WOMEN’S ROLE IN INDIAN SOCIETY|भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका (2023)

भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका WOMEN’S ROLE IN INDIAN SOCIETY

भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका (WOMEN’S ROLE IN INDIAN SOCIETY) क्या है? हमारे समाज में  एक औरत की भूमिका कौन  निर्धारित करता है? या ये कहें कि  हमारे समाज में  एक नारी का अस्तित्व या भूमिका  का आंकलन  करने के लिये किन पहलुओं पर  नज़र डालनी चाहिये?

इस आर्टिकल में  आपको एक औरत की समाज के लिये दी गई विशिष्ट भूमिका को दर्शाया गया है! आइये एक नज़र डालते हैं.“Women’s Role In Indian Society “

In Present WOMEN’S ROLE IN INDIAN SOCIETY|वर्तमान में भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका

‘नारी’ एक ऐसा शब्द ,जो हर साँस में,हर एहसास में,हर ख्याल में,हर दिल में अपने होने की गवाही देता है! निर्जीव है ये पूरी कायनात, महज़ एक छोटे से अल्फाज़ की कमी के कारण! 

नारी पर  खूबसूरत शब्द लिखे गये,कईं गाथाएँ गायी  जाती हैं,इनके शौर्य पर ! पर अफसोस आज भी अनजान है लोग.इस शब्द को पहचानने में!

 भारत देश पुरुष प्रधान देश है! जी हाँ, ये वाक्य तो शायद आप सभी ने किताबों में पढ़ा होगा! लेकिन वास्तव में आज समझ आया इसका असली मतलब! अब समझ आया आखिर ये पुरुष प्रधान होता क्या है?

सदियों से हमारे देश में नारी को किसी ना किसी देवी(Devi) रुप में पूजा जाता है,कभी दुर्गा माँ के अवतार के रुप में तो कभी काली माँ के रुप में!

 लेकिन अगर औरत की वर्तमान स्थिति पर नज़र डाली जाये तो समझ में  आता है कि क्या स्थिति है ,भारतीय समाज में महिलाओं की(what is the situation of  women in Indian society?)

 हमारा देश भारत मुख्य रुप से दो भागों में  बँटा हुआ है! सही अध्ययन से ज्ञात होगा कि अलग-अलग भागों में महिलाओं  को किस नज़र से देखा जाता है या फिर कह सकते है कि एक औरत को किस तरह से अपनी ज़िंदगी बितानी पड़ती है!आइये एक नज़र डालते हैं.

भारतीय ग्रामीण समाज / क्षेत्रों  (RURAL AREAS) में नारी का अस्तित्व.

WOMEN’S ROLE IN INDIAN SOCIETY

आज भी हमारे देश की ज़्यादातर जनसंख्या गाँवों में  बसती है! ग्रामीण क्षेत्रों में  आज भी वही पुराने रीति रिवाजों,परम्पराएं ज़िंदा हैं!

दहेज प्रथा,बाल विवाह ऐसी कुप्रथायें हैं जिनके कारण एक औरत की ज़िंदगी बद से बदतर होती चली जाती है!उस औरत को क्या कहे जो उफ्फ़ तक नहीं करती, सहती चली जाती, बिना एक शब्द कहे! शहरी समाजों में महिलाओं की स्थिति बेहतर है, लेकिन विभिन्न ग्रामीण समाजों में यह अभी भी बेहतर शिक्षा और शिक्षा प्रणाली की कमी के कारण बदतर है।

एक महिला,बच्चे को जन्म देती है और जीवनभर देखभाल, शिक्षा, नौकरी आदि के लिये अपने बच्चे और पति की देखभाल में  लगी रहती है।

वह कभी भी अपनी भूमिकाओं के बदले में कुछ नहीं मांगती है, बल्कि वह बिना किसी बहस के जीवन भर अर्धांगिनी (Ardhangini)और  माँ बनकर अपनी भूमिकाएं विनम्रता से निभाती है।गाँव की सीधी सादी औरतें अपने पति को भगवान मानती चली जाती हैं!

यही उसका जीवन है,यही पूजा!छोटी उम्र में शादी कर दी जाती है,बच्चे पैदा करने की मशीन बनकर रह जाती है, अपनी इच्छाओं को तो जैसे जानती ही नहीं! अपने ही परिवार के लिये अपना जीवन लगा देती है!

