉर्म पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होती है ताकि ब्रोकर आपके एकाउंट मेन्टेन रख सके आप सीए खुद भी कर सकते हैं अगर आपको अनुभव है तो।

Share Brocker

मैं अपने ऑर्डर कैसे करुं? How do I place my order?
फ़ोन के माध्यम से या किसी भी अन्य सुविधा जैसे इंटरनेट ट्रेडिंग के माध्यम से ट्रेडिंग की जा सकती है। कॉल करने वाले व्यक्ति की प्रामाणिकता की जांच करने और खाते में उपलब्ध मार्जिन की जांच करने के बाद स्टॉक एक्सचेंज सिस्टम में ऑर्डर दर्ज करेगा।

 बुलिश (बढ़त) और बियरिश (मंदी) के रुझान का क्या तात्पर्य है?                                                 What does the trend of bullish (rise) and bearish (bearish) mean?
जब शेयर बाजार ऊपर जाता है तो इसे बुलिश (बढ़त) और जब बाजार नीचे जाता है तो इसे बियरिश (मंदी) कहा जाता है।

bullish and bearish

एक पॉजिशन (स्थान) लेना क्या है? What is taking a position?
जब किसी स्टॉक को खरीदते हैं, तो इसका अर्थ है कि आप एक स्थान ले रहे हैं। पॉजिशन निवेश में लगाए गए धन की राशि है। पॉजिशन दो प्रकार के होते हैं:

लांग पॉजिशन (Long position): इसका प्रयोग अधिकांश लोग करते हैं। जब आप लांग पॉजिशन खरीदते हैं, तो इसका अर्थ है कि आपको मूल्य में वृद्धि होने की आशंका है, और इस तरह आप लाभ प्राप्त करते हैं। लोग प्रायः बाद में उच्च कीमतों पर बेचने की उम्मीद से वर्तमान मूल्यों पर शेयर खरीदते हैं और इस प्रकार लाभ प्राप्त करते हैं।

शार्ट पॉजिशन (Short Position): ये तरीका थोड़ा पेचीदा होता है। जब आप शार्ट पॉजिशन खरीदते हैं, तो आपको कीमत में गिरावट की आशंका होती है और गिरावट आपके लाभ का स्रोत है। शेयरों को पहले बेचा जाएगा और बाद में मूल्य गिरने पर उन्हें पुनः खरीदा जाएगा और वापस कर दिया जाएगा और अंतर, निवेशक का लाभ होता है। 

पे-इन डे और पे-आउट डे क्या है? What is pay-in day and pay-out day?
पे-इन डे वह दिन है जब ब्रोकर एक्सचेंज को प्रतिभूतियों का भुगतान करता है और पे-आउट डे वह दिन होता है जब एक्सचेंज ब्रोकर को प्रतिभूतियों का भुगतान करता है।

 क्या होगा यदि दिए गए समय पर मुझे मेरे पैसे या शेयर नहीं मिलते?                                           What if I don’t get my money or shares at the given time?
यदि कोई ब्रोकर समय पर आपको पैसे/शेयरों का उचित भुगतान करने या डिलिवर करने में असफल रहता है या आप ब्रोकर के आचरण के खिलाफ कोई शिकायत करना चाहते हैं, तो आप संबंधित स्टॉक एक्सचेंज में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

विवाद को सुलझाने के लिए शिकायतकर्ता मध्यस्थता का सहारा भी ले सकता है जैसा कंट्रैक्ट नोट /खरीद या बिक्री नोट के पीछे दिया गया है। हालांकि, यदि स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा शिकायत पर ध्यान नहीं दिया जाता है या अनावश्यक रूप से देरी की जाती है, तो शिकायतों को समर्थन दस्तावेज़ों के साथ सेबी के द्वितीयक बाजार विभाग को भेजा जा सकता है। 

पोर्टफ़ोलियो मैनेजर किसे कहते है? What is a portfolio manager?
कोई भी व्यक्ति जो एक ग्राहक के साथ एक अनुबंध या व्यवस्था के अनुसार, ग्राहक के फ़ंड या प्रतिभूतियों के पोर्टफ़ोलियो के प्रबंधन या प्रशासन के लिए सलाह देता है या निर्देशन करता है या ग्राहक की ओर से संचालन करता है उसे पोर्टफ़ोलियो मैनेजर कहते है। 

निवेश में धोखे से बचें (Avoid fraud in investing):
कई बार ऐसा होता है कि एजेंट Agent सपने तो किसी और प्लान या प्रोडक्ट के दिखाते हैं मगर जब वास्तव में आपके पास निवेश के कागज पहुंचते हैं तो उसमें कुछ और ही निकलता है। इसीलिए आपको एजेंट या ब्रोकर का चुनाव संभल कर करना होगा।

इन बातों का खयाल रखें (Keep these talks in your mind):