जैसे की पहले ही बात कर चुके हैं,एक औरत की ज़िंदगी गाँव में  कितनी दयनीय हो गई है! लेकिन जैसे-जैसे वक़्त बीतता गया,स्थिति में  सुधार भी हुआ!नारी शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जाने लगा! औरत की ज़िंदगी को बेहतर बनने के लिये प्रयास किये जाने लगे!

गाँव की औरत भी समझने लगी है,कि एक किसान या छोटे-छोटे काम करके ही घर का गुज़ारा नहीं चलाया जा सकता! अपने हुनर को ही सीढ़ी बनाकर औरतों ने मिलकर अपना काम करना शुरु कर दिया!

सिलाई कढाई,अचार बनना, घरेलू सामान तैयार करना इस तरह के कई लघु उद्योग स्थ्पित किये गये!सरकार ने भी उनकी उन्नति में काफ़ी सहयोग किया! गाँव की महिलायें भी समझने लगी अपने अधिकार और कर्त्तव्य! गांवों में बैंक को भी प्रोत्साहन दिया गया! बचत योजना शुरु की गई! हर परिवार की स्थिति सुधरी! देश की आर्थिक व्यवस्था भी काफ़ी प्रभावित होने लगी!

गांवों से बहुत सामान निर्यात किया जाने लगा!शिक्षा का असर भी देखने को मिला! आज के समाज में गाँव की औरत भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती है! इस प्रकार गाँव की महिला भी समाज में  महत्तवपूर्ण  भूमिका निभाती है!

शहरी क्षेत्रों (URBAN AREAS) में नारी का अस्तित्व.

WOMEN’S ROLE IN INDIAN SOCIETY

काफ़ी हद तक शहरों में एक औरत की ज़िंदगी बेहतर है अगर गांवों से तुलना की जाये! ऐसा नहीं है कि पुरानेरीतिरिवाजों का प्रचलन शहरों में  नहीं है,लेकिन औरत काफ़ी हद तक जागरुक हैं, अपने अधिकारों को समझने में !

 शिक्षा पर विशेष रुप से ध्यान दिया जाता है! लड़कियों को भी बराबर का अधिकार दिया जाता है शिक्षा ग्रहण करने में! भारत के संविधान में निहित है कि शादी के वक़्त लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष होनी चाहिये! इसका पालन भी किया जाता है!

 औरत स्वाभिमान से जीना चाह्ती है!घर से कदम क्या निकला,परिवार को भी संभालने की ज़िम्मेदारी  उठा ली! पैसा कमाने लगी है,अपने सपने पूरा  करने में लगी है,पुरुषों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर अपने परिवार का जीवन निर्वाह करती है!

ऐसा नहीं है कि शहरों में ज़िंदगी आसान हैबल्कि कदम कदम पर एक औरत को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है,अपने वज़ूद को कायम रखने के लिये!

 वास्तव में एक स्त्री होना ही खुद में एक बहुत बड़ी चुनौती है! एक औरत फिर भी समाज में  अपना ही वज़ूद  रखती है, हजारों मुश्किलें आने के बाद भी अपना अस्तित्व कायम रखती हैं!

शहरी  समाज में महिलाओं की भूमिका/ अस्तित्व  (IN URBAN AREAS)

अगर शहरों में  बात की जाये कि  आखिर एक औरत की भूमिका क्या है इस समाज के लिये ,अपने देश के लिये,अपने परिवार के लिये!तो ये कभी नहीं भूलना चाहिये,इस कायनात का वज़ूद  नारी ही है!

 एक औरत को संभालने की ज़िम्मेदारी  पूरे समाज की है! अगर एक स्त्री सम्मानित है, पूरा समाज भी प्रगति करेगा,सारे देश का सम्मान भी एक औरत के वज़ूद पर निर्भर करता है!

जिस देश में,जिस समाज में  ना केवल औरत को देवी(Devi) के रुप में  पूजा जाता है बल्कि इज़्ज़त की नजरों से देखा जाता है,उस समाज को खुशहाली से कोई नहीं रोक सकता! सफलता उसके कदम चूमेगी!

 विभिन्न क्षेत्रों में अग्रसर होने लगी है आज की महिला! शिक्षा का क्षेत्र हो या चिकित्सक या इन्जीनियरिंग का क्षेत्र हो,किसी भी फील्ड में नारी पीछे नहीं रही! मर्दों के साथ कदम से कदम मिलाकर सफलता हासिल की है!

 देश की उन्नति में बहुत बड़ा सहयोग किया है!  एस्ट्रॉनोट हो या वैज्ञानिक..खुद को साबित किया है हमारे देश की नारी ने! थोड़े शब्दों में  कहें तो आज की नारी सक्षम है हर मुश्किल का सामना करने में! 

शहरी महिलाओं ने भी साबित किया है भारतीय समाज में  महिलाओं के स्टेटस को (Status of women in Indian society).

महिलाओ का सम्मान (Respect the women)

WOMEN’S ROLE IN INDIAN SOCIETY

 अगर हमारे देश की पुरातन वेदों,ग्रंथों या किसी भी महान पुस्तक को खोलकर देखें तो हर स्थान पर औरत को सम्मानीय स्थान प्राप्त है! नारी ही जन्मदायिनी, नारी ही सर्वकारिणी के रुप में अव्वल दर्जा हासिल है!

अगर महिलाओं  के मुख्य किरदार की बात की जाये, इस समाज में तो शायद इस बात में  भी कोई दोराय नहीं होगी कि धरती पर ज़िंदगी को लाने वाली, वंश को आगे बढ़ाने वाली एक औरत के सिवा ओर कोई भी नहीं! यही प्रमुख कार्य ही एक औरत का इस समाज को एक तोहफ़ा है।

अक्सर समाज बदलने की बात की जाती है! देश बदलने की बात की जाती है! अपने ही शहर में  बदलाव चाहते हैं लोग! परंतु कोई निष्कर्ष नहीं निकलता!

आखिर एक बन्दा कैसे समाज में बदलाव लाएगा? आखिर कैसे इतनी बड़ी जनसंख्या वाले देश को एक आदमी बदल सकता है?

कम जनसंख्या वाले शहर को भी तो एक आदमी नहीं  बदल सकता! ऐसे ही विचार रखने वाले कईं लोग मिल जायेंगे आपको! और फिर कुछ नहीं होता,सब हार जाते हैं “बदलने की विचारधारा से”!

 शायद अभिमन्यु की कहानी तो सबने सुनी होगी,कि कैसे माँ के गर्भ में  ही उसने ज्ञान प्राप्त किया था! महान ऋषियों- मुनियों का भी कहना था कि माँ के गर्भ में बच्चा बहुत कुछ ज्ञान प्राप्त करता है! माँ की स्थिति का प्रभाव भी बच्चे पर  पढ़ता है!

आत्मिक ज्ञान के माध्यम से समझा जाये तो अगर एक गर्भवती स्त्री को खुश रखा जाये, अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ी जायें, तो संस्कारों का रोपण तो गर्भ में ही हो जाता है,शिशु में!

सोचने में छोटी सी बात जरुर लगती है लेकिन यही छोटा सा प्रयास हमारे राष्ट्र को अनमोल मोती अदा करेंगे!समाज का भविष्य आने वाले बचपन में ही कहीं निहित है!

सोच का दायरा बड़ा करना होगा, एक छोटे से प्रयास से!इससे बड़ा और क्या किरदार निभा सकती है एक औरत! यह कहना असत्य ना होगा,यही समाज में  औरत की मुख्य भूमिका  है!

एक औरत की समाज में  विभिन्न भूमिकाएँ  (LIST OF ROLES OF A WOMAN IN OUR SOCIETY)

 बहुत सारी विचारधाराएँ हैं, स्त्री का रुप समझने के लिये! बहुत ऐसी सोच भी हैं जो स्त्री को महज़ एक कमज़ोर इन्सान के सिवा कुछ नहीं  समझती!

 फिर भी ये बताना और भी जरुरी हो जाता है,आखिर एक औरत(Lady) क्या कर सकती है समाज के लिये ,देश के लिये! आइये प्रकाश डालते हैं ऐसे ही कुछ पहलुओं पर!

समाजिक व्यवहार (SOCIAL CONDITIONING)

Social CONDITIONING कुछ इस तरह से की गई है,हर इन्सान की सोच की। कि महिलायें पुरुषों से ज्यादा सहनशील है! पर सच्चाई ये है कि आत्मिक ज्ञान के पहलू पर नज़र डाले तो ज्ञात होगा,संस्कार रूह के होते हैं किसी Gender के नहीं!