हर किसी से अपने पूरे जीवन में गलतियाँ होती रहती हैं। अपनी गलतियों से सीखें वरना आप कभी भी एक महान निवेशक नहीं बनेंगे।कुछ भी नहीं करना सबसे बड़ी गलती है जिसे आप कर सकते हैं।
एक अच्छा निवेशक होने का मतलब है कि आप उससे सीखें। अपनी गलतियों और अपने नुकसान को कम करने का प्रयास करें।
सबसे आम नुकसान से बचने में आपकी मदद करने के लिए, यहां कुछ बुनियादी गलतियों की एक त्वरित सूची है जो नए निवेशक करते हैं:
1. अल्पावधि के लिए निवेश करना
सबसे पहली चेतावनी, जो पैसा आपका नहीं है उस पैसे का कभी निवेश मत करें। एक शेयर खरीदना आपको शुरुआत कराने के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन पैसे की बड़ी रकम का निवेश न करें जो आपको अगले साल  चाहिए। बहुत बार, नौसिखिए निवेशक अपनी सारी बचत को शेयर मार्केट में लगा देते हैं यह सोचकर कि जब भी उन्हें पैसे वापस चाहिए तो वे उन्हें बेच सकते हैं।

यह बैंक खाता नहीं है। यदि आपको मंदी के बीच में धन की आवश्यकता होती है, तो आपको अपने उन स्टॉक को नुक़सान पर बेचना पड़ सकता है, इसलिए ऐसे धन का निवेश करें जिसकी ज़रूरत आपको अगले साल भी नहीं पड़ेगी।
3. बहुत ज़्यादा सुरक्षित निवेश करना
यदि आप युवा हैं, तो केवल कम जोखिम, कम उपज वाले शेयरों में निवेश न करें। आपको बाजार में मंदी के मौसम में ख़रीदने और विशाल पुरस्कारों को प्राप्त करने के लिए काफ़ी वर्षों का वरदान मिला है।
पुराने निवेशकों के पास वह फ़ायदा नहीं है। आप जानते हैं कि “समय पैसा है?” कहीं न कहीं यह शेयर बाजार में अधिक सच है। अपने लाभ के लिए अपने समय का उपयोग करें और दीर्घकालिक विकास (long term growth) की क्षमता वाली कंपनियों में निवेश करें।
4. बहुत ज़्यादा जोखिम भरा निवेश करना
अपना सारा पैसा जोखिम वाली कंपनियों में न लगाएं विशेष रूप उन कम्पनीयों में जिन्हें ठोस व्यवसाय मॉडल या अच्छे नेतृत्व के ना होते हुए भी बहुत ज़्यादा प्रचारित किया जाता है । मंदी की स्थिति में अपने आप को कवर करने के लिए पहले से कुछ कंपनियों और क्षेत्रों में जोखिम फैलाएं और अपने पोर्टफोलियो को संतुलित बनाए रखने के लिए बड़ी कंपनियों के भी कुछ शेयर अपने पास रखें।
5. भेड़ चाल चलना
अगर भीड़ के पीछे चलना सही होता, तो आज हम सभी करोड़पति होते। आप उन अवधियों से गुजरने वाले हैं जहाँ आपके आस पास के लोग आपको कुछ अस्थायी मंदी के कारण एक ऐसा स्टॉक बेचने के लिए कहेंगे जिस पर आपको अभी भी विश्वास है। एक खराब कमाई की रिपोर्ट की वजह से एक महान कंपनी के पतन नहीं होने जा रहा है, इसलिए अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें।

स्टॉक की कीमतें ऊपर और नीचे होती रहती हैं – अपने निवेशों से चिपके रहें और समय के साथ आप एक दीर्घकालिक निवेश रणनीति के पुरस्कारों को प्राप्त करेंगे। अगर आप अपने मन को बदलते रहें तो आप अपने अधिकतम रिटर्न ट्रेडिंग शुल्क को गँवा बैठेंगे।

शेयर मार्केट में कैसे करे प्रवेश ? How to enter the stock market?
Step 1. सबसे पहले किसी भी भारतीय बैंक में बचत खाता या चालू खाता तथा उसके साथ चैकबुक होनी चाहिए क्योकि ट्रेडिंग अकाउंट में रुपये चैक द्वारा ही जमा किये जाते है
Step 2. पेन कार्ड होना चाहिए यह जरुरी है। पेन कार्ड और बैंक खाता दोनों एक ही व्यक्ति के नाम हो यदि आपके पास पेन कार्ड नहीं है तो इस लिंक Pan Card Application पर क्लिक कर पेन कार्ड का फॉर्म डाउनलोड कर सकते है ।

पेन कार्ड के लिए 94 रूपये निर्धारित फीस लगती है एवं 30 दिनों में रजिस्र्टर डाक द्वारा आपके घर आ जाता है । अधिक जानकारी के लिए नजदिकी आयकर विभाग की ऑफिस में संपर्क करे ।

इस के अलावा https://www.onlineservices.nsdl.com/ , https://www.utiitsl.com/ पर संपर्क करे । पेन कार्ड का फॉर्म भरते समय एक बार पुनः जाच कर लें क्योंकि एक बार गलती होने पर ठीक करवाने में 1महिने का उससे भी ज्यादा समय लग सकता है । पेन नंबर एक ही रहता एवं एक से अधिक पेन रखने पर आयकर विभाग जुर्माना या अन्य कारवाही कर सकता है ।

आशा करता हूं Share Market Meaning in Hindi से जुड़ी यह जानकारी आप लोगों को पसंद आई होगी अगर ये पोस्ट आपको अच्छा लगे तो इसे अपने दोस्तों को शेयर और कमेन्ट जरूर करें और अगर आपके पास कोई सुझाव हैं तो हमें जरूर कमेन्ट सेक्शन में लिखकर बताएं। अगर आप भी किसी फूल फॉर्म के बारे में  जानना चाहते हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं।

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