पुरुषों के हाथों में है समाज की डोर और औरत ने भी चुप रहना सीख लिया! जरूरत है औरत की ताकत को पहचानने की। अपने जीवनसाथी को अगर पुरुष better half के सही अर्थ से पहचाने तो स्त्री को भी अपनी ताकत का एहसास होगा।

नैतिकता (MORALITY)

समाज में नैतिकता की सबसे ज्यादा जरूरत है! औरत को सम्मान की दृष्टि से देखा जाये! यही तो खुशहाल राष्ट्र की पहचान है

अधिकार (RIGHTS)

 मर्द  और औरत दोनों का वज़ूद ही निर्धारित करता है,एक समाज का अस्तित्व!समान  अधिकार और कर्तव्य भी औरत को सक्षम बनाने में कारगर हैं! जरूरत है सोच में  बदलाव की!

शिक्षा (EDUCATION)

शिक्षित औरत ही अपने परिवार को शिक्षित कर सकती है! राष्ट्र का उज्जवल भविष्य निर्धारित करती है ( woman’s  role in Society)

सुरक्षा (SECURITY)

 शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षित  माहौल भी आवश्यक है, औरत के साथ राष्ट्र के अच्छे माहौल के लिये!

प्रेरणास्त्रोत (SUPPORT)

 अगर एक स्त्री को मर्द से तुलना ना की जाये! एक अलग इन्सान की तरह व्यवहार किया जाये!तो शायद एक नये समाज का निर्माण होगा!civilisation में महिलों का भी महत्त्वपूर्ण हाथ है।

सामाजिक नियम (SOCIAL ETHICS)

हर जगह पर उँगली उठाना या औरत को टारगेट करना …ऐसी रुढ़ीवादी सोच को बदलना होगा!समझना होगा ,नारी के अस्तित्व को बचाना होगा!

5.समाज में एक औरत की भूमिका में  बदलाव (HOW HAS  A WOMAN’S ROLE CHANGED IN SOCIETY):‐

नारी की महत्ता को समझने के लिये बहुत जरुरी है कि कुछ जरुरी बातों पर ध्यान दिया जाये,तभी बदल सकता है,नारी का संसार .

1. लोगों की मानसिकता बदलने के लिये शुरुआत परिवार से की जानी चाहिये! लड़का हो या लड़की परवरिश में कोई अंतर नहीं  होना चाहिये!

2. शिक्षा के साथ सुरक्षित माहौल भी बनाना  होगा समाज में!

3. परिवार में  ही लड़कों को नैतिकता सिखानी होगी! औरत की इज़्ज़त करना सिखाना होगा !

4.एक बच्ची को बचपन से ही मानसिक रुप से ताकतवर बनाना होगा ,आज़ादी(Freedom) देनी होगी।

5. विभिन्न क्षेत्रों में प्रोत्साहित करना होगा!

6. स्कूलों से ही योग को बढ़ावा दिया जाये! “खुद पर संयम रखना “सिखाया जाना चाहिये! थोड़े से बदलाव से ही, भारतीय समाज में औरत की पोज़ीशन(Position of women in Indian Society)बेहतर हो सकती है!

निष्कर्ष(CONCLUSION)

समाज की उन्नति में  एक औरत का योगदान (WOMAN’S CONTRIBUTION TO THE DEVELOPMENT OF THE SOCIETY)

 हर पहलू पर गौर  करने पर इतना तो समझ पाये हैं कि एक औरत की उन्नति में ही राष्ट्र की उन्नति निहित है! शिक्षित महिला ही अपने परिवार,अपने देश और अपने समाज को उन्नतशील बना सकती है! बस थोड़े से नजरिये और थोड़ी  सोच बदलने की जरूरत है!

नारी,सिर्फ़ खूबसूरत जिस्म ही नहीं,एक खूबसूरत अस्तित्व है,जिसके बिना इस कायनात का वज़ूद ही संभव नहीं!गहन अध्ययन करने के बाद  पता चला कि किस तरह एक महिला हमारे समाज का,हमारे देश का,हमारे परिवार का एक अनमोल हिस्सा है!

जो हमारे भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका( Women’s role in Indian Society) को स्पष्ट रुप से दर्शाती है। और समाज की प्रगति में  प्रेरणादायक है!

